कायनात

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निकल कर घोंसले से आ मुलाकात कर ले,
मिलने की कहीं से तो आ शुरूवात कर ले।

ढूंढते – ढूंढते थक हार कर बैठ गए हैं परिंदे,
मुझे लगा गले और सुबह से आ रात कर ले।

अब लगाऊँ मैं तेरे हौंसले का अंदाज़ा कैसे,
हो सके तो थोड़ी सी मुझसे आ बात कर ले।

सुबह का भूला हूँ शाम को लौट तो आया हूँ,
कर माफ़ और पहले जैसी कायनात कर ले।।

राही अंजाना

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18 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 17, 2019, 6:07 pm

    बढ़िया एवं प्रशंसनीय

  2. NIMISHA SINGHAL - November 17, 2019, 6:59 pm

    Nice

  3. Poonam singh - November 17, 2019, 7:14 pm

    Sundar

  4. राही अंजाना - November 17, 2019, 8:18 pm

    Thanks

  5. nitu kandera - November 17, 2019, 10:08 pm

    Wah

  6. NIMISHA SINGHAL - November 18, 2019, 1:13 am

    Wah

  7. देवेश साखरे 'देव' - November 18, 2019, 11:45 am

    वाह

  8. Neha - November 18, 2019, 8:12 pm

    Waah

  9. Abhishek kumar - November 24, 2019, 9:00 am

    Good

  10. Neha - November 24, 2019, 7:53 pm

    Waah

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