8 Comments

  1. कवि गीता जी की बेहतरीन हास्य रचना, कितनी बेहतरी से पुरानी कहानी में नया साम्य प्रस्तुत कर हास्य रचना की सृष्टि की है। जो वाली दोस्ती की बात उजागर की है वो दोस्ती होती ही गजब की पक्की है। बहुत खूब, कथ्य संप्रेषणीय है। हास्य अति सुंदर है

    1. कविता की इतनी सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी ।दोस्ती तो दोस्ती ही होती है सर ,पक्की ही होती है । बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

Leave a Reply