Abhishek kumar's Posts

पर्दाफाश

क्या अपराधी मार देने से इन्साफ हो गया। आज क्या शह देने वालों का पर्दाफ़ाश हो गया। »

विकास दुबे

मर गया आज एक और रावण मगर रामराज़्य की कोई उम्मीद नहीं जब शह देने वाले जीवित हैं तो गुंडाराज खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं। »

बेहाल मजदूर

आया ‘कोरोना वायरस’ सबसे ज्यादा हम बेहाल हुये। सच कहता हूँ हम मजदूरों के बहुत ही बुरे हाल हुये। छूटा रोजगार तो, दाल रोटी के लाले हो गये। मकान मालिक भी किराये के, तलाशी हो गये। हम मजदूर,मजबूर, बेबस व लाचार बन गये। उठा झोला परिवार संग, घर की ओर चल दिये। न ट्रेन,न ही मोटरकार, और न ही कोई बस मिली। पैदल ही चले क्योंकि न, कोई और आशा दिखी। हम गिरे,गिरकर फिर उठे, चल दिये,चलते गये। खुद रोये,खुद ... »

ए हो पिया!

बदरी घिरि आई ए हो पिया! रिमझिम बरसत छम से बदरिया »

आजाद फिज़ाओ में

आजाद फिज़ाओ में बस है एक ही नाम बाँके बिहारी राधे राधे श्याम »

तेरी याद

बेबाक निशानियाँ रह गई बस तेरी याद ही रह गई बस »

गूंजती फ़िजाओ में

गूंजती फ़िजाओ में रंग कितनें बिखरे हैं और रेशम के धागे भी उलझे हैं, कितनी मशरूफ है ज़िन्दगी अपनी हम भी उलझे हैं वो भी उलझे हैं । »

गम नहीं

गम नहीं किसी बात का बड़े आराम से हूँ बहुत बार मैंने बुलंदियां हासिल की है »

दो चार

दो चार बातों में लगा लिया है दिल को तुम कब आओगे किस इंतजार में पलके बिछा कर बैठे हैं »

गुजारिश

मैं गुजारिश करता हूं तुझसे तू सामने नहीं आ सकती पर ख्वाबों में आ मेरे दर्द खुद एक और मेरे दर्द पर मेरे घाव पर एक मरहम की पट्टी तो लगा मैं गुजारिश करता हूं तो तुझसे। »

गुजारिश

मैं गुजारिश करता हूं तुझसे तू सामने नहीं आ सकती पर ख्वाबों में आ मेरे दर्द खुद एक और मेरे दर्द पर मेरे घाव पर एक मरहम की पट्टी तो लगा मैं गुजारिश करता हूं तो तुझसे। »

विडंबना

जो नारी 9 महीने पेट में पालती है उसी को सब गाली क्यों देते हैं जिसकी वह पूजा करनी चाहिए सर पर बिठाना चाहिए उसे लोग पैरों की जूती क्यों समझते हैं यह विडंबना है हमारे देश की। »

कुछ देर में

कुछ देर में सारा खेल खत्म हो जाएगा क्योंकि तेरी नफरत भी खत्म हो जाएगी और मेरा प्यार भी खत्म हो जाएगा मेरी आखरी सांस बची है कम से कम अब तो तू इश्क का इजहार कर ले और अपनी नफरत दूर कर ले। »

गम बटोर

गम बटोर लाई है चांदनी रातें और फुर्सत ही नहीं देती है तेरी दर्द की आहे तेरे दिए दर्द ंंमुझको बार-बार याद आते हैं »

अहंकार

सच सभी जानते हैं क्या है बस तेरी ही आंखों पर पट्टी बंधी है क्योंकि तूने जो अहंकार की पट्टी अपनी आंखों पर बचपन से बांध रखी है वह कभी हटाने की कोशिश ही नहीं की »

अहंकार

सच सभी जानते हैं क्या है बस तेरी ही आंखों पर पट्टी बंधी है क्योंकि तूने जो अहंकार की पट्टी अपनी आंखों पर बचपन से बांध रखी है वह कभी हटाने की कोशिश ही नहीं की »

सब पूछते हैं

सब पूछते हैं मेरा हाल कैसा है मैं क्या जवाब दूं तेरा नाम बदनाम हो जाएगा क्योंकि तूने ही तो मुझे बर्बाद किया। »

मसरूफ

बहुत मशरूफ है हम अपनी जिंदगी में पर कभी-कभी वक्त निकाल लेते हैं तुम्हारे लिए तुम्हारे पास भी थोड़ा समय हो हमारे लिए तो हमारे दिल की धड़कनों को कभी कान लगाकर सुनो तो वह सिर्फ तुम्हारा ही नाम लेती है »

दोस्त ने

दोस्त ने ही दोस्त को मार डाला भरे बाजार में और दोस्त देखता रहा कुछ करना पाया अपने दोस्त की निर्मम हत्या देखकर होठों को सिला ही रखा »

गाय की सेवा

गाय की सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है उसमें हजारों देवताओं का वास होता है और गाय का मांस खाना बहुत ही बड़ा पाप है तो गाय की सेवा करें क्योंकि वही है जो बिना कुछ लिए हमें देती है »

बुलंदियां

बुलंदियां पाना इतना आसान नहीं तन मन से मेहनत करनी पड़ती है और खून पसीना बहाकर एक करना पड़ता है »

जमावड़ा

अपने आस पास देखा तो जमावड़ा था ऐसे लोगों का जो सिर्फ ंमजदू का माखौल उड़ा रहे थे सहायता करने के लिए कोई नहीं । »

दो जून की रोटी

दो जून की रोटी कमाने निकला था ंमजदूर घर वापस आया तो दर्द के सिवा कुछ नहीं था । »

दर्द

मजदूर का दर्द कोई ना जाने बस सब बाते करते हैं वह खाता है सूखी रोटी सब माखौल उड़ाते हैं »

कोरोना का संकट

कोरोना का संकट खत्म नहीं हो रहा है और लॉक डाउन खत्म हो गया है अब तो तू ही एक सहारा है हे रघुनंदन! »

नसीब

नसीब में नहीं है उसके पीछे क्या भागना रात रात भर जग कर ख्वाइशों के जुगनू बन्द करना । »

हम गरीब

हम गरीब सही तू अमीर सही मगर तेरे घर की रोटी मेरे ही खून पसीने से आती है । »

C.aa

शरजिल इमाम को देशद्रोही घोषित किया मगर C A Aपर कोई बड़ा फैसला अभी तक नहीं किया गया है क्यो इतनी देरी हो रही है इनको फासी की सजा सुनाने में? »

डूब जाना तो

डूब जाना तो आसान है मगर डूब कर पार होना बड़ा मुश्किल । »

कश्ती

चप्पे-चप्पे पर नज़र रखता हूँ मैं तो कश्ती हूँ जो हर दरिया पार करता हूँ । »

मोहलत कम दी है

मोहलत कम दी है खुदा ने तुझे मनाने की पर तुझे तो आदत है बिन वजह रूठ जाने की । »

मेरा दर्द ज़्यादा है

गिले शिकवे मत करो आज मोहब्बत का इरादा है तेरा इश्क भी कम है मेरा दर्द ज़्यादा है »

मेरा दर्द ज़्यादा है

गिले शिकवे मत करो आज मोहब्बत का इरादा है तेरा इश्क भी कम है मेरा दर्द ज़्यादा है »

मैं तो शुक्र

अफसोस नहीं होता है मुझे तेरे दूर जाने का मै तो शुक्र गुजार हू तेरे बेवफ़ा हो जाने का »

सोचता हूँ मैं

सोचता हूँ मैं कि कब आयेगी बहार बगिया में? कब महकेंगे सुगंधित सुमन दिल के आँगन में? »

मासूमियत

अपनी मासूमियत पर भी शक करते हैं लोग हम जो पानी भी पियें तो शराब कहते हैं लोग । »

फैसले

मैं अपने फ़ैसले खुद लेता हूँ और कोशिश करता हूँ कि उन फैसलों पर कभी पछताना ना पड़े । »

इरादा

इरादा बुलंद रखता हूँ मेहनत खूब करता हूँ ऊपर वाले की मोहलत के हिसाब से सब करता हूँ । »

मैं खुद

मैं खुद बनाता हूँ रास्ते अपने दूसरों के इशारों पर नहीं चला करता। »

मुकद्दर

बाजुओं में दम रखने वाले मुकद्दर से नहीं डरा करते। »

गरूर

कितना गरूर था डगर को अपने लम्बे होने पर लेकिन एक गरीब के हौसले ने उसे कदमों में नाप दिया । »

ओ खुदा!

बेसुध हो पड़ा है ंमजदूर जमीं पर ओ खुदा! थोड़ा तो रहम कर इस पर »

मैं जब

मैं जब भी जीता हूँ अपनी मेहनत से कभी किस्मत से नहीं किस्मत से बस हारा हूँ । »

गमे-फुर्सत

गमे-फुर्सत जब से मिली बड़ा बेफिक्र सा रहता हूं, अब तो जहान बड़ा खूबसूरत लगता है और अनगिनत ख्वाबों को सच करता रहता हूं। »

कभी-कभी

कभी कभी हम किसी को कुछ ऐसा कह देते हैं कि कहने के बाद पछताना पड़ता है बड़ी तकलीफ होती है ऐसे शब्द मुंह से निकालने के बाद बड़ा अफसोस होता है अपनी गलती पर। »

खुशी और गम

किसकी की किस्मत है जो बस खुशियां ही खुशियां पाए खुशी और गम तो धूप और छांव की तरह जिंदगी के हर कदम पर आते जाते ही रहते हैं आज खुशी है तो कल गम का अंधेरा भी छाएगा। »

निष्ठुर

निष्ठुर है क्यों ये जहान मेरा कभी भी गम के सिवा कुछ दिया ही नहीं । »

रिश्तो के झमेले

अकेला होता है जहान में हर कोई बस रिश्तो के झमेले होते हैं जिंदगी गुजारने को कुछ ख्वाब ही जरूरी होते हैं »

तुम्हें कोई फिक्र

तुम्हें तो कोई फिक्र ही नहीं बेपरवाह घूमते हो यहां दिन-रात गुजरते हैं बस तुम्हारी फिक्र में »

बेचैनियां

बेचैनियां बटोर के सारे जहान की खुदा ने मेरा दिल बना दिया और खूबसूरती कल्पनाओं की मेरे मुकद्दर में डालकर मुझे शायर बना दिया। »

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