15 Comments

  1. “सीता, रुक्मिणी की तरह ही पति चुनने का अधिकार मिल”
    बहुत सुंदर विचार है प्रज्ञा जी आपके ,हमारे पुराणों में भी बेटियों को उनका मन पसंद वर चुनने का अधिकार था,तो आजकल माता पिता क्यों संकोच करते हैं, क्यों ये समाज उंगली उठाता है,जब कोई लड़की अपने विवाह के लिए अपनी पसंद या नापसंद बताती है ,लडक़ों पर ये बंदिशें नहीं है यही तो विडम्बना है इस भारतीय समाज की,आखिर लड़की को भी सुख से जीवन जीने का अधिकार है

  2. ऐसा होना चाहिए पर होता नहीं..
    लड़कियों को इंसान ना समझने की जो गलती करते हैं बाद में वो बहुत पछताते हैं

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