14 Comments

  1. बड़े मन से यह कविता लिखी है जरूर पढ़िये…
    पूरी पढ़ने की आवश्यकता नहीं है जितनी में मन लगा रहे सिर्फ उतनी ही पढ़िये…
    यह कविता मैंने जब पांचवी में थी तब लिखी थी इसलिए दिल के करीब है

  2. वाह! आपने कविता में जान के साथ साथ अश्क़ के समंदर भर दिया है। रचना पढ़ कर दिल में एक अजीब प्रकार की सिहरन का जन्म हो गया है। आपकी सारी कविताओं में से यह कविता मुझे बहुत ही सुन्दर लगी।अति उत्तम भाव में प्रेषित किया है।

  3. बहुत मार्मिक चित्रण है प्रज्ञा जी आपकी कविता का, एक गरीब बेबस मां का मरते दम तक अपने बच्चे को सहारा देना, बहुत ही ह्रदय स्पर्शी रचना , काबिले तारीफ़ प्रस्तुति

Leave a Reply