बा मुश्किल छोड़ जाती थी वो माँ मुझे जिस मकान में, आज सूना है घर का हर एक कोना उस मकान में, सुनाती थी दिन रात माँ जहाँ साफ़ सफाई के पीछे, आज लगे हैं […]
बा मुश्किल छोड़ जाती थी वो माँ मुझे जिस मकान में, आज सूना है घर का हर एक कोना उस मकान में, सुनाती थी दिन रात माँ जहाँ साफ़ सफाई के पीछे, आज लगे हैं […]
धुएं से भरे चूल्हे में माँ का वो रोटी बनाना, यूँही नहीं है माता का मेरी ममता लुटाना, आँखों से बहाती है आंसू फिर हांथो से अपने खिलाती है, आसान नहीं है मेरी माता का […]
अब किताबें सीने पर लेटकर सोती नहीं हैं, उंगलियां मोबाइल से एक पल को जुदा अब होती नही हैं, लगाते थे लोग महफिलें कभी खामोशियां मिटाने को, आज महफ़िलें भी सूनी सूनी होने लगी हैं॥ […]
Shakun Saxena उछाल उछाल कर पापा मुझे दिल्ली दिखाते थे, हंस हंस कर पापा को मैं खूब रिझाती थी, भरोसे का अटूट रिश्ता था हमारा, छूट कर हाथो से मैं फिर हाथो में आ जाती […]
अपनी सोंच के समन्दर से ज़रा, बाहर निकल कर तो देख, उसको पाना है तो ज़रा प्रह्लाद बन कर तू देख। अपनी किस्मत के भरोसे न बैठ, कदम बढ़ा कर तो देख। मन्ज़िल है पानी […]
कदम कदम बढ़ा रहे हैं, अपनी छाती अड़ा रहे हैं, कश्मीर की धरती पर वो सैनिक अपनी, माँ का गौरव बढ़ा रहे हैं, तोड़ रहे है दुश्मन पल पल, सरहद की दीवारे हैं, वीर हमारे […]
चलो मिलकर एक नया मुल्क बनाते हैं, जहाँ सरहद की हर दिवार मिटाते हैं, छोड़ कर मन्दिर मस्ज़िद के झगड़े, हरा और भगवा रंग मिलाते हैं, चलो मिलकर एक….. जिस तरह मिल जाते हैं परिंदे […]
धरती माँ फिर त्रस्त हुई हैं आतंकी गद्दारों से, खेल लाल रंग की होली अब, धरती माँ को मुक्त करो, बढ़ो वीर तुम खूब लड़ो अब, इन दुश्मन मक्कारों से, धरती माँ फिर त्रस्त हुई […]
रिमझिम रिमझिम वर्षा से, जब तन मन भीगा जाता है, राग अलग सा आता है मन में, और गीत नया बन जाता है I कोशिश करता है कोई शब्दों कि, कोई मन ही मन गुनगुनाता […]
soch liya tha humne ab haar Gaye hai hum, kyunki Kisi ne na kbhi humari khwaaishon ko pyaar bharaa ik andaaz Diya… lekin yahan ki duniya ko jaana, Tb pta chla… Saavan ne poetry ko […]
Silence is great metaphor for death No word, no whisper, No beats, no air. All is same. Loneliness is great metaphor for silence. I’m alone. I died.
चली आतीं है अक्सर यादें तुम्हारी मगर तुम नहीं आते की कोशिश कई दफ़ा भूल जाने की तुम्हे मगर भूल नहीं पाते आयीं राते पूनम की कई बार मगर न हुआ चांद का दीदार […]
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