मुश्किलें बस ये दिखाने को..

‘हैं जबकि और भी कितने ही दर ज़माने में,
क्यूँ फकत मेरे ठिकाने को चली आती हैं..
कितने मौजूद मददगार हैं यहाँ तेरे,
मुश्किलें बस ये दिखाने को चली आती हैं..’

– प्रयाग

मायने :
फकत – सिर्फ

Comments

10 responses to “मुश्किलें बस ये दिखाने को..”

  1. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब…
    रहिमन विपदा हो भली,जो थोड़े दिन होय,
    हित – अनहित या जगत में जानी परत सब कोय।
    ————– रहीम दास जी के दोहे को चरितार्थ करती बहुत सुंदर रचना।

    1. बहुत शुक्रिया आपका

  2. क्या बात है

  3. बिल्कुल सही👍

    1. शुक्रिया जी

  4. बहुत ही सुंदर लाजबाब

    1. Prayag Dharmani

      धन्यवाद सर

  5. Pratima chaudhary

    बहुत खूब

    1. Prayag Dharmani

      बहुत शुक्रिया आपका

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