क्या होगा. . . . . .❤

क्या होगा. . . . . .❤

कभी सोचा है, कि जब तुझको, मेरी याद आई तो क्या होगा;

ना हम होंगे, ना तुम होगे, और ना तन्हाई तो क्या होगा !

 

कि आकर लफ्ज़ होठों तक, पलट जायेंगे मुमकिन है;

किसी से कह दिया, और हो गयी, रुस्वाई तो क्या होगा!

 

करोगे जज़्ब कैसे तुम, जो कहना ना हुआ मुमकिन;

ख़ुशी की महफ़िलों में आँख, भर आई तो क्या होगा!

 

ये माना जीतने का हुनर है, तुम्हारे पास मोहब्बत में;

पर सोंचते हैं, गर किसी से, शिकश्त पायी तो क्या होगा!

 

रखो बेशक हमारी खामियों का, गुनाहों-सा तुम हिसाब;

कभी सोंचा है, जब तुम्हारी, ज़फाएँ सामने आयीं तो क्या होगा!!. . . . . #अक्स

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

A CA student by studies, A poet by passion, A teacher by hobby and a guide by nature. Simply I am, what I am !! :- "AkS"

Related Posts

आज कुछ लिखने को जी करता है

“ना पा सका “

“ना पा सका “

“मैं कौन हूँ”

“मैं कौन हूँ”

11 Comments

  1. Mohit Sharma - November 13, 2015, 5:06 am

    enjoyed reading your poem.. 🙂

  2. Vikas Bhanti - November 13, 2015, 11:04 am

    Pleasure to read such spontaneous creation …

  3. पंकजोम " प्रेम " - November 13, 2015, 12:01 pm

    जब निग़ाह , निग़ाह पर आकर ठहरेगी …..
    और स्वप्न में , तुम ही तुम दिए दिखाई , तो क्या होगा……..

  4. Kapil Singh - November 13, 2015, 4:30 pm

    nice

  5. Ajay Nawal - March 11, 2016, 8:00 pm

    nice bro 🙂

  6. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 12:48 pm

    Good

Leave a Reply