मुहब्ब्त ने हमें

मुहब्ब्त ने हमें इस कदर
आसिम बना के छोड़ा है,
हर कोई मारकर पत्थर
अजाब देता है।

Comments

18 responses to “मुहब्ब्त ने हमें”

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  1. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

    1. सादर धन्यवाद, अभिवादन, जय हो

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  2. वाह क्या बात है सर

    1. इस सुंदर टिप्पणी हेतु बहुत बहुत धन्यवाद, आप स्वयं में एक भावपूर्ण उगते हुए सबल कवि हैं। पुनः धन्यवाद

    1. सादर धन्यवाद जी

  3. बहुत ही बढ़िया

    1. सादर धन्यवाद

    1. धन्यवाद जी

    1. बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

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