आज शर्मसार हो रही यह पावन धरती,
नीलाम हो रही मां बहनों की इज्जत,
भटकते इन भूखे भेड़ियों से,
है निवेदन सभी माताओं से,
संस्कार दे बच्चों को ऐसी,
जो दूषित न करे समाज को,
वो भविप्य अपना उज्जवल करें,
साथ ही दूसरों का भी साथ दे,
करनी होगीं प्रतिज्ञा कडी,
कोई भी न बने संस्कारविहीन,
तभी निखरेगा भारत महान |
Sarmsar ho rahi aye pavan dhartiti
Comments
12 responses to “Sarmsar ho rahi aye pavan dhartiti”
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उत्तम
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Thanks
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Good
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Thanks
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Welcome
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सुन्दर
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Thanks
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Nice
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Thanks
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Good
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सुन्दर रचना
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Best
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