“क़दमों के निशान” #2Liner-104

ღღ__कल भी आये थे “साहब”, घर तक उनके क़दमों के निशान;
.
वो मुझसे मिलते तो नहीं लेकिन, मिलने आते ज़रूर हैं!!….‪#‎अक्स


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6 Comments

  1. Ashutosh Chaudhary - April 14, 2016, 9:11 am

    बढ़िया भाव है भैया

  2. Panna - April 14, 2016, 1:14 pm

    behatreen sir!

  3. Pragya Shukla - April 18, 2021, 7:21 pm

    अति सुन्दर रचना

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