सूर्य का स्वागत

नई भोर है सूर्य का स्वागत
करेंगे हम…
खिड़कियों से पर्दे हटा
किरणों से नहाएगे हम..
तितलियों के पंख से चुरा लेंगे
तमाम रंग
फीके आसमां पे जा नित नवीन
चित्रकारी करेंगे हम..
सागर की लहरों से सीख लेंगे…
जीवन के उतार-चढ़ाव
पंख खोल आसमां में जा
उड़ेंगे हम…
पपीहे की पुकार सुन झूम
उठेंगे मन-गगन
और रेत से कभी फिसला
करेंगे हम…
चुरा लाएगे एक रोज़ हम
समय की चाबियां
वक्त-बेवक्त फिर जगा
करेंगे हम…

Comments

24 responses to “सूर्य का स्वागत”

  1. Geeta kumari

    वाह, प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा चित्रण… बहुत सुंदर।

    1. धन्यवाद आपका बहुत बहुत आभार

  2. प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण

    1. थैंक्स फॉर कमेंट्स

    1. धन्यवाद आपका

  3. हमेशा की तरह अद्वितीय ।

    1. अरे मैम!
      यह आप कह रही हो यकीन ही नहीं होता मैं तो खुद ही आपकी कविताओं की बहुत बड़ी फैन हूं

    1. धन्यवाद आपका बहुत बहुत आभार

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  5. अंदर उत्प्रेरक काव्य रचना

    1. अभार आपका

  6. यह कविता तो बहुत बढिया लगी
    उत्तम रचना
    प्रकृति का सुन्दर चित्रण किया है आपने
    हर पँक्ति में सागर भर दिया आपने
    वाह क्या बात है खूबसूरत कविता लिखी है ।
    सूर्य का स्वागत करने की बात
    बहुत अच्छी लगी है

    1. Pragya Shukla

      🙏🙏

  7. उच्चकोटि का रचना

  8. हिंदी की उत्तम कविता
    वाह क्या बात है खूबसूरत कविता लिखी है आपने
    उत्तम सोच
    उत्तम रचना

  9. Pragya Shukla

    धन्यवाद

  10. Pragya Shukla

    🙏🙏

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