“ऑंखें ” #2Liner-7

ღღ___मेरी आँखों में जो क़ैद है “साहब”, वो समुन्दर ही है शायद;
.
कि सूखता भी नहीं, बहता भी नहीं, बस भरा ही रहता है !!…….‪#‎अक्स‬

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Responses

  1. Aur wo 2 boondein jab kabhi tapak jati hain..
    Isi sagar mein badalon ki parchai nazar aati hai,

    Rang badalti, lalima odti hui ye aankhein..
    Ek baar fir se surya uday ke liye machal jati hain 🙂

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