शायरी

उम्मीद के दिये जलाने छोड़ दिया

टूट लिए सपने जितने थे टूटने अब ना फिर कभी भी यह टूटेंगे अरमानो को हमने गहरे दफन किया उम्मीद के दिये जलाने छोड़ दिया …… यूई »

विश्वास है हिल जाता

है मुश्किल तो ख़ुद का साथ निभा यह दुनिया तेरा साथ क्या निभाएगी मुश्किलो में इसका विश्वास है हिल जाता खुदा पे भरोसा इसका इक पल में टूट जाता …… यूई »

माफ कर देता

माफ कर देता तेरी तुम्हारी बेवफाईओ को पर मुझे तुम्हारी कोई भी ख़ता याद नही …… यूई »

ए लहरॊं की रागिनी

ए लहरॊं की रागिनी राग का यह राज तो बता सुर तेरे से मचलती है लहरे या उनकी मस्ती से महकते सुर तेरे …… यूई »

नजर इश्क प्यार इक़रार तकरार

लगता सबको है यह पहली बार कि है यह बस मेरे वाला प्यार नही जानते हो तुम हो नादान है सदियों पुरानी यह रिवायते नजर इश्क प्यार इक़रार तकरार यही होता आया है यहां बार बार …… यूई »

रंग अपनी मेहँदी मेरे रकीबों के नाम

रंग अपनी मेहँदी मेरे रकीबों के नाम कौनसी तूने यह नई कहानी लिख दी निभायी जिसने भी यहां रस्म-ए-वफ़ा उसने अपनी बर्बादी-ए-जिंदगी लिख ली …… यूई »

मैंने रात की दिन से ज़ुदाई लिख दी

हो ज़िन्दगी की बेवफाईयों से खफा मैंने रात की दिन से ज़ुदाई लिख दी बचाने को तेरी रुसवाईया जमाने में ख़ुद की बदनाम कहानी लिख दी …… यूई »

पलकें मेरी बंद हुई उनकी पलकों तले

ज़िन्दगी को कर के ज़ुदा ज़िन्दगी से ज़िन्दगी को मिला दिया ज़िन्दगी में कोई ऐसी मौत का शिकवा क्यों करे पलकें मेरी बंद हुई उनकी पलकों तले …… यूई »

खूब बेरहम इश्क है यह दर्द का

खूब बेरहम इश्क है यह दर्द का खुदा दुश्मनों को भी इससे बचाए …… यूई »

कही दर्द को ना हो जाए इश्क आपसे

आपको हुआ है इश्क दर्द से तो कोई बात नही बचना कही दर्द को ना हो जाए इश्क आपसे …… यूई »

रोज़ जीना चाहके भी

रोज़ मार के भी ख़ुद को मर सके रोज़ जीना चाहके भी जी ना सके मरते हुए मरने का करते रहे इंतज़ार जीते हुए करते रहे जीने का इंतज़ार …… यूई   »

मौत ने किया है कुछ इस तरह

मौत ने किया है कुछ इस तरह मेरा इंतज़ार जैसे ज़िन्दगी ख़ुद करे जिंदा रहने का इंतज़ार …… यूई »

ख़ुद की छोड़ लग गई सबकी सुध

कहने को तो हुए हम घर से बेघर इश्क तेरे ने किया ख़ुद से बेखुद ज़िन्दगी कुछ यूँ गुज़री फिर बेसुध ख़ुद की छोड़ लग गई सबकी सुध …… यूई »

सुनाया फ़ैसला

मेरे ही गुनाहों ने हो परेशान मुझसे सुनाया फ़ैसला खुद्की मौत का मुझसे …… यूई »

तुम्हे इश्क कहूँ या अब कहूँ खुदा

तुम्हे इश्क कहूँ या अब कहूँ खुदा अब तो फर्क कोई ना पड़ता है उसके रंगों में रंगा हर काम तेरा तेरे रंगों में रंगा अब हर रंग मेरा …… यूई »

जिसने ख़ुद में खुदी दिखला खुद की

रंग रूह को इश्क के पक्के रंगों को तूने वोह रंग प्यार का दिखलाया है जिसने ख़ुद में खुदी दिखला खुद की इन सब झूठे रंगों से पीछा छुड़ाया है …… यूई »

इज़हांर-ए-इश्क

नज़र-ए-हुस्न ने किया इज़हांर-ए-इश्क जबसे अरमानो को जैसे मेरे लग गए हो पंख तबसे   …… यूई »

बना इश्क उतारा रूह में

जाम से मिलते ही मचलती शराब जैसे मयकदे में झूमते हो बेखुद मयकश जैसे कुछ यूँ ही बेखबर सा हो गया हूँ जगसे बना इश्क उतारा रूह में तूने अपनी जबसे                                             …… यूई »

क्या हुआ जो तेरी नजर नही हमपे

लौटा दो सदाए लाखों बार हमारी ज़िन्दगी का सौदा करके आए हैं क्या हुआ जो तेरी नजर नही हमपे तेरे इश्क में लूटाने हम जान आयें हैं …… यूई »

बीत चुके हैं बरसों जिनको

बीत चुके हैं बरसों जिनको क्यों पल वोह याद दिलाते हो किए गहरे दफन जो जग जग रातों क्यों उनकी अब कब्रे खुदवाते हो                             …… यूई »

गुफ्तगू #2Liner-100

ღღ__गुफ्तगू बेशक नहीं करते, निगाहें फिर भी रखते हैं; . ना जाने प्यार है कैसा, जो कभी बयाँ नहीं होता!!…..‪#‎अक्स‬ »

ज़िन्दगी ना कर पाई फ़ैसला

ज़िन्दगी ना कर पाई फ़ैसला मैँ शराब का नशा छोड़ दूँ या तेरी जुस्तजू की उम्मीद एक ने मुझे जीने ना दिया दूसरे ने मुझे पीने ना दिया                       …… यूई »

बेशकीमती है यह गहने

बैठा हूँ बीच बाज़ार, लेकर अपनी यादों को बेशकीमती है यह गहने, इनका कोई मोल नही आए वोह ले जाएँ मुझसे, बेमौल मेरी जागीरें को वोह जो हो तपा वर्षो, मेरे जैसे दर्दो की अगन में वोह जो हो ख़ुद में घुटा, ख़ुद के ही अंधेरों में                                             …… यूई »

जाने कितने दर्द समेटे होंगे उसने

जाने कितने दर्द समेटे होंगे उसने जो यादों को अपनी बाज़ार ले गया                                   …… यूई »

कैसे कोई मुझको कवी बुलाता

कोई मुझे यहां कवी बुलाता   कोई बोले शब्दों का खिलाड़ी कोई समझे बुनता मैँ लड़ियाँ कोई समझे चुनता मैँ कलियां ना मैँ कवी ना कोई खिलाड़ी मैँ तो बस एहसास का पुजारी उतार अंतर उसके भाव को पूरा लपेटता सही शब्दों में उसको छंदों की लड़ियों में जड़ उसको सच के गहनो से सजाता उसको कोई कहता मेरी कविता सुंदर मन कहता मैँ हूँ आभारी तुम्हारा तुमने इस कविता के कहीं अन्दर छुपे उस भाव को मुझसा समझा गर कोई भाव को समझ ना पात... »

सूर्य मैं सूर्य

हूँ लाखो वर्षो सी यूँ ही जल रहा मैं हूँ ख़ुद में आग लगा कर जल रहा मैं जला ख़ुद को कर रहा रोशन तुमको मैं किसी को लगता निकला अभी यहां मैं किसी को लगता छुपा अभी वहां पे मैं मेरा ख़ुद का ना कभी छुपना ना निकलना मेरा वजूद है बस जलना तपना चलना मैं अघोर तपस्वी ना कभी जिसे विश्राम भखना ही मेरी तपस्या जलना मेरा मान कबसे हूँ ना जाने मैं इस तपस्या में मगन यूँही रहूँगा जलता जब तक ना होयूँ भस्म कर्म है मेरा, ख़... »

गौर से देखो तो

वक़त की कमी नही है यहां, यूँ ही गर देखो तो गया वक़त ना लौट कर आए, गौर से देखो तो                                     …… यूई »

है नहीं किसी को थमने की यहां पर थाह

सिर्फ दिखने को लगता है सबको आराम है नहीं किसी को यहां कभी भी आराम हर पल है हर शय उसकी गतिशील यहां है नहीं किसी को थमने की यहां पर थाह                                   …… यूई »

है यह बदनामी नाम से भी खूब

प्यार लुटाया दिल खोल खूब तब जा कमाया यह नाम खूब माना के हुए बदनाम हम खूब है यह बदनामी नाम से भी खूब पिघलाया इसने तेरे दिल को खूब बाँहो में समेटा मुझको तुमने खूब दिल तेरे पे राज़ कर पाए हम खूब                             …… यूई »

कोशिश तो की होती पास आने की

कहते हो राज़ छुपे है हजारों मुझमें देखा है अपना अक्स कभी मुझमें कोशिश तो की होती पास आने की ख़ुद खुल जाते राज़ तुम्हारे दिल के                                     …… यूई »

कहते थे क़रीब मेरे दिल के रहना

कहते थे मेरी आँखों में ही रहना कभी फ़ासले दूर कर जाएँ तो क्या कहते थे क़रीब मेरे दिल के रहना जिस्म ना मिल भी पाए तो क्या कहते थे मुझे मन से ना भुलाना आवाज़ ना भी लगा पाए तो क्या कहते थे यादों में मुझे ज़िन्दा रखना कभी ज़िन्दगी धोखा दे जाए तो क्या साथ थे जब तक कुछ ना था भुलाना तुम ही दे गए धोखा तो क्या भुलाना                         …… यूई »

कहाँ रहते हो #2Liner-96

ღღ__कहाँ रहते हो तुम भी, आज-कल “साहब”; . बात-बिन-बात, दिल दुखाने नहीं आते!!….‪#‎अक्स »

हमारी यादो को दफनाने

हमें दफनाने की आपकी कोशिश शायद हो पूरी हमारी यादो को दफनाने की कोशिश ना होगी पूरी ……यूई »

वादा है मोहब्बत का

मार कर हमें तुम, अपने दिलो की तहों में जो दफ्नाओगे वादा है मोहब्बत का, हम जिंदा उन तहों से लौट आएंगे ……यूई »

दिल को अपने बेवजह तुम तड़पाओगे

चाह कर तो ना हम तुम्हे स्तायेंगे चाह कर तुम हमें भूला ना पाओगे ज़ोर जितना हमें भुलाने पे लगाओगे दिल को अपने बेवजह तुम तड़पाओगे   ……यूई »

जो मर मर के जिया

जो मर मर के जिया, वोह ख़ुद का ना मीत जो ना हुआ ख़ुद का मीत, वोह कैसा तेरा मीत ……यूई »

मृत्यु से अभय

हर पल मृत्यु से अभय, शौर्य की पहचान हर पल मृत्यु सो जो डरा, वो जिंदा मरा ……यूई »

गहने है यह सब अनमोल

सिसकियां साँसें दिल चाहतें इंतज़ार बेकरारीयाँ मुस्कराहटें गहने है यह सब अनमोल मिल जाए कभी भी कही भी संभाल लीजियेगा, ख़ोयिएगा नही हां इकठे कभी नही मिलेंगे पर यह वादा है मेरा मिलेंगे ज़रूर जब भी मिले, कैसे भी मिलें संभाल लीजियेगा, ख़ोयिएगा नही   ……यूई »

निशनियाँ है प्यार की

फूलों का खिलना भँवरो का नाचना तितलियों का मचलना बरसात की रिमझिम हवाओं की अठखेलियाँ तारों का टिमटिमाना नदियों का मचलना निशनियाँ है प्यार की ……यूई »

क्या सच में ही चाहते हो

अरे क्या कह्ते हो कि मेरे होश ठिकाने आए क्या सच में ही चाहते हो कि मेरे होश ठिकाने आए सोचा है गर कभी जो मेरे होश ठिकाने आए आपके होश ना फिर कभी ठिकाने आए                               …… यूई »

कह्ते इसे पशु प्रवृति

ख़ुद का चरना, कह्ते इसे पशु प्रवृति जो ख़ुद का चरते, वोही तो पशु कहलाते कुछ ग़लत कहा क्या? क्या सोचा ना था? यूई अब भी सोचो? क्या बिगड़ा अभी है? कह्ते तो है ना सब,जब जागो तभी स्वेरा                                   …… यूई »

“फुरसत” #2Liner-97

ღღ__कई बार खुद को, यूँ भी बहलाया है हमने “साहब”; . कि वो आते तो ज़रूर, मगर फुरसत ही कहाँ होगी!!…..‪#‎अक्स‬ »

है यह कैसी और किसकी तलाश

जिसने समझा आपको अपना उसको ना समझा आपने अपना जिसको समझा आपने अपना उसने ना समझा आपको अपना है यह कैसी और किसकी तलाश होगी कैसे खत्म यह सबकी तलाश                               …… यूई »

मिटा कर मुझको मिटेंगी बेचैनीयाँ

खयाल उनका आए तो बेचैनीयाँ ना आयें जो खयाल तो बेचैनीयाँ या रब यह कैसा मर्ज दिया तूने मिटा कर मुझको मिटेंगी बेचैनीयाँ                              …… यूई »

चाहते हो दिल को राहत मिलें

लुटाने किसी पे दिल को हो निकले और चाहते हो दिल को राहत मिलें                               …… यूई »

यह सब कहां है आशिकों के निशान

राहतें सकून आराम चैन इत्मिनान यह सब कहां है आशिकों के निशान बेचैनीयाँ घबराहटें उन्नीदे उम्मीदे यह सब हैं उनके गहने और पहचान                                          …… यूई »

ज़िन्दा है दिल तो उसे धड़कने दो

ज़िन्दा है दिल तो उसे धड़कने दो याद में उसे किसी की तड़पने दो चाहतों को जी भर कर मचलने दो अरमान हजारों उसमें पनपने दो                                       …… यूई »

मिलिएगा ज़रूर कभी हमारे दिल से

मिलें होंगे आप हज़ूर हजारों दिल से मिलिएगा ज़रूर कभी हमारे दिल से होंगी सभी शिकायतें जो उन सब से मिट जाएगी एक पल में मिल हमसें                                        …… यूई »

जो है ही बेवफा वोह कभी किसी का नही होता

अपना कह देने से कभी कोई अपना नही होता अपना आप लुटा देने से कोई अपना नही होता सालों तमाम वफ़ाए उनपे ऊपर वार कर देखी जो है ही बेवफा वोह कभी किसी का नही होता                                              …… यूई »

आपने अपनी दिल्लगी निभा ली

अपना कह के आपने अपनी दिल्लगी निभा ली आपकी दिल्लगी पे हमने तो पूरी ज़िंदगी बिता दी                                                  …… यूई »

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