दुआ इतनी है

दुआ इतनी है कि रोज इस तरह भी बेशुमार आएं।
दिन ढले तो बहार आए रात गुजरे तो बहार आए।

घटाएँ चिलमन हैं खुशियाँ हैं रोशनी की किरण,
घटाएँ ढलती रहें रोशनी के गुबार आएं।

हमारी बात और है कि रहते हैं हम अंधेरों में,
तुम उजाले हो क्यों न हमें तुम पर प्यार आए।

कुछ समझ नहीं आता क्या बात है चेहरे में,
देखें तो खुमार आए बिन देखे न करार आए।

आज का दिन हो उल्फत का तरन्नुम हो साज हो,
आज ही आज हो कल कभी कभार आए।

जिंदगी की जिंदादिली मैं तुमसे आज कहता हूँ,
अपनाते चले जाओ जिंदगी में निखार आए।

संजय नारायण


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7 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 15, 2020, 9:46 pm

    वाह

  2. Pragya Shukla - July 15, 2020, 11:33 pm

    Nice

  3. Abhishek kumar - July 15, 2020, 11:36 pm

    Nice

  4. Sanjay Narayan Nectar - July 16, 2020, 8:56 am

    आप सभी कविता प्रेमियों का ह्र्दयतल से आभार

  5. Rajiv Mahali - July 16, 2020, 7:17 pm

    सुन्दर

  6. Abhishek kumar - July 31, 2020, 12:53 am

    आपका भी आभार याद आया करिए और अपनी कविताओं से हमें आनंदित कीजिए

  7. Satish Pandey - August 17, 2020, 9:37 pm

    bahut khoob

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