किसतरह तेरी यादों की रात जाएगी? किसतरह तेरे गम की सौगात जाएगी? जागे हुए हैं ख्वाब भी आँखों में कबसे, कब तेरी चाहत से मुलाकात जाएगी? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरी उम्र तन्हाई में गुजर न जाए कहीं! तेरी जिन्दगी अश्कों में बिखर न जाए कहीं! क्यों इसकदर मगरूर हो तुम अपने हुस्न पर? कोई गम कभी दामन में उतर न जाए कहीं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

आरजू हालात की मोहताज नहीं होती है! ख्वाहिशों में लफ्जों की आवाज नहीं होती है! जब रोक देती है कदमों को तकदीरे-मंजिल, हर आदमी की कोशिश आगाज नहीं होती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

आरजू हालात की मोहताज नहीं होती है! ख्वाहिशों में लफ्जों की आवाज नहीं होती है! जब रोक देती है कदमों को तकदीरे-मंजिल, हर आदमी की कोशिश आगाज नहीं होती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जब हमारा किसी से रिश्ता टूट जाता है! प्यार का हाथों से गुलिस्ताँ छूट जाता है! हम खोजते हैं मंजिलें वफाओं की लेकिन, रास्तों में वक्त का फरिश्ता रूठ जाता है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

आज भी मुझको तेरा हसरत-ए-दीदार है! आज भी मेरी नजर को तेरा इंतजार है! जोड़ता रहता हूँ तेरी चाहतों की कड़ियाँ, आज भी मुझको तमन्ना तेरी बार बार है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैं तेरी तमन्ना को छोड़कर आया हूँ! मैं दर्द की बंदिश को तोड़कर आया हूँ! मैं भूल गया हूँ मंजिलें राह-ए-इश्क की, अश्कों के तूफान को मोड़कर आया हूँ! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

मेरा सकून तेरी मुलाकातों में है! तेरी तमन्ना दिल के जज्बातों में है! हरवक्त खींच लेती है तेरी जुस्तजू, तेरी यादों की खूशबू रातों में है! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

जबसे तेरी चाहत में नाकाम हो गया हूँ! दर्द और तन्हाई का पैगाम हो गया हूँ! मैं ढूंढता रहता हूँ सब्र को पैमानों में, तेरी याद में भटकी हुई शाम हो गया हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जबसे तेरी चाहत में नाकाम हो गया हूँ! दर्द और तन्हाई का पैगाम हो गया हूँ! मैं ढूंढता रहता हूँ सब्र को पैमानों में, तेरी याद में भटकी हुई शाम हो गया हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जबसे तेरी चाहत में नाकाम हो गया हूँ! दर्द और तन्हाई का पैगाम हो गया हूँ! मैं ढूंढता रहता हूँ सब्र को पैमानों में, तेरी याद में भटकी हुई शाम हो गया हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

अभी रिश्ता दिलों का धड़कनों में चलने दो! अभी #शामे_तन्हाई को रात में ढलने दो! कभी तो मिलेगा हमें भी रास्ता मंजिल का, रोशनी उम्मीद की बेखौफ सा जलने दो! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

क्यों जिन्दगी में प्यार से डरे हुए हैं लोग? राहों में मददगार से डरे हुए हैं लोग! ठहरी सी परछाइयां हैं मंजिलें बनकर, गमों के कारोबार से डरे हुए हैं लोग! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

आज कल के महंगे बॉलपेन से , मेरी कच्ची पेंसिल अच्छी थी || बॉलपेन की रफ़्तार से , मेरी पेंसिल की धीमी लिखावट अच्छी थी || गलती पर रब्बर पेंसिल का साथ , होता गुरु […]

काश तुमसे चाहत को बोल पाता मैं भी! काश गाँठें लफ्जों की खोल पाता मैं भी! ठहरी हुई निगाहें हैं मेरी पत्थर सी, काश तेरी बाँहों में डोल पाता मैं भी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तुमको देखकर मेरा दिल मचलता है! तुमको सोचकर मेरा दिल बहलता है! कैसे मैं लगाऊँ जख्मों पर बंदिशें? मुझको गमें-ख्याल दिन रात कुचलता है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

हार कर भी तेरी कहानी की तरह हूँ! हार कर भी तेरी निशानी की तरह हूँ! ठोकरें खाता रहा हूँ उम्र भर लेकिन, जोशे-जिदंगी में जवानी की तरह हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

एक तू ही है जो नहीं है बाकि तो सब हैं लेकिन… तेरे न होने का वज़ूद भी सबके होने पे भारी है मुझे भी जैसे तुझे सोचते रहने की एक अज़ीब बीमारी है। नहीं […]

तेरी चाहत मेरी आदत सी बन गयी है! मेरी जिन्दगी की अमानत सी बन गयी है! पलकों में चलते रहते हैं यादों के कदम, मेरी बंदगी की इबारत सी बन गयी है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरा कबतलक मैं इंतजार करता रहूँ? तेरी वफा पर मैं ऐतबार करता रहूँ? दफ़न हो गयी है अंधेरों में जिन्दगी, दर्दे-जुदाई में तुमसे प्यार करता रहूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरी यादों की तन्हाई से डर जाता हूँ! तेरी चाहत की परछाई से डर जाता हूँ! टूट गये हैं ख्वाब सभी तेरी रुसवाई से, तेरी जुल्फ की अंगड़ाई से डर जाता हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

अब तो मंजिलों के भी दाम हो गये हैं! रिश्ते जिन्दगी के नीलाम हो गये हैं! दर्द की लकीरें तैरती हैं अश्कों में, अब तो जख्मों के कई नाम हो गये हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरा ख्याल जब कभी मुझको चूमता है! हरतरफ फिजाओं में सावन झूमता है! कबतलक मैं रोकूँगा प्यास धड़कनों की? हर घड़ी दिल में तेरा ख्वाब घूमता है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

शाम की तन्हाई में खामोशी आ रही है! ख्वाबों और ख्यालों की सरगोशी आ रही है! मुमकिन नहीं है रोकना यादों के कदमों को, दिल में तेरे प्यार की मदहोशी आ रही है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

इसकदर उलझी है जिन्दगी तकदीरों में! हम राह ढूंढते हैं हाथ की लकीरों में! इंसान डर रहा है आशियाँ बनाने से, बंट गयी हैं बस्तियाँ कौम की जागीरों में! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरे बगैर जिन्दगी बेजान सी रहती है! तेरी बेवफाई से हैरान सी रहती है! मेरी राह थक गयी है अब तो इंतजार की, तेरी चाहत दिल में परेशान सी रहती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरी आँखों में झील सी गहरायी है! तेरी अदाओं में कैद अंगड़ायी है! जबसे देख लिया है तेरे रुखसार को, तेरी जिगर में तस्वीर उतर आयी है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरे बिना मेरी जिन्दगी कटेगी कैसे? तेरे बिना मेरी तिश्नगी मिटेगी कैसे? तेरी बेपनाह चाहत है आज भी दिल में, तेरी आरजू इरादों से हटेगी कैसे? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरा ख्याल क्यों मुझको आता ही रहता है? तेरा ख्याल मुझको तरसाता ही रहता है! तेरी याद जुड़ गयी है साँसों की डोर से, तेरा प्यार मुझको तड़पाता ही रहता है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

शामें-गम को तेरे नाम मैं करता हूँ! दर्दे-तन्हाई को सलाम मैं करता हूँ! शौक अभी जिन्दा है खुद को जलाने का, बस यही शामों-सहर काम मैं करता हूँ! मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

कुछ लोग खुद को तेरा दीवाना कहते हैं! कुछ लोग खुद को तेरा परवाना कहते हैं! कई लोग ढूँढते हैं पैमानों में तुमको, तेरी अदाओं को शराबखाना कहते हैं! मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

कुछ लोग खुद को तेरा दीवाना कहते हैं! कुछ लोग खुद को तेरा परवाना कहते हैं! कई लोग ढूँढते हैं पैमानों में तुमको, तेरी अदाओं को शराबखाना कहते हैं! मुक्तककार-#मिथिलेश_राय