Skip to content
Saavan

Proudful Profile for a Poet

  • Read
  • Publish
  • Engage
    • Members
    • Discuss
    • Groups

Vijay Maloo

Profile photo of Vijay Maloo

Vijay Maloo

@Vijay Maloo • Joined Sep 2016 • Active 9 years ago

Remove Connection

Are you sure you want to remove from your connections?

Cancel Confirm
  • Profile
  • Timeline
  • Connections
  • Groups
  • Blog
  • Forums

by Vijay Maloo

काश!

April 25, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

कितना अच्छा होता कि
कोई वक़्त को टटोल सकता
झाँक सकता
उसके पिछले हिस्सों में
किस्सों में
कोई कमी ना रहती
सदा के लिए
शायद
अगर ऐसा हो सकता
या यूं कहो
कि बिखरी हुई तस्वीर को
फिर से
जोड़ पाना
मुमकिन हो सकता था
काश
हकीकत जैसी होती है
उसे ज्यों का त्यों
हरेक बयां कर पाता
उसे महसूस कर पाता
कम से कम
अपना पाता
क्यू्ं कई बार
ना चाहते हुए भी
वक़्त से इतना अागे आ जाते हैं
कि वापस जाना
मुमकिन नहीं होता
और अगर कोई
उसी राह पर चल रहा हो
तो क्यूं
उसे रोक नहीं पाते
मानो कि
सदियों से चली आ रही
परंपरा की बेड़ियां
हाथों और जुबां को जकड़े है
क्यूं हर बड़ी खुशी में
उस छोटी सी
सिकन का आना जरूरी है
गर जरूरी नहीं
तो क्यूं आती है वो
बार बार

3 Comments »

by Vijay Maloo

किसी-रोज़-सब-साथ-होंगे

December 12, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

किसी रोज़ सब साथ होंगे
मिलेंगे, बैठेंगे, जुमले फरमाएंगे

एक कप चाय के साथ
फिर भिड़ जायेंगे

वही कल जो बीत गया
फिर से दोहराएंगे

वो बातें जो अधूरी रह गयी
उन्हें पूरा करने आएंगे

वो शाम जो कभी ढल गयी थी ..
वो शाम फिर से लाएंगे

वो वक़्त
जो उस वक़्त रुका नहीं था
उस वक़्त को ठहराएंगे

अपनी अपनी किस्सो की
कहानी के किरदार
फिर से निभाएंगे

वो आंख जो नम-सी थी
अब..
हल्का सा रो जायेंगे

वो जुबां जो कभी रूकती न थी
आज कुछ बोल नहीं रही ..
उस उम्र का वो लड़कपन
फिर से जी जायेंगे

कोई रोया हो या कोई किसी के दर्द में झुलसा हो
खिल्ली सबकी उड़ाएंगे

वो मन जो कभी बच्चा था
फिर उस पल में लौट आएंगे

उस चुप रहने वाले आशिक़ को फिर से थोड़ा सतायेंगे

उन बीती यादों को लेकर
नई याद बनाएंगे

अपनी कट रही ज़िन्दगी का
हाल-ए-बयां सुनाएंगे

जो प्यार अधूरा रह गया
उस पर
ज़रा मुस्करायेंगे

वो यारी जो सदा के लिए रह गयी उस पर नाज़ जताएंगे

वो दूरी जो बनाई है
उसे उसी पल मिटायेंगे

किसी शाम उस रुख़सत को
फिर से यूँ दोहराएंगे

किसी रोज़ जब साथ होंगे
तब वो पुरानी ज़िन्दगी बिताएंगे

– Vijay Maloo

किसी रोज़ सब साथ होंगे


/

2 Comments »

by Vijay Maloo

आसान नहीं है उड़ना कई मर्तबा गिरना होगा

November 20, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

आसान नहीं है उड़ना कई मर्तबा गिरना होगा


 

वो जो ठहरे हैं हवा में

कभी घसीटे गए होंगे जमीं की धूल में,

गर चाह है उस जिंदगी की

जिया जिसे तु सपनो में..

ना फिक्र कर

तु है उस दिशा में

जहाँ कुछ खा़स तेरे संग

होने को है..

आँधीयां तो आएगी तेरी

जलती लौ को थामने..

ना घबरा इनसे तु कभी

तु आज में कल को संजो,

कुछ पाना है तो कर गुज़र

हो सकता है कई दफा

टुटे तु हर राह पर

आसान नहीं हैं जीना यूं कई मर्तबा मरना होगा !

जो ठान ली तो कर दिखा

मानो जैसे,

मन बसा हो उस मंजि़ल में

गर ना हुआ तो फिर सही ..

गर हो गया तो कहना क्या !!

https://myreadss.wordpress.com

Comments Off on आसान नहीं है उड़ना कई मर्तबा गिरना होगा

by Vijay Maloo

आसान नहीं है उड़ना कई मर्तबा गिरना होगा

November 20, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

आसान नहीं है उड़ना कई मर्तबा गिरना होगा

वो जो ठहरे हैं हवा में

कभी घसीटे गए होंगे जमीं की धूल में,

गर चाह है उस जिंदगी की

जिया जिसे तु सपनो में..

ना फिक्र कर

तु है उस दिशा में

जहाँ कुछ खा़स तेरे संग

होने को है..

आँधीयां तो आएगी तेरी

जलती लौ को थामने..

ना घबरा इनसे तु कभी

तु आज में कल को संजो,

कुछ पाना है तो कर गुज़र

हो सकता है कई दफा

टुटे तु हर राह पर

आसान नहीं हैं जीना यूं कई मर्तबा मरना होगा !

जो ठान ली तो कर दिखा

मानो जैसे,

मन बसा हो उस मंजि़ल में

गर ना हुआ तो फिर सही ..

गर हो गया तो कहना क्या !!

 

myreadss.wordpress.com

Comments Off on आसान नहीं है उड़ना कई मर्तबा गिरना होगा

by Vijay Maloo

याद

October 16, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

था बे हरकत ऐसे मैं
कि ज़िंदा लाश हो जैसे ,
तेरी उन यादों के ख़ब्त से
जीना सीख आया हूँ

-vijay

1 Comment »

by Vijay Maloo

यार अनमुल्ले

September 27, 2016 in शेर-ओ-शायरी

भागता है

आज भी मन

उस सुहानी राह पर,

होती ठिठौली और हँसी की ..

गूँज

जो हर बात पर,

मिल बैठ कर..

जब यार खोले

पोल जो हर बात की ..

जुम्ले है सारे याद ..

जो चल रहे थे

रात भर ||

2 Comments »

by Vijay Maloo

ख़्याल मन का कहने दे

September 20, 2016 in शेर-ओ-शायरी

ठहरा दे

इस वक़्त को

ये वक़्त गुज़र जाएगा

कुछ बात अब भी है हलक तक

वो एहसास बयां ..करने तो दे |

गफलत हुए अरसा हुआ

पर मलाल उसका..

ज़िंदा है

गर ना करे तु बात..

मुलाकात निगाहों को.. करने दे |

कहा ना मैंने कुछ…

चुप तुम भी रहे,

ख़ामोशी ये नज़र-ए-प्यार की

ज़रा..

कुछ पल  तो रहने दे |

हुई जब गुफ़्तगू दरमियान

गलत फहमी का सागर था,

समझ ना पाए तुम हमको

इस घाव को ..भरने तो दे |

कुछ कह सका.. कुछ रह गया

कुछ मन ही मन में बह गया..

जो रह गया ..जो बाक़ी है.. वो…

ख़्याल मन का कहने दे |

माना कि नादां हम भी थे

पर गलती दोनों से हुई..

अब छोड़ पुरानी बातों को

इक नया किस्सा ..बनने तो दे ||

1 Comment »

Saavan

Proudful Profile for a Poet

COPYRIGHT © 2026 - Saavan // Designed By - ZeeTheme

Report

There was a problem reporting this post.

Harassment or bullying behavior
Contains mature or sensitive content
Contains misleading or false information
Contains abusive or derogatory content
Contains spam, fake content or potential malware

Block Member?

Please confirm you want to block this member.

You will no longer be able to:

  • See blocked member's posts
  • Mention this member in posts
  • Invite this member to groups
  • Message this member
  • Add this member as a connection

Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.

Report

You have already reported this .