मैं किसान हूं|

February 20, 2021 in Poetry on Picture Contest

मैं किसान हूं , हां मैं किसान हूं |
धरती मां की मैं ही आन बान शान हूं|
मैं किसान हूं||
धरती मां को चीर के तुम्हें खिलाया है,
अपना पसीना पौछकर तुम्हें जिलाया है,
अपनी नींदें भूलकर तुम्हें सुलाया है,
तुमने मुझको आज क्यों इतना रुलाया है,
यह मत भूलो मैं करता ,अन्न दान हूं
मैं किसान हूं , हां मैं किसान हूं|
मैं किसान हूं||
मैं सड़कों पर आज हुआ क्यों,
इतना मैं मजबूर हुआ क्यों,
मुझको तुमने छोड़ दिया क्यों,
लाके ऐसा मोड़ दिया क्यों,
देश का दुश्मन बना दिया क्यों,
खुद से हमको अलग किया क्यों,
तुम राष्ट्रगीत हो तो मैं राष्ट्रगान हूं
मैं किसान हूं हां मैं किसान हूं|
मैं किसान हूं||

नया साल

January 1, 2021 in गीत

भूल जाओ बीता साल जो हुआ सो हुआ
कुछ नई उम्मीद ले नया साल आ गया|

नए रंग भरेंगे जीवन में
कुछ नया करेंगे जीवन में
खुशियों के थाल सजाएंगे
बीती बातें बिसराऐगे
हम नई मंजिल पाएंगे
नए- नए साहिल पाएंगे
क्यों न सुधारे बिगड़े रिश्ते ,जो हुआ सो हुआ
कुछ नई उम्मीदें ले नया साल आ गया||
फूल चमन में नये खेलेंगे
उम्मीदों के पंख मिलेंगे
फिर नये बादल छाएंगे
सुंदर से मौसम आएंगे
स्वागत करें नए सपनों का
संग सदा रहे अपनो का
यू आपस में प्यार बढ़ाएं जो हुआ सो हुआ
कुछ नई उम्मीदें ले नया साल आ गया||
डॉ कुमार धीरेंद्र

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