shayari

“बुरा लगता है”

ღღ__तेरे लब पे सिवा मेरे, कोई नाम आये तो बुरा लगता है; इक वही मौसम, जब हर शाम, आये तो बुरा लगता है! . जागते रहने की तो हमको, आदत हो गयी मोहब्बत में; नींद अब किसी रोज़, सरे-शाम आये तो बुरा लगता है! . गर इन तन्हाईयों में गुमनाम ही, मर जाऊं तो बेहतर है; अब किसी महफ़िल में, मेरा नाम आये तो बुरा लगता है! . ज़र्द पड़ चुके हैं सारे, वो टूटते पत्ते, बेजुबाँ मोहब्बत के; अब इश्क़ के नाम से, कोई पयाम आये तो बुरा ... »

“रंग” #2Liner

ღღ__कुछ एक बे-रंग क़तरों में, बह गया ज़िन्दगी का हर एक रंग; . सबक क्या-क्या नहीं सीखे, “अक्स” हमने आंसुओं की जानिब से!!…‪#‎अक्स‬ . »

“याद”#2Liner…..

ღღ__ना जाने आज इतना, क्यूँ याद आ रहे हो “साहब”; . तुझे भूलने की कोशिश, तो हमने की ही नहीं कभी!!….‪#‎अक्स . »

“कोई राब्ता तो हो!!.”

ღღ__ठहरा हुआ हूँ कब से, मैं तेरे इन्तज़ार में; आख़िर सफ़र की मेरे, कोई इब्तिदा तो हो! . मंजिल पे मेरी नज़र है, अरसे से टिकी हुई; पहुँचूं मैं कैसे उस तक, कोई रास्ता तो हो! . किस तरह छुपाऊँ, जो ज़ाहिर हो चुका उसपे; मैं कहना चाहता भी हूँ, पर कोई वास्ता तो हो! . वो कहता है ढूँढ लेंगे; तुझे दुनिया की भीड़ से; मगर उससे पहले मेरे यार, तू लापता तो हो!! . फिक्र तो बहुत होती है, “अक्स” उसको तेरी; हाल ... »

“डर लगता है!!”

“डर लगता है!!”

ღღ__जब दर्द भी दर्द ना दे पाए, तो डर लगता है; आशिक़ी हद से गुज़र जाये, तो डर लगता है!! . डर लगता है अक्सर, किसी के पास आने से; पास आके वो गुज़र जाये, तो डर लगता है!! . कुछ ख्वाहिशें बेशक़, मर जाएँ तो ही बेहतर है; कुछ ज़रूरतें यूँ ही, मर जाएँ तो डर लगता है!! . इक बार कहा था उसने, आशिक़ी बे-मतलब है; ये मतलब गर समझ आ जाये, तो डर लगता है!! . कोई ऐसा भी घाव होगा, जिससे मरने में हो मज़ा; जो वही घाव भर जाए R... »

“इलाज” #2Liner-111

ღღ__कुछ इस तरह भी करता है “साहब”, वो मेरे दर्द का इलाज; . कि पहले घाव देता है, फिर अपने आंसुओं से धोता है!!…..‪#‎अक्स‬ »

“चाँद” #2Liner-110

ღღ__कल शब मिला था इक चाँद, हाँ “साहब” चाँद ही रहा होगा; . मिले भी तो दूर से, प्यार पर गुरूर से, और दोनों ही मजबूर से!!….‪#‎अक्स »

“ना-समझ ख्वाब” #2Liner-109

ღღ__ब-मुश्किल थपकियाँ देकर सुलाती है, नींद मुझको “साहब”; पर कुछ ना-समझ ख्वाब हैं उनके, जो बे-वक़्त जगा देते हैं!!…‪#‎अक्स‬ »

“मजबूरी” #2Liner-108

ღღ__मजबूरी में सुनने पड़ते हैं “साहब”, लोगों के ताने अक्सर; . कोई भी शख्स इस जहाँ में, शौक़ से रुसवा नहीं होता!!…‪#‎अक्स »

“गुफ्तगू” #2Liner-108

ღღ__दुश्वारियाँ लाख सही लेकिन, गुफ्तगू करते रहो “साहब”; . मुसलसल चुप रहने से भी कोई, मसला हल नहीं होता!!…..‪#‎अक्स‬ »

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