जिन नजरों में सुनते थे अपने दिल के फ्साने उनही नजरोँ में हैं हम अब रकीबों से दीवाने …… यूई
जिन नजरों में सुनते थे अपने दिल के फ्साने उनही नजरोँ में हैं हम अब रकीबों से दीवाने …… यूई
हमारा एक ऐसा वक्त गुज़रा है अपना था पर वोह अब गुज़रा है तेरी नजरों में ही बसा करते थे हाल-ए-दिल अपना पड़ा करते थे …… यूई
सब कहते हैं तू दिल का हाल लिखता है तेरे शब्दों का यह जाल खूब बिकता है जो चाह कर भी कभी तू लिख ना पाएगा मेरे दिल को तेरा वौह कलाम दिखता है …… […]
ज़िकर तेरे ने फिर छेड़ दिए वौह दिल के तार जो कब्के भुला दिए थे हमने पिछली बहांर …… यूई
महफिल में लेते ही नाम तेरा जी उठे फिर वह तमाम चेहरे जो जाने की तैयारी में थे परसो वही जम गए वौह फिर बरसो …… यूई
बात निकली तेरी तो रात गई जाने कब वौह बरसात गई …… यूई
ज़िकर जिस महफिल में ना हो तेरा उस महफिल में नही रमता दिल मेरा …… यूई
ज़िकर जब भी तेरा कही उठता है जाने दिल मेरा क्यों खिल उठता है …… यूई
आँखों से जो यह अश्क निकले हैं यही तो मेरी रूह के चिथड़े हैं …… यूई
दर्द तेरे दिल को जो जकड़े हैं मेरी रूह को वोही तो पकड़े हैं …… यूई
दुआ में कभी हाथ उठा ना पाए तुम दवा मेरे गम की क्या तुम कर पाओगे …… यूई
मेरे दर्द-ए-गम की दवा तेरे पास नही तेरे मर्ज-ए-इश्क की दवा मेरे पास नही …… यूई
मेरे अश्कों के दर्द क्या तुम सुल्झओगे इनकी आग में ख़ुद ही भस्म हो जाओगे …… यूई
दर्द ख़ुद के ही अश्कों का समझ ना पाया ज़िन्दगी का यह खेल मुझ को ना भाया …… यूई
अश्कों में छुपी एक जान होती है इनकी ज़िन्दगी शानदार होती है रंग दिखने को बस बेरंग रखा है हर रंग इन्होंने ख़ुद में समा रखा है बेश्मकीमतें नगीने यह अरमानो के बहाना ना इनको […]
सोचा था पी के भूला देंगे तेरे गम ना जाने फिर क्यों आँखें रह गई नम ….. यूई
पैमाना कितना भी सम्भालो छलक जाता है दर्द-ए-दिल जितना भी छुपा लो झलक जाता है …… यूई
सालों पहले जो तोड़ दिया था दिल जो आपने भरी दोपहर में आज तलक ना संभाल पाए उसे हम ज़िन्दगी की सहर में …… यूई
ज़िकर जब भी उठता है तेरा शहर में दिल डूब सा जाता है किसी लहर में …… यूई
ज़िन्दगी की राहें अब आसान हुई मौत के इंतज़ार में ही शाम हुई …… यूई
आने का वादा तेरा मुझसे टूट गया तेरा इंतज़ार अब मुझसे ही रूठ गया अच्छा हुआ यह खेल अपना छूट गया तेरे सर के सारे इल्ज़ाम मै लूट गया ….. यूई
Ummidein kuchh bayaa kar rahi hai Kashishe abb jawaa ho rahi hai Ho rahaa hai intezaar ka lmha deewana Nigaahe jaane kya nihaar rahi hai Jhanak-jhanak si aahate pajeb ki Purwaayee mehandi ki Sugandh bahaa […]
Koi ” aabhaas” mujhko chhuaa hai Lgtaa hai aapka aanaa hua hai Khwabo ki dhundhlaahat kamm hui Haqeeqat abb fasaanaa hua hai Sisakti tannhai bhi hass parri hai Nazaro mei aks ka uterna hua hai […]
सुकूं का बदन आज खस्ता बहुत है ! लुटेरों का दुनिया में दस्ता बहुत है !! है सब कुछ यहॉ पर अभावों का ताना ! मिले कुछ नही पर व्यवस्था बहुत है !!
———————————————————- aii kash— ki, sabhi bachche hote sang hote aur sachche hote kyu badh gye— jawaan ho gye khudd se hi anjaan ho gye kya rang the bachpan ke haatho mei haath– kandhe pe haath […]
मुझको हरवक्त़ तेरी प्यास रहती है! तेरी आरजू धड़कनों में बहती है! मेरी मंजिल बन गयी है याद तेरी, हर अश्क में तस्वीर तेरी रहती है! Written by #महादेव
अन्धेरे मुझे अब रास आ गए है तन्हाईया मुझे अब अपना गई है डर जितने भी थे अपनी बर्बादी के संग उनके अब मुझको भा गए है …… यूई
छोड़ा है जिनको तुमने अकेले मिलेंगे फिर तुझको वोह इस मेले …… यूई
गिर जाऊँ जो मैं तेरी नजर से कर देना दफन मुझे सत्व में हूँ मैं जब तक तेरे हुक्म में जिंदा हू तब तक स्थल में …… यूई
उठना गिरना यूँ है उसके हाथ कब्र ख़ुद की खोद के गिरना यह कहाँ की लियाकत है …… यूई
उठ कर गिरना इंसानो की फितरत है गिर कर उठना दीवानों की हसरत है …… यूई
तेरी सारी सोच मन्सूबे तदबीरें इनमें कुछ भी कम ना आएगा वक्त जब अपना फ़ैसला सुनाएगा तब तेरा कुछ भी बच ना पाएगा …… यूई
गिर गया है गर समाज तो इसे खोना ही चाहिए वक्त की गहरी क़ब्रों में अब इसे सोना ही चाहिए …… यूई
अच्छा बुरा सब एक वक्त के है दो पहलू जिन शमशीरों ने सामाजो को बचाया है उन्ही ने लाखों का खून भी बहाया है …… यूई
कौन अच्छा है कौन बुरा कौन किसका यहां फ़ैसला करे पल पल बदलते रंगों में कौन सफेद स्याह का रंग चुने …… यूई
यही प्रथा है इस ग्रह की जीवन यहां पे सबको है ज़िन्दगी की कवायत यहां की जिंदा है रिवायत वहां की …… यूई
उस बाज़ी में कभी ना थी तूने मानी इस बाज़ी में अब किसी ने ना तेरी मानी …… यूई
जब था वक्त तब किसी की ना मानी जब ना अब वक्त तब ना किसी की मानी …… यूई
Lakhon dilo par dastak di , kuch lamho baad sabhi ke dil ne kia mana aakhir main; mujhe mere hi dil ne di “panhaa” !
गम सारे जमाने के मिटाने की क्या तुमने अकेले कसम खाई है ……यूई
बस करो रुक जाओ ख़ुद के लिए प्यास अपनी को बड़ा लो मेरे लिए ……यूई
तेरे दिल के रंग सुनसान से पाए तेरी आँखों में ख्वाब वीरान से पाए तेरे मन की उमंगें निर्जन सी पाई तेरी राहे ख़ुद से अनजान सी पाई तेरे मन की बातें बेजान सी पाई […]
समुंदर में रह कर भी तूं प्यासा क्यों है अरमानो भरा प्यार पाकर उदासा क्यों है उदासी अपनी की वज़ह तो बता इक बार तमाम खुशियाँ जीवन की दूँ तुझ पे वार ……यूई
क्या हुआ आज एक हाथ ही तो छूटा है वक्त-बेवक्त कईयों को तूने भी लूटा है लूटते हुए जो खुशियाँ खिलीं थी सीने में वोही तो लौटी हैं आज बन खंजर सीने में ……यूई
उम्मीद टूटी तो रोता क्यों है ख़ुद पे भरोसा खोता क्यों है ……यूई
दिल से गर तूं साँचा है यार के दिल का कांचा है ……यूई
वफ़ा कहने को बस एक लफ्ज निभाना इसको है सबसे सहज़ अडिग है गर तेरा खरा ईमान ता-उमर पयेगा साथ निष्ठावान ……यूई
इल्ज़ाम-ए-बेवफाई सच तो नही झूठे तेवर आपको जच्ते नही आईने आपके घर में टूट गए या आपने सँँवरना छोड दिया ……यूई
क्या फिज़ा यहाँ की बदरंग हुई यहाँ सोच ही सब की तंग हुई ……यूई
बिकती नही वफाएँ बाज़ारों में दिखती भी नही यह हजारों में ……यूई
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