10 Comments

  1. “निडर खड़े हैं रक्षक बनकर, रौंध रहे हैं दुश्मन को।
    आज उन्हें जय हिंद लिख रही, अक्षरजननी यह कवि की,
    जो सीमा पर डटे हुए हैं, रोक रहे हैं दुश्मन को।”
    देश प्रेम से सुसज्जित कवि सतीश जी की अति उत्तम रचना
    छंद युक्त अति सुन्दर प्रस्तुति

  2. कवि सम्मेलन करा के श्रीमान
    हो के आए हैं क्या शरहद से।
    कितने दिनों के बाद मिले हैं
    पाण्डेयजी अब फुर्सत में।।
    देश भक्ति का भाव है प्यारा
    प्यारी -सी इस रचना में ।
    शत सलाम सदा हीं मेरी
    वीर सपूतों की वन्दना में।।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद शास्त्री जी, आपकी इस आत्मीय टिप्पणी हेतु मन में अत्यंत प्रसन्नता हुई। यह आशिर्वाद बना रहे।

  3. डटे हुए हैं सीमा में वे, रोक रहे हैं दुश्मन को,
    चढ़ा रहे हैं लहू- श्रमजल, मिटा रहे हैं दुश्मन को।
    ठंडक हो बरसात लगी हो, चाहे गर्मी की ऋतु हो,
    सरहद के रक्षक फौलादी, रौंध रहे हैं दुश्मन को।

    उपर्युक्त पंक्तियां बेहद
    सराहनीय हैं
    जो देशभक्ति से ओत प्रोत हैं
    सच ही कहा है
    हमारे जवान बिना मौसम की परवाह किये ही
    हमारे देश की रक्षा हेतु
    सीमा पर डटे रहते हैं

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