जफ़ा मत कर, वफ़ा कर ले
झियाँ मत बन, मुहब्ब्त कर
सभी धोखा नहीं देते
मुहब्बत से कभी मत डर।
जफ़ा मत कर
Comments
12 responses to “जफ़ा मत कर”
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बहुत सुंदर
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सादर धन्यवाद जी
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Waah
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Thank you प्रज्ञा जी
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वाह
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सादर नमस्कार शास्त्री जी
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बहुत खूबसरत पंक्तियां..
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सादर धन्यवाद, अभिवादन गीता जी
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Very good👍👍👍
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Thank you ऋषि जी
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Very nice
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धन्यवाद सर
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