मेरे हवाले कर दो…

‘रेत पर लिख दो और लहरों के हवाले कर दो,
आज इस साल की सब बन्द रिसालें कर दो..

इस नए साल में बाहर न कोई ढूंढे तुम्हे,
मेरे रब तुम अगर दिलों को शिवाले कर दो..

किसी भूखे के लिए ये बड़ी वसीयत है,
कि उसके नाम कभी चंद निवाले कर दो..

किसी की ऊँची हैसियत से जला क्यूँ कीजे,
जलो ऐसे कि हर तरफ ही उजाले कर दो..

किसी को हश्र दिखाना हो किसी आशिक का,
मुझी को ताक पर रखकर के मिसालें कर दो..

तुम अपनी यादों से कह दो कि रिहा कर दें मुझे,
मैं थक गया हूँ मुझको मेरे हवाले कर दो..

रेत पर लिख दो और लहरों के हवाले कर दो,
आज इस साल की सब बन्द रिसालें कर दो..’

– ‘प्रयाग धर्मानी’

मायने :
रिसालें – पतली किताबें
शिवाले – मंदिर
मिसालें – उदाहरण
रिहा – आज़ाद

Comments

16 responses to “मेरे हवाले कर दो…”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बढ़िया चित्रण

    1. बहुत शुक्रिया सर आपका

    1. शुक्रिया अनु जी

  2. Geeta kumari

    बहुत सुंदर कविता

    1. बहुत धन्यवाद आपका

  3. कविता की दूसरी पंक्ति को कृपया इस तरह पढ़ें..
    ‘यूँ गुज़रे साल की सब बंद रिसालें कर दो..’

    कविता लिखते वक्त ये सोचा था कि आखिर में करेक्शन कर दूंगा लेकिन अपलोड करते वक्त याद ही नही रहा..क्षमाप्रार्थी हूँ..

  4. बहुत ही सुन्दर
    बहुत दिन बाद आपकी रचना पढने को मिली

    1. Prayag Dharmani

      जी बहुत शुक्रिया..और बिल्कुल ठीक कहा आपने दरअसल लोकडाउन के बाद से 60 प्रतिशत वेतन हो जाने के कारण दो जगह काम करना पड़ रहा है इसलिए वक्त नही निकाल पाता लेकिन कोशिश करूँगा कि कभी कभी ही सही लेकिन उपस्थिति दर्ज़ कराता रहूँ..

    1. Prayag Dharmani

      Thanks Sir

  5. अति सुंदर

    1. Prayag Dharmani

      Thank You Pragya Ji

  6. Satish Pandey

    उत्तम प्रस्तुति

    1. Prayag Dharmani

      Thank You so Much sir

  7. Vanshika Yadav Avatar

    👌👌👌👌👌👌वाह क्या बात है

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