[बुरा न मानो होली है ….. शुभकामनाओं सहित ] आया जोबना पे कैसा उभार दैया । गोरी कैसे सम्हालेगी भा…र दैया ।। पूनम के चांद–सा रूप खिला रे ! क़दरदान कोई न यार मिला रे […]

में हु थोड़ा उनमे थोड़े मुझमें छूटे न छूटे ऐसा रिश्ता बन जाये उनसे , दुनिया छोड़ जाये पर वो न दूर जाये मुझसे , कहे दू उनसे वो क्या है मेरा लिए , या बन […]

कविता … “मैं बच्चा बन जाता हूँ” न बली किसी की चढ़ाता हूँ। न कुर्बानी से हाथ रंगाता हूँ।  रोने की जब दौड़ लगती है, मैं गिद्धों पर आंसू बहाता हूँ। न मैं मंदिर में […]

तुझे पाने वाला ख़ुद का नसीब कहता है लुटने वाला ख़ुद को बद‍नसीब कहता है हैं दोनों ही तेरी राह् के भटके मुसाफिर तूँ तो दोनों को ख़ुद की औलाद कहता है …… यूई

ता-उमर लगायी दौलत कमाने मैं तूने जो कमाया अब वोही तो तेरा है बंदिया बेवफ़ाई पे मेरी क्यों तूँ इतना बिखर गया वफ़ा तूने क्मायी ही कहा, जो ढूँढे बंदिया हाँ दौलत से मिलती नही […]

मालूम हैं मुझे के में ना खरा उतरा तेरी आस्मानी उम्मीदो के पैमानों पर हाँ मैँ ही तुझे यह समझा ना पाया इंसानो को नही तौलते खुदा के पैमानों पर …… यूई

जिस चोले को पहन भगत सिंह खेले, अपनी जान पे जिसे पहन कर राज गुरु मिट गए, अपनी आन पे आज उसी को पहन के देश का बच्चा, बच्चा का बोला मेरा रंग दे बसंती […]

सभी मित्रोजनो को होली की अग्रिम शुभकामनाये। आप सबों को होली पर एक भेट! ****** प्रेम-रस का रंग बरसाने निकली भर के झोली में ! क्युँ मैं सखियों से बिछङी क्या आया रास अकेली में […]

    सोमवार, 17 अगस्त 2015 कविता …..खो ग ई मिट्टी की लाली………   खो गई है मिट्टी की लाली। मुरझा गई है धान की बाली॥ सुख गई है बरगद की डाली उजड़ी बगिया रोता […]

……कविता……. अपने काम, आप करो, मजदूरों को माफ़ करो। रहना है, अगर ठाठ से;  तो साफ-सुथरा इंसाफ करो। हमको तुम, माफ़ करो, अपना, मन साफ़ करो। अपनाना है, अगर हमें;  तो पहले सीधे मुँह बात […]

कविता … “ प्रेम ही बांटो हरदम, आप अपने सूझ-बुझ से” छप्पर उड़ गई है, मिट्टी की दीवारों से।        तूफाँ भी मांग रही है मदद, कामगारों से।।                    कट्टरता की बू […]

सिर पे जूता, पेट पे लात। दिल खट्टा और मीठी बात॥ नियम, कानून अमीरों का, अपने तो बस खाली हाथ॥ पूछ परख लो भूखों से क्या है तुम्हारी जात? पेट भरो बातों से, गोदाम तले […]