मित्रता – तीर्थ ना जो जा पाया व्यर्थ मानव का जन्म है पाया। मित्र बिन जिंदगी मरुस्थल सी , मित्रता जल ने उसे हरियाया । मेरे प्यारे मित्रो , प्रातःकाल की मधुर अनुभूति की सुहानी […]

हम तो ख्वाबों की चौखट पर बैठे थे , लेकर हसीन ख्वाब … प्यारी आँखों के परदे पर || ख्वाबों को ख्वाब बनाने , आया एक मुसाफिर , रख दिया ख्वाबों को , उसने जलती […]

कोई नहीं है मंजिल न कोई ठिकाना है! हरपल तेरी याद में खुद को तड़पाना है! मैं कैसे रोक सकूँगा नुमाइश जख्मों की? जब शामे-तन्हाई में खुद को जलाना है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

शीत के सवेरे में , गरमागरम राम राम , भज ले मन राम राम , बन जायें बिगड़े काम। पल भर निर्मल मन से जोभी याद करता है । वह विपदाओं से ,कभी , तिल […]

मुझको याद फिर तेरा जमाना आ रहा है! मुझको याद फिर तेरा फसाना आ रहा है! चाहत की मदहोशी से जागी है तिश्नगी, मुझको याद तेरा मुस्कुराना आ रहा है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

माँ महेंगे होटलो मे भी (“रहस्य”) तेरी हाथों कि वो दो रोटियाॅ कहीं और बिकती नहीं माँ महँगे होटलों में भी खाने से भूख मिटती नही “””””””””” “””””””””” गरमाहट बहुत मिलती थी तेरी ऑचल कि […]

दुआएं सुबह करें ,शाम करें , प्यार कुछ मित्रता के नाम करें । अपने हर मित्र का भला चाहें , जिंदगी मित्रता का धाम करें। जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो…. सपरिवारसहर्ष , मित्रतामय सवेरे की […]

Happy mother day मेरे तरफ से एक छोटी सी कोशिश उम्मीद करता हूँ सबको पसंद आएगा €€€€€€€€€€€€€ ऐसी बेबसी भरी जिन्दगी देने की वजहा बता देता, ऐसा क्या किये थे तू मुझे मेरी खता बता […]

एक और मासूम की जिन्दगी (“रहस्य”) ?????? दौलत की चाहने रिश्तों के धागे को तार तार कर दिया हैं, एक और मासूम की जिन्दगी को मरने पर लाचार कर दिया हैं,, ?????? पापा सब दिया […]

मुर्दों को उठाने चलें है ” रहस्य “देवरिया अफ़सोस की हम सबको जगाने चलें है , हाँ ये सच है की मुर्दों को उठाने चलें है,, हर हिन्दू मस्त है अपनें मे जमाने से बेखबर […]

जिस्म को मेरे जलाये होंगे “रहस्य”देवरिया दर्द कितने खुद में हमने छुपाये होंगे , तूने जब दिल को मेरे जलाया होगा , ये रूह मायूस बेबस होकर तूझ से , जब तन्हाई में खुद को […]

जिस्म को मेरे जलाये होंगे “रहस्य”देवरिया दर्द कितने खुद में हमने छुपाये होंगे , तूने जब दिल को मेरे जलाया होगा , ये रूह मायूस बेबस होकर तूझ से , जब तन्हाई में खुद को […]

लम्हे बचें जो जिंदगी के वो खुल के काट लें, जो बाकी रह जाए पिटारे में उसे आपस में बांट लें, वो नीले समंदर के किनारे, पिघले मोती से अंगारे, चल ख्वाहिशों की मुट्ठी में […]

रास्ताें से गुजरते हुए ईक शहर नजर आया, जिससे उढते धुएँ में इंसानियत का रिसता खुन नज़र आया, हँसते हुए चेहराे में, खुद को झूठा साबित करता हर इंसान जाे पाया, तब कहीं जाकर हमें […]

मधुर सुवह का प्यार मित्रो , मधुर सुवह का प्यार । नहीं मित्रता से बढ़ कोई , है कोई उपहार । सदा मित्रता भाव हृदय में , प्रेम-सुधा बरसाते । रोम रोम हर्षाता , हर […]

अपने मित्रों की पीर हरण , जो करता है । मित्रता -कसौटी , जगजाहिर, वो करता है । जब विपदाओं के ,चक्रव्यूह में, मित्र फँसे , फिर अर्जुन जैसा बन कर मित्र , कर्तव्य उजागर […]

मैं बेटी हूँ….. मैं गुड़िया मिट्टी की हूँ। खामोश सदा मैं रहती हूँ। मैं बेटी हूँ….. मैं धरती माँ की बेटी हूँ। निःश्वास साँस मैं ढोती हूँ। मैं बेटी हूँ…….. मैं गुड़िया मिट्टी की हूँ। […]

होते ही शाम तेरी प्यास चली आती है! मेरे ख्यालों में बदहवास चली आती है! उस वक्त टकराता हूँ गम की दीवारों से, जब भी यादों की लहर पास चली आती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरे सिवा दिल में कोई आता नहीं कभी! तेरे सिवा दिल को कोई भाता नहीं कभी! मुझे मंजिल मिल न पायी तकदीर से लेकिन, सिलसिला तेरी यादों का जाता नहीं कभी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मेरी नजर से दूर तुम जाया न करो! मेरी चाहत को तुम तड़पाया न करो! तेरे लिए बेचैन हैं मेरी ख्वाहिशें, मेरे प्यार पर गमों का साया न करो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मुझसा कोई तेरा दीवाना नहीं होगा! मुझसा कोई तेरा परवाना नहीं होगा! हार चुका हूँ मंजिल को तकदीर से लेकिन, मुझसा कभी मशहूर अफसाना नहीं होगा! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मंजिल की तलाश में तूफान मिल जाते हैं! रास्तों में ख्वाबों के शमशान मिल जाते हैं! उस वक्त भीग जाती हैं आँखें अश्कों से, जब कभी भी यादों के निशान मिल जाते हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

कविता – ऐसा वक्त कहाँ से लाऊं वेफिकरी की अलसाई सी उजली सुबहें काली रातें हकलाने की तुतलाई सी आधी और अधूरी बातें आंगन में फिर लेट रात को चमकीले से तारे गिनना सुबह हुए […]

मैं कबतक राह देखूँगा तेरे आने की? तुमको राहे-जिन्दगी में फिर से पाने की! धीरे धीरे चुभ रही है तन्हाई दिल में, जाग उठी है जुस्तजू फिर से पैमाने की! #महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं

क्यों तुम शमा-ए-चाहत को बुझाकर चले गये? क्यों तुम मेरी जिन्दगी में आकर चले गये? हर गम को जब तेरे लिए सहता रहा हूँ मैं, क्यों तुम मेरे प्यार को ठुकराकर चले गये? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मेरे दिल से तेरी बेवफाई न गयी! मेरी नजर से तेरी रुसवाई न गयी! मुश्किल से अंजाम को भूला हूँ लेकिन, तेरे प्यार की कभी अंगड़ाई न गयी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जो दिल में छुपी हुई है उस बात को समझो! जो मुझको तड़पाती है उस रात को समझो! कभी नींद नहीं आती है तेरी चाहत को, मेरी इस बेचैनी की हालात को समझो! मुक्तककार – […]

जिन्दगी जब भी किसी से प्यार करती है! हर वक्त उसी का इंतजार करती है! शाम गुजर जाती है उसी की यादों में, रात तन्हाई की बेकरार करती है! रचनाकार- #मिथिलेश_राय

जिन्दगी जब भी किसी से प्यार करती है! हर वक्त उसी का इंतजार करती है! शाम गुजर जाती है उसी की यादों में, रात तन्हाई की बेकरार करती है! रचनाकार- #मिथिलेश_राय

काश तुमको फिर से याद मैं आ जाऊँ! काश तुमको फिर से जिन्दगी में पाऊँ! तेरे दर्द को भूल सकता हूँ लेकिन, कैसे तेरे प्यार को दिल से मिटाऊँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

फाल्गुन की ब्यार में, कोयल की थी कूक गिरते हुए पत्तों की सरसराहट उर में उठाती थी हूक॥ जीवंत हो उठी झंझाएँ मानो कुछ कहती थीं रह-रहकर आती चिड़ियों की चहचहाहट निज क्रंदन का राग […]

सामने है साकी मंजिल भी शराब है! मेरी जुस्तजू में तेरा ही शबाब है! तिश्नगी जाती नहीं है तेरी जिगर से, तेरी #अदा_ए_हुस्न इतनी लाजवाब है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

कभी गम कभी मुझको तन्हाई मार देती है! तेरी तमन्नाओं को जुदाई मार देती है! मैं राहे-इंतजार में बैठा हुआ हूँ लेकिन, ऐतबार को तेरी रुसवाई मार देती है! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

तेरी बेवफाई से कहीं मैं बदल न जाऊँ? इंतजार की ज्वाला से कहीं मैं जल न जाऊँ? मुझे दर्द डराता है हर वक्त तन्हाई में, सब्र के चट्टानों से कहीं मैं फिसल न जाऊँ? मुक्तककार- […]

कुछ लोग जिन्दगी में यूँ ही चले आते हैं! कुछ लोग वफाओं को यूँ ही भूल जाते हैं! कई लोग तड़पते हैं किसी की जुदाई में, कुछ किसी के दर्द पर यूँ ही मुस्कुराते हैं! […]

मैं जिन्दगी में मंजिले-मुकाम तक न पहुँचा! मैं जिन्दगी में प्यार के पयाम तक न पहुँचा! यादों की डोर से बंधा हूँ आज भी मगर, मैं अपनी चाहतों के अंजाम तक न पहुँचा! रचनाकार – […]