“ख़त” #2Liner-102

ღღ__यूँ भी कई बार “साहब”, मोहब्बत का सिला मिला मुझे;
.
कि मेरे ख़त के जवाब में, मेरा ही ख़त मिला मुझे!!…..#अक्स

Related Articles

ख़त

गुज़रा ज़माना याद दिलाता है ख़त। अब बीता ज़माना कहलाता है ख़त। रूठे को मनाना, हाले-दिल बताना, अपनों को अपना बनाता है ख़त। ना हुई…

ख़त

यादों की गलियाँ सजी हैं, कुछ झालरें,पुराने दिनों की लगीं हैं, कुछ रंगी से दिन हैं बिछे, कुछ रेशमी रातों के पीछे। मेरी खिङकी के…

Responses

New Report

Close