ग़ज़ल

ग़ज़ल
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दूरियां ,नज़दीकियां, खुशफहमियां तेरे साथ में,
हम मिले ना थे कभी पर बह गए जज्बात में।

1. मौसमै अंदाज था कुछ खास था उस रात में,
थे गिरफ्त में इश्क के उस बेवजह सी बात में।
थी नहीं मंजूर हद …इश्क की बरसात में,
दूरियां नजदीकियां खुशफहमियां तेरे साथ में……

2. जब्बे सैलाबे मोहब्बत ले रहा उफान था,
धड़कने बेकाबू थी दिल में अजब तूफ़ान था।
तेरी आहट देती थी बस.. दिल को थोड़ा सा सुकून,
बेजुबा सी थी मुहब्बत और मुझे तेरा सुरूर।
दूरियां नजदीकियां खुशफहमियां तेरे साथ में……

3. हो हकीकत तो निगाहों से बयां हो जाती वो,
सपना था बंद आंखों का बस याद बन आ जाता वो,
रात भर तारे चमकते चांद बन छा जाता वो,
जुगनू बन गुनगुन वो करता
अक्स सा छप जाता वो।

दूरियां नजदीकियां खुशफहमियां तेरे साथ में….

4. दरमियां था फासला इस छोर से उस छोर तक,
दिलकशी थी बस धुआं था , छा गया पुरजोर जो।
बेकरारी तुझ को पा लू
दूरियां अपनी जगह
धड़कने गाती थी सरगम, बेख्याली हर जगह।
दूरियां नज़दीकियां खुशफहमियां तेरे साथ में……

निमिषा सिंघल


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10 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - April 9, 2020, 7:01 am

    वाह

  2. Dhruv kumar - April 9, 2020, 10:01 am

    Nyc

  3. Priya Choudhary - April 9, 2020, 11:42 am

    Nice

  4. Pragya Shukla - April 9, 2020, 11:48 am

    सुन्दर रचना

  5. Abhishek kumar - May 10, 2020, 10:47 pm

    👌👌

  6. Satish Pandey - July 12, 2020, 2:42 pm

    सुन्दर रचना

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