जाने कहां वो

April 3, 2017 in Other

जाने  कहां वो,

सिलसिले  रह गये,

कोई शिकवे ना गिले रह गये,

अब जिंदगी पहुंच गई उस मुकाम पर,

जहां तुम  तुम  ना रह गये,

और हम  हम  ना रह गये।

और हम हम ना रह गये।

कोई शिकवा नहीं है

April 3, 2017 in हाइकु

कभी रुलाया है,

तो कभी हंसाया भी है,

जिन्दगी तुझसे कोई शिकवा नहीं है,

कभी खोया है,

तो कभी पाया भी है

बदल गया है देश

July 6, 2016 in Other

वो कहते हैं अपनी सरकार आते ही बदल गया है देश, 

रंग है बदला रूप है बदला और बदल गया परिवेश,

बेवजह झूठे दावे करने की इनको लगी बीमारी है,

भुखमरी, भ्रष्टाचार, महंगाई से से कहां मुक्त हो गया देश।

 

जिज्ञासु

कहो तो

June 12, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कहो तो दिल की कलम से तुम्हारी तस्वीर बना दूँ,

 कहो तो  मोहब्बत के हसीन रंगों से उसे सजा दूँ,

और भी कुछ हसरतें बाकी हैं इस शीशा ऐ दिल में, 

कहो तो इस तस्वीर को ही अपनी तकदीर बना 

लूँ।

 

 

 

फूलों से सीख लो

June 11, 2016 in हाइकु

फूल से  सीख लो यारों  जीवन  का  फलसफा, 

कांटों में भी मुस्कुराने का अंदाज बयां करते हैं।                                                     जिज्ञासु 


सत्ता के दलाल

June 9, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

धर्म  बेच देते हैं,

इमान बेच देते हैं,  

वतन की इज्जत,

और सामान बेच देते हैं,

चंद वोटों की खातिर,

सत्ता  के  दलाल,

हिंदू और मुसलमान बेच देते हैं,

बड़े  बेगैरत  होते हैं,

ये  सब  जानते  हैं,

चंद पैसों की खातिर,

गीता और कुरान बेच देते हैं।

बी के जिज्ञासु

 

 

 

कोई सौदा नहीं होता

May 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

दिलवालों की दुनिया में कोई सौदा नहीं होता,

प्यार  से  अनमोल  कोई  तोहफा  नहीं  होता,

दौलत  के  तराजू  में  ना  इसको  तोलो यारों ,

ये  प्यार  है  कभी   कम – ज्यादा  नहीं  होता।

जिज्ञासु

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