साथी

वित्त – विभूति कहीं जले
तो, जल ही उस बुझाए
कहीं दिल जले तो क्या किया जाए..
अम्बर से पानी बरसे,
तो , छतरी को लिया जाए
नयनों से पानी बरसे, तो क्या किया जाए
देह में कहीं दर्द हो ,
तो दवा ले ली जाए
वेदना हो तो क्या किया जाए
अच्छा साथी होता है,
दवा सा ही..
अच्छे साथी का साथ मिले गर,
तो दवा ही ना ली जाए..

*****✍️गीता*****

Comments

11 responses to “साथी”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत खूब
    अच्छे साथी तो दवा भी हैं और दुआ भी।
    सुन्दर प्रस्तुति

    1. Geeta kumari

      बहुत अच्छी समीक्षा की है आपने भाई जी, बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  2. Satish Pandey

    अच्छा साथी होता है,
    दवा सा ही..
    अच्छे साथी का साथ मिले गर,
    तो दवा ही ना ली जाए..
    वाह वाह, आदरणीया गीता जी, आपकी लेखनी में अद्भुत साहित्य भरा है। श्रृंगार से परिपूर्ण रचना। साथी के सुरम्य महत्व को उद्घाटित करती अतिसुन्दर कविता।

    1. Geeta kumari

      सुन्दर समीक्षा और सराहना हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏
      आपकी इस प्रेरक टिप्पणी से बहुत उत्साह वर्धन हुआ ।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

  3. अतीव सुन्दर

    1. Geeta kumari

      Thanks for your precious compliment Kamla ji.

    1. Geeta kumari

      Thank you Pragya for your valuable compliment.

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