खूबसूरत सुबह
April 5, 2021 in मुक्तक
खूबसूरत सुबह
तुझे प्रणाम है मेरा,
सूर्य की रश्मियों को
आज प्रणाम मेरा।
खिल रही दिशाएं
चहकते खग वृंदों,
चमकती ओस बूंदो
तुन्हें प्रणाम मेरा।
तुम्हें प्रणाम मेरा।
by Piyush Joshi
April 5, 2021 in मुक्तक
खूबसूरत सुबह
तुझे प्रणाम है मेरा,
सूर्य की रश्मियों को
आज प्रणाम मेरा।
खिल रही दिशाएं
चहकते खग वृंदों,
चमकती ओस बूंदो
तुन्हें प्रणाम मेरा।
तुम्हें प्रणाम मेरा।
by Piyush Joshi
March 10, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
स्याह काली रात
किस तरह हो
सितारों से
मतलब की बात,
कुंडली में अंकित
ग्रह नक्षत्र,
दिख रहे आकाश में,
मगर भाग्य है अवकाश में,
फिर भी हूँ आस में,
क्योंकि कोई तो है पास में।
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by Piyush Joshi
February 16, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
बातें बना रहे हो
बेकार में अनेकों
चाहत कहाँ है गुम सी
पायल की मीठी छम सी।
डग-मग कदम चले हैं
जिस ओर हम चले हैं
नजरों का फर्क क्यों है
मन से तो हम भले हैं।
चारों तरह सवेरा
मन में घिरा अंधेरा,
उग आई क्यों निराशा
खुद से ही खुद छले हैं।
सोते समय जगे हैं
जगते समय हैं सोये
पाया नहीं है पाना
अश्कों में हम गले हैं।
तुम भी रहे हो बहका
समझे हो क्यों खिलौना
मुस्का दो आज फिर से
मैं तो हूँ, अब कहो ना।
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by Piyush Joshi
February 14, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
प्रेम के इजहार का दिन है प्यारे
तू क्यों पीछे होता है,
दे दे प्रिय को तोहफे में फूल,
नहीं तो चुभेगा हृदय में शूल
आँखों से बहेगी लघु सिंचाई की गूल
इससे पहले कि हमारे भीतर
उग आयें पुराने ख्यायलात
रूढ़ि के वशीभूत हम
मामले को दे दें तूल
हैप्पी वेलेंटाइन डे कहना मत भूल..।
अन्यथा हृदय में रह जायेगी कसक
क्यों नहीं कहा होगा
सोच कर भीतर चुभेंगे शूल,
अतः कह डाल
मिटा दे प्रेम पर पड़ी धूल,
अभी भी समय है प्यारे
हैप्पी वेलेंटाइन डे
कहना मत भूल।
उठ मुहब्बत के झूले में झूल
मन में कांटों की जगह
उगा ले फूल
प्रिय को दे दे तोहफे में फूल।
Tags: संपादक की पसंद Comments Off on इजहार का दिन है
by Piyush Joshi
by Piyush Joshi
by Piyush Joshi
December 31, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
गाइये गीत मन की उमंगों भरे,
जिससे जीवन में उत्साह का वास हो,
हर तरह की निराशा रहे दूर अब
दर्द हो ही नहीं बल्कि उल्लास हो।
by Piyush Joshi
December 29, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
आपकी खुशमिजाजी
है अनोखी,
स्वयं खुश रह कर
दूसरे में
खुशी के बीज बोती है।
प्यार करने व
नफरत दूर करने के
सुहाने बीज बोती है।
by Piyush Joshi
December 27, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
आपकी लाठी
हमारी भैंस है
हाँकिये ना
आपकी तो ऐश है।
एक दूजे पर गिराकर कीच को
जीत में अब
किस तरह का पेंच है।
हो न हो मुद्दों का हल
रहने भी दो,
आपसी विद्वेष तो
बढ़ने न दो।
एक होकर बात को
आगे बढ़ाओ,
कुछ नई उपलब्धि लाओ
दम लगाओ।
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