किरदार

‘ऐसे किरदार का यूँ भी है महकना वाजिब,
कि नाम जिसका महज़ खुशबुओं से लिखा हो..
आखरी खत ये जो खाली सा नज़र आता है,
यूँ भी हो सकता है कि आँसुओं से लिखा हो..’

– प्रयाग

Comments

11 responses to “किरदार”

  1. वाह इस बार तो आप ही सर्वश्रेष्ठ कवि बनेगे

    1. आपने इतना कहकर ही मुझे श्रेष्ठ और विशिष्ट बना दिया बहुत बहुत आभार आपका

      1. कहना पड़ा क्योंकि यूँ तो मैं किसी की तारीफ़ करती नहीं
        बस जब लगता है तभी करती हूँ
        यह मेरे विचार हैं
        सावन का फैसला कुछ भी हो सकता है।
        Thank you sir

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत ही बेहतरीन
    मैं भी प्रज्ञा जी के विचारों से सहमत हूं बहुत ही सराहनीय है आपका लेखन कार्य।

    1. बहुत बहुत आभार आपका

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