पूस की रात

फिर आई वो पूस की काली रात।
मन है व्याकुल, उठा है झंझावात।।

पत्तों से ओस की बूँदें टपकना याद है मुझे।
आँखों से आँसूओं का बहना याद है मुझे।
सन्नाटे को चीरती, तेज धड़कनों की आवाज़,
ख़ामोश ज़ुबाँ, कुछ ना कहना याद है मुझे।
हमारे मोहब्बत के गवाह थे जो सारे,
नदारद हैं वो चाँद तारों की बारात।
फिर आई वो पूस की काली रात।
मन है व्याकुल, उठा है झंझावात।।

कोहरे से धुंधला हुआ वो मंज़र याद है मुझे।
चीरती सर्द हवाओं का ख़ंज़र याद है मुझे।
छुटता हाथों से तेरा हाथ, जुदा होने की बात,
प्यार का चमन, हो चला बंजर याद है मुझे।
तेरी जुदाई का गम रह-रह कर,
हृदय में टीस कर रही कोई बात।
फिर आई वो पूस की काली रात।
मन है व्याकुल, उठा है झंझावात।।

बगैर तुम्हारे रहने का गम रुला गई मुझे।
फिर गुज़रे लम्हों की याद दिला गई मुझे।
फिर से आई है, वही पूस की काली रात,
न जाने कहाँ हो तुम क्यों भूला गई मुझे।
यादों के समंदर में डूबता जा रहा,
मेरे काबू में नहीं हैं, मेरे जज़्बात।
फिर आई वो पूस की काली रात।
मन है व्याकुल, उठा है झंझावात।।

देवेश साखरे ‘देव’

झंझावात- तूफान


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

पुस की रात

पूस की रात को

पूस की रात।

पूस की रात

20 Comments

  1. Amod Kumar Ray - December 18, 2019, 5:46 pm

    सुन्दर रचना।

  2. PRAGYA SHUKLA - December 18, 2019, 6:37 pm

    Good

  3. Pragya Shukla - December 18, 2019, 7:33 pm

    👌👌👌✍

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 18, 2019, 8:01 pm

    सुंदर

  5. Abhishek kumar - December 18, 2019, 8:31 pm

    Good

  6. Anil Mishra Prahari - December 19, 2019, 10:52 am

    बहुत सुन्दर।

  7. Kanchan Dwivedi - December 19, 2019, 4:12 pm

    Nice

  8. Kanchan Dwivedi - December 19, 2019, 4:15 pm

    सुन्दर रचना

  9. Reetu Honey - December 21, 2019, 12:33 pm

    Sir kavita dale u r best

Leave a Reply