पुस की रात जरा सा ठहर जा। तेरे तेज चलने से, मैं भूल जाता हूँ अपनो को, उनके दिये जख्मों को, उन पर छिड़के नमको को। पुस की रात जरा ……………. तेरी ठंड की कसक […]

फिर आई वो पूस की काली रात। मन है व्याकुल, उठा है झंझावात।। पत्तों से ओस की बूँदें टपकना याद है मुझे। आँखों से आँसूओं का बहना याद है मुझे। सन्नाटे को चीरती, तेज धड़कनों […]

आखिर क्या कहूँ इस पूस की रात को ? झकझोर रहा है मेरे दिल की जज़्बात को । आखिर क्या कहूँ इस पूस की रात को? घनघोर अंधेरा छाया है देख मेरा मन घबराया है […]

पूस की रात। थरथरा रहा बदन जमा हुआ लगे सदन, नींद भी उचट गयी रात बैठ कट गयी। ठंड का आघात पूस की रात। हवा भी सर्द है बही लगे कि बर्फ की मही, धुंध […]

पूस की रात मे दुनिया देख रही थी सपने आलस फैला था चहु ओर रात भी लगी थी ऊँघने. मैंने छत्त से देखा बतखों के झुण्ड को तलाब मे तीर सी ठण्डी हवा चलने लगी […]

शायरों का हुआ गर्म हर लफ़्ज़ इस सर्द पूस की रात के महीने में दिल भी बहका बहका सा लागे इस सर्द पूस की रात के महीने में गुड़ सा मीठा अदरक सा तीखा पूस […]

कभी ना भूलेगी वो पूस की रात……. ठंडी सर्द हवाओं और बारिश की बूंदों के साथ…… मैं और मेरी तन्हाई बस दो ही थे। उस दिन वो बारिश की नर्मी और चादर की सिलवट वैसी […]

🌹🌹कभी ना भूलेगी वो 🌹🌹 पूस की रात……. ठंडी सर्द हवाओं और बारिश की बूंदों के साथ…… ⚘⚘⚘ मैं और मेरी तन्हाई बस दो ही थे। ⚘⚘⚘ उस दिन वो बारिश की नर्मी और चादर […]

ऐ बेदर्द सर्दी ! तुम्हारा भी कोई हिसाब नहीं। कहीं मंद शीतल हवाएँ । कहीं शबनम की ऱवाएँ ।। दिन को रात किया कोहरे का कोई जवाब नहीं। ऐ बेदर्द सर्दी ! तुम्हारा भी कोई […]

रज़ाई ओढ़ जब चैन की नींद हम सोते हैं। ठण्ड की मार सहते, ऐसे भी कुछ होते हैं।। जिनके न घर-बार, ना ठौर-ठिकाना। मुश्किल दो वक़्त कि रोटी जुटाना। दिन तो जैसे – तैसे कट […]

तुम मुझे ओढ़ लो और मैं तुम्हें ओढ़ लेता हूँ, सर्दी के मौसम को मैं एक नया मोड़ देता दूँ। ये लिहाफ ये कम्बल तुम्हें बचा नहीं पाएंगे, अब देख लो तुम मैं सब तुमपे […]

वसंत को कहा अलविदा, ग्रीष्म और वर्षा काल बीता अब शरद और हेमंत अायी, सर्दी शिशिर तक छाई ये सर्द सर्द सी राते, इसकी बड़ी अजीब है बातें कहीं मुस्कान अोस सी फैलायी, कहीं दर्द […]

तेरा चुपके से आना गजब, घंटो धूप में बिताना गजब। आग के पास सुस्ताने लगे हैं, तुझे हर वक्त पास पाने लगे हैं। तेरे यादों को मन में समेटे बैठे हैं तन को कम्बल में […]

किसी नाजुक कली सी, आंखें कुछ झुकी हुई शरमाई सी, हौले हौले दबे पांव आई ही गई सर्दी सलोनी सी, खिली हुई मखमली धूप में, आई किसी की याद सुहानी सी, दबी दबी मुस्कुराहट, होठों […]

रूह भी कांपती है ठंडक मे कभी- कभी, याद आती है हर मजबूरियाँ सभी तभी।  इन्सान को ज़िन्दगी की कीमत समझनी चाहिये,  जो हो सके मुनासिब वह रहम करना चाहिये।  जीवन है बहुत कठिन कैसे […]

सर्दियों की धूप सी लग रही है यह घड़ी यह जो नया एहसास है अजनबी है अजनबी सुना है मन वीरान है मेरा जहां आज क्यूं यादों में है डूबा दिल ना आ रहा है […]