22 Comments

  1. वाह
    भीगे तुम भी, भीगे हम भी
    भीग गया है तन – मन सारा।
    नभ से मेघा जल बरसाते,
    धरती को हैं सरस बनाते
    बहुत सुंदर पंक्तियाँ, लेखन प्रतिभा की उत्कृष्टता को दर्शाती कविता।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका सतीश जी 🙏 आपकी प्रेरक समीक्षाएं मुझे और बेहतर लिखने के लिए प्रेरित करती हैं। आपका हृदय से आभार।

  2. बारिश के मौसम का लुफ़्त उठाने का अलग ही अनुभव होता है
    रिम -झिम बारिश की बूंदें जब तन पर गिरती है काया आनंदित हो जाती है और चारों तरफ हरियाली को देखकर मन भी खुश हो जाता है
    अतिसुंदर भाव

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