आज कुछ पुरानी सौगात मिली मैंने अपने कमरे की तलाशी ली। तो कुछ किताबें धूल में लिपटी हुई, कुछ खत, कुछ गुलाब के फूल सूखे हुए कुछ तस्वीरें, कुछ तोहफे और कुछ बन्द लिफाफे मिले। […]
आज कुछ पुरानी सौगात मिली मैंने अपने कमरे की तलाशी ली। तो कुछ किताबें धूल में लिपटी हुई, कुछ खत, कुछ गुलाब के फूल सूखे हुए कुछ तस्वीरें, कुछ तोहफे और कुछ बन्द लिफाफे मिले। […]
समाज में स्त्रियों की दशा देखकर मेरे मन में उठे विचार:- माँ मुझे विवाह नहीं करना। पति की परछाई बनकर, पति के पीछे-पीछे नहीं चलना। माँ मुझे विवाह नहीं करना। अपने कलेजे के टुकड़े(संतान) पर, […]
तेरे-मेरे बीच में वो पहले जैसी बात नहीं रही। ना रही वो बातें, वो मुलाकात नहीं रही। ख्वाहिशों के समंदर पड़ गए सूखे-सूखे रीत में प्रीत में वो पहले जैसी बात नहीं रही। मुश्किलें अब […]
आज योग दिवस ही नहीं पिता दिवस भी है तथा संगीत दिवस भी है। पिता के लिये कुछ शब्द:- 🌷🌷🌷🌷🌷 पिता वो दरख्ता है जो बचपन को छांव देता है। आये कोई भी मुश्किल हाँथ […]
कोशिशें बहुत की उसने मुझे बदल डालने की, मगर नाकामयाब ही रहा वो मेरे हौसले के आगे।
🌹🌹🌹🌹 गूँगी नहीं हूँ मैं मुझे भी बोलना आता है। ——————————– गुलाम हूँ अपने संस्कारों की वर्ना मुझे भी सबक सिखाना आता है।
योग दिवस:- योग करके अपने मानसिक, शारीरिक और संवेगात्मक तीनों अवस्थाओं का विकास कीजिए। योग से अन्तर्मन को निर्मल कीजिए। योग जीवन का वह अलौकिक दर्शन है जो हमें मोक्ष की ओर ले जाता है। […]
नीरोग हूँ मैं क्योंकि मैंने बहुत जतन से प्रेम योग किया है। नैनासन का अभ्यास करके खुद को स्वस्थ्य किया है।
उठाई थी कलम कुछ अनसुलझे सवाल लिखने के लिए। अपने दिल के ज़ज्बात ना जाने कब लिखने लगी। लोग कहते हैं कि मैं बहुत अच्छा लिखने लगी। बस जितनी तकलीफें मिलती रहीं तुझसे, “मेरी कलम […]
ताश के पत्तों-सा ढह जाएगा तू एक दिन विलुप्त ही हो जाएगा। यही हरकतें रही ना तेरी चीन तो तू बिन मौत ही हिंदुस्तान के हाथों मारा जाएगा।
1971 में जब इन्दिरा गाँधी जी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े किये थे। तब चीन मुँह ताकता रह गया था। उफ़ तक ना निकली थी मुँह से और अमेरिका, रूस जैसे देश चूँ तक ना […]
क्यूँ आज सूरज हो गया निस्तेज वह पहले जैसी बात नहीं। हवा भी चल रही है मद्धम-मद्धम उसमें भी पहले जैसी बात नहीं। न जाने क्यों बेरुखी कर रहे हैं सब मौसम के साथ कोई […]
गिले आज भी बहुत हैं तुमसे बस कुछ इम्तिहानों से निपट लूँ । तब तक तुम ढूंढ लो बहाने और मैं शिकायतें लिख लूँ ।
इक शराब ने ही तो सम्भाल रखा है मुझे…. वर्ना तेरी आँखों ने तो कब का मार डाला था….
ये भाग- दौड़ के किस्से अजीब होते हैं, सबके अपने उद्देश्य और औचित्य होते हैं। कभी शिक्षा कभी जीवन की नव आशा में, सिर्फ बेटियाँ ही नहीं, बेटे भी घर छोड़ते हैं। जीवन में सबके […]
ना जाने कब नींद से जागी आँखें? रात भर रोकर सूजी हैं कितनी आँखें। बिता तो लेंगे हम ज़िन्दगी तेरे बगैर भी पर तुझे देखकर ज़िंदा हैं ये मेरी आँखें।
सीमा पर कितने धूर्त और मक्कार हैं अपनी सेना का मनोबल ना गिरने पाए इस बात का भारतीय रखते खूब ख्याल हैं।
ढूंढती रह गई बस तुझे हर दर पर तू मिला नहीं तो देख मैं चांद में खो गई तुझे ढूंढने की चाहत में मैं खुद सितारा हो गई।
तेरे बिन जिंदगी कैसे बताऊंगी तू तो दूर चला गया पर मैं दूर कैसे जाऊंगी। मेरी हर सांस की अमानत हो तुम समझ नहीं आता तुझ बिन कैसे जी पाऊंगी।
किसी की कद्र करनी है तो जीते जी कीजिए जाने के बाद तो हर कोई दुःख जता देता है. जब इंसान जीवित रहता है और किसी दूसरे से कोई उम्मीद करता है तो उसे कोई […]
जीत जायेंगे हम क्योंकि हमारे बाजुओं में है दम चीन को उसके घर तक खदेड़ आएगें हम
रो-रोकर परिजन का हो गया बुरा हाल मां पूछती है सबसे कहां गया मेरा लाल
जिस तरह अंग्रजों के सामान को और उन्हें बहिष्कृत किया था। उसी प्रकार चीनी सामान को अपने जीवन से दूर करो। और आत्मनिर्भर बनो। अपनी दैनिक आवश्यकताओं का सामान खुद ही देश में बनाओ।
चीनी सामान का बहिष्कार करो इसे अपने जीवन से दूर करो सरकार ने यह निर्णय लिया है आप भी यह निर्णय लेकर देश भक्ति की भावना दिखाओ।
सैनिक के शव से बोली उसकी पत्नी:- माँग सूनी रह गई क्यूँ तूने छुड़ा लिया दामन? अभी-अभी तो रूह जुड़ी थी। क्यूँ तूने छुड़ा लिया दामन? अभी-अभी तो साथ चले थे। क्यूँ तूने छुड़ा लिया […]
भारत माँ की खातिर कितनी माताओं की कोख उजड़ी। भारत माँ विपदा में पड़ी। हर गली में पसरा सन्नाटा हर चौखट सूनी पड़ी। भारत माँ विपदा में पड़ी। किस किस को खोकर रोये धरती यही […]
एक सैनिक ऐसा भी होगा! जिसनें प्रेम किया होगा अपने प्रेम का इजहार किया होगा! जब आया होगा छुट्टी पर तो यह वादा किया होगा। अगली बार जब आऊँगा तुझको ही प्रिया बनाऊँगा । इस […]
कितना कष्ट होता है जब एक सैनिक शहीद होता है । पूरा देश रोता है । हर गली रुदन करती है । एक अशांत-सी पीड़ा मन में घर करती है । रोती है धरती जब […]
हाय कितनों ने जान गँवाई! उस चीन ने जमीन के टुकड़े की खातिर कर दी नीच-सी हरकत । खुद मरा और मेरे प्यारे देशभक्त सैनिकों ने भी वीरगति पाई । हाय कितनों ने जान गँवाई!
आप एक बार अपने नियमों में बदलाव कीजिये । दुश्मन पर वार करने का फैसला, सेना के विवेक पर छोड़िए। उसे पाकिस्तान की तरह आजाद कर दीजिये। 🙏🙏🙏आपसे अनुरोध है इसमें राजनीति मत कीजिये।
अपनी राजनीति को सुरक्षाबल से दूर रखो राजनीति हर जगह करो पर सैनिकों को इससे दूर रखो। जब हमारी सेना राजनीति से दूरियाँ बनाये तो भारत सरकार तुम भी अपने कदमों को सेना से दूर […]
मत गंवाओ अब और सैनिकों को तुम एक बार सीधे गोली मारने का आदेश देकर देखो।
क्यूँ नहीं देती है सरकार सैनिकों को दुश्मन को सीधे गोली मारने की आजादी? वो बस राह देखते हैं आदेश की और खाते रहते हैं सीने पर गोली। उनकी शहादत पर हम कब तक बहायें […]
यह कैसे अच्छे दिन आए हैं? एक तरफ कोरोना मानव को निगलने पर तैयार खड़ा है। दूसरी ओर सीमा पार दुश्मन खड़ा है। इस महामारी को देखकर भी, चीन का पेट नहीं भरा है। इसीलिए […]
याद आती हैं वो बचपन की बातें जब पापा के हाथों से चोटी करवाती थी। माँ लोरी गाकर सुलाती थी। कहाँ गई वो बचपन गुड़िया ? जिसकी शादी मैं रोज़ कराती थी। बाबा की भजन […]
नजरों को बस तेरी ही तलाश रहती है सुकून भी बस तेरे ही साथ आता है, मुलाकात भले ही ना होती हो हमारी पर सारा वक्त तेरी याद में गुजरता है।
जुबां जो कह नहीं सकती आंखें वो राज़ कहती हैं। दिल में जो कुछ भी चलता है धड़कनें आवाज करती हैं । लगाए लाख भी पहरे दिलों पर चाहे जमाना, मोहब्बत तोड़कर पहरे दिल को […]
कितनी बेबस हैं लोह-पथ-गामिनी (रेलगाड़ी) की खिड़कियों से झांकती 👁आंखें। इन आंखों में अनगिनत प्रश्न उपस्थित हैं। कितनी आशाएं कीर्तिमान हो रही हैं । अपने परिजनों से मिलन की उत्सुकता ह्रदय को अधीर कर रही […]
गज़ल =”कभी यूं भी आ” ——————————– कभी यूं भी आ मेरी आंख में मेरी नजर को खबर ना हो, मुझे एक रात नवाज दे कि फिर ‘शहर'(सुबह) ना। अंशुमाली में तेरी ही आरजू रहती है […]
चिपको आन्दोलन की शुरुआत 1970 में सुंदरलाल बहुगुणा, गौरा देवी, कल्याण सिंह रावत पर्यावरणविद ने की। वन विभाग के अधिकारियों को 2400 से अधिक पेड़ काटने के आदेश पर खदेड़ा। इसकी शुरुआत तत्कालीन ‘चमोली जिले’ […]
याद हैं वो गुजरे जमाने तुमको? जब प्रीत से बढ़कर और कुछ भी न था। याद हैं वो गुलिस्ता मुझको जहाँ तेरे और मेरे सिवा कुछ भी न था। कुछ दूर खड़े तुम थे कुछ […]
किस्मत से डरी हुई हूँ मैं ज़िन्दगी के भंवर में फंसी हुई हूँ मैं …. तेरी स्मृतियों की दासी हूँ हालतों की दुविधा से सहमी हुई हूँ मैं ….. गमों की आंधियों ने झकझोर दिया […]
🌴🌴दरख्तों सी है ज़िन्दगी अपनी🌴🌴 कभी हर साख पर हैं पत्तियां टूटती….लहराती…. और मिट्टी में मिल जाती…. कभी हर शाख पर गुल खिलता है कभी दरख्ता वीरान सा नज़र आता है जिसकी हर एक शाख […]
🌴🌴दरख्तों सी है ज़िन्दगी अपनी🌴🌴 कभी हर साख पर हैं पत्तियां टूटती….लहराती…. और मिट्टी में मिल जाती…. 🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂 कभी हर शाख पर गुल खिलता है कभी हर शाख वीरान सी नज़र आती है जिसकी हर […]
तुम्हारी हर एक बात सही है…. वक्त का पता तो चलता ही नहीं है अपनों के साथ, पर अपनों का पता चल जाता है वक्त के साथ। मगर ए हमदम! अपनों के प्रति ऐसी संवेदनाएं […]
बड़ों की इज़्ज़त करने से इज़्ज़त कम नहीं होती, बल्कि कई गुना बढ़ जाती है।
हर तरफ तेरी याद का दर्द गहरा है ना जाने किस बात पर ये दिल ठहरा है, तेरी आँखों में ठहरे आंसुओं की कसम ए दोस्त! ये दर्द का रिश्ता बहुत ही गहरा है।
गीत बनकर तुम्हारी जिंदगी में आई थी एक रोज …….. गजल बनकर तुम्हारी ज़िंदगी बन गई। और रुबाई बनकर आंखें भिगोई तुम्हारी… एक दिन ख्वाब बनकर तुम्हारे सपनों के खटखटाने लगी दरवाजे और जगाने लगी […]
कुछ यही हाल हमारा भी है नींद आती है तो सो लेते हैं वरना रो लेते हैं।
तारीफ़ न सही तो आलोचना ही कर दिया करो, गर हो गये हो गूंगे तो इशारा ही कर दिया करो। सयाने बनकर देखते हो तुम चलन सारे जमाने का … गर चुप ही रहना है […]
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