आज सोंचा कि थोड़ा मुकम्मल हो लूँ जहान को अपने खुशियों से रोशन कर लूँ।
आज सोंचा कि थोड़ा मुकम्मल हो लूँ जहान को अपने खुशियों से रोशन कर लूँ।
क्या अपराधी मार देने से इन्साफ हो गया। आज क्या शह देने वालों का पर्दाफ़ाश हो गया।
मर गया आज एक और रावण मगर रामराज़्य की कोई उम्मीद नहीं जब शह देने वाले जीवित हैं तो गुंडाराज खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं।
आया ‘कोरोना वायरस’ सबसे ज्यादा हम बेहाल हुये। सच कहता हूँ हम मजदूरों के बहुत ही बुरे हाल हुये। छूटा रोजगार तो, दाल रोटी के लाले हो गये। मकान मालिक भी किराये के, तलाशी हो […]
बदरी घिरि आई ए हो पिया! रिमझिम बरसत छम से बदरिया
आजाद फिज़ाओ में बस है एक ही नाम बाँके बिहारी राधे राधे श्याम
बेबाक निशानियाँ रह गई बस तेरी याद ही रह गई बस
गूंजती फ़िजाओ में रंग कितनें बिखरे हैं और रेशम के धागे भी उलझे हैं, कितनी मशरूफ है ज़िन्दगी अपनी हम भी उलझे हैं वो भी उलझे हैं ।
गम नहीं किसी बात का बड़े आराम से हूँ बहुत बार मैंने बुलंदियां हासिल की है
दो चार बातों में लगा लिया है दिल को तुम कब आओगे किस इंतजार में पलके बिछा कर बैठे हैं
मैं गुजारिश करता हूं तुझसे तू सामने नहीं आ सकती पर ख्वाबों में आ मेरे दर्द खुद एक और मेरे दर्द पर मेरे घाव पर एक मरहम की पट्टी तो लगा मैं गुजारिश करता हूं […]
मैं गुजारिश करता हूं तुझसे तू सामने नहीं आ सकती पर ख्वाबों में आ मेरे दर्द खुद एक और मेरे दर्द पर मेरे घाव पर एक मरहम की पट्टी तो लगा मैं गुजारिश करता हूं […]
जो नारी 9 महीने पेट में पालती है उसी को सब गाली क्यों देते हैं जिसकी वह पूजा करनी चाहिए सर पर बिठाना चाहिए उसे लोग पैरों की जूती क्यों समझते हैं यह विडंबना है […]
कुछ देर में सारा खेल खत्म हो जाएगा क्योंकि तेरी नफरत भी खत्म हो जाएगी और मेरा प्यार भी खत्म हो जाएगा मेरी आखरी सांस बची है कम से कम अब तो तू इश्क का […]
गम बटोर लाई है चांदनी रातें और फुर्सत ही नहीं देती है तेरी दर्द की आहे तेरे दिए दर्द ंंमुझको बार-बार याद आते हैं
सच सभी जानते हैं क्या है बस तेरी ही आंखों पर पट्टी बंधी है क्योंकि तूने जो अहंकार की पट्टी अपनी आंखों पर बचपन से बांध रखी है वह कभी हटाने की कोशिश ही नहीं […]
सच सभी जानते हैं क्या है बस तेरी ही आंखों पर पट्टी बंधी है क्योंकि तूने जो अहंकार की पट्टी अपनी आंखों पर बचपन से बांध रखी है वह कभी हटाने की कोशिश ही नहीं […]
सब पूछते हैं मेरा हाल कैसा है मैं क्या जवाब दूं तेरा नाम बदनाम हो जाएगा क्योंकि तूने ही तो मुझे बर्बाद किया।
बहुत मशरूफ है हम अपनी जिंदगी में पर कभी-कभी वक्त निकाल लेते हैं तुम्हारे लिए तुम्हारे पास भी थोड़ा समय हो हमारे लिए तो हमारे दिल की धड़कनों को कभी कान लगाकर सुनो तो वह […]
दोस्त ने ही दोस्त को मार डाला भरे बाजार में और दोस्त देखता रहा कुछ करना पाया अपने दोस्त की निर्मम हत्या देखकर होठों को सिला ही रखा
गाय की सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है उसमें हजारों देवताओं का वास होता है और गाय का मांस खाना बहुत ही बड़ा पाप है तो गाय की सेवा करें क्योंकि वही है जो बिना […]
बुलंदियां पाना इतना आसान नहीं तन मन से मेहनत करनी पड़ती है और खून पसीना बहाकर एक करना पड़ता है
अपने आस पास देखा तो जमावड़ा था ऐसे लोगों का जो सिर्फ ंमजदू का माखौल उड़ा रहे थे सहायता करने के लिए कोई नहीं ।
दो जून की रोटी कमाने निकला था ंमजदूर घर वापस आया तो दर्द के सिवा कुछ नहीं था ।
मजदूर का दर्द कोई ना जाने बस सब बाते करते हैं वह खाता है सूखी रोटी सब माखौल उड़ाते हैं
कोरोना का संकट खत्म नहीं हो रहा है और लॉक डाउन खत्म हो गया है अब तो तू ही एक सहारा है हे रघुनंदन!
नसीब में नहीं है उसके पीछे क्या भागना रात रात भर जग कर ख्वाइशों के जुगनू बन्द करना ।
हम गरीब सही तू अमीर सही मगर तेरे घर की रोटी मेरे ही खून पसीने से आती है ।
शरजिल इमाम को देशद्रोही घोषित किया मगर C A Aपर कोई बड़ा फैसला अभी तक नहीं किया गया है क्यो इतनी देरी हो रही है इनको फासी की सजा सुनाने में?
डूब जाना तो आसान है मगर डूब कर पार होना बड़ा मुश्किल ।
चप्पे-चप्पे पर नज़र रखता हूँ मैं तो कश्ती हूँ जो हर दरिया पार करता हूँ ।
मोहलत कम दी है खुदा ने तुझे मनाने की पर तुझे तो आदत है बिन वजह रूठ जाने की ।
गिले शिकवे मत करो आज मोहब्बत का इरादा है तेरा इश्क भी कम है मेरा दर्द ज़्यादा है
गिले शिकवे मत करो आज मोहब्बत का इरादा है तेरा इश्क भी कम है मेरा दर्द ज़्यादा है
अफसोस नहीं होता है मुझे तेरे दूर जाने का मै तो शुक्र गुजार हू तेरे बेवफ़ा हो जाने का
सोचता हूँ मैं कि कब आयेगी बहार बगिया में? कब महकेंगे सुगंधित सुमन दिल के आँगन में?
अपनी मासूमियत पर भी शक करते हैं लोग हम जो पानी भी पियें तो शराब कहते हैं लोग ।
मैं अपने फ़ैसले खुद लेता हूँ और कोशिश करता हूँ कि उन फैसलों पर कभी पछताना ना पड़े ।
इरादा बुलंद रखता हूँ मेहनत खूब करता हूँ ऊपर वाले की मोहलत के हिसाब से सब करता हूँ ।
मैं खुद बनाता हूँ रास्ते अपने दूसरों के इशारों पर नहीं चला करता।
बाजुओं में दम रखने वाले मुकद्दर से नहीं डरा करते।
कितना गरूर था डगर को अपने लम्बे होने पर लेकिन एक गरीब के हौसले ने उसे कदमों में नाप दिया ।
बेसुध हो पड़ा है ंमजदूर जमीं पर ओ खुदा! थोड़ा तो रहम कर इस पर
मैं जब भी जीता हूँ अपनी मेहनत से कभी किस्मत से नहीं किस्मत से बस हारा हूँ ।
गमे-फुर्सत जब से मिली बड़ा बेफिक्र सा रहता हूं, अब तो जहान बड़ा खूबसूरत लगता है और अनगिनत ख्वाबों को सच करता रहता हूं।
कभी कभी हम किसी को कुछ ऐसा कह देते हैं कि कहने के बाद पछताना पड़ता है बड़ी तकलीफ होती है ऐसे शब्द मुंह से निकालने के बाद बड़ा अफसोस होता है अपनी गलती पर।
किसकी की किस्मत है जो बस खुशियां ही खुशियां पाए खुशी और गम तो धूप और छांव की तरह जिंदगी के हर कदम पर आते जाते ही रहते हैं आज खुशी है तो कल गम […]
निष्ठुर है क्यों ये जहान मेरा कभी भी गम के सिवा कुछ दिया ही नहीं ।
अकेला होता है जहान में हर कोई बस रिश्तो के झमेले होते हैं जिंदगी गुजारने को कुछ ख्वाब ही जरूरी होते हैं
तुम्हें तो कोई फिक्र ही नहीं बेपरवाह घूमते हो यहां दिन-रात गुजरते हैं बस तुम्हारी फिक्र में
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