बनाकर बातों से बातें यहां बातें निकलती हैं, बस यूँहीं जिंदगी के सफर की रातें निकलती हैं, भरकर बैठे रहते हैं कुछ लोग अपने अंदर इतना, के पूछो एक और बाहर भरमार कहानी निकलती हैं… […]

मै जब से तेरी एक तस्वीर बनाने में वयस्त हूँ, मैं तब से अपने ही ख्यालों में वयस्त हूँ, रंग तो बहुत हैं ज़माने में मगर, मैं इंद्रधनुष के रंग छुड़ाने में वयस्त हूँ, चाँद […]

मै जब से तेरी एक तस्वीर बनाने में वयस्त हूँ, मैं तब से अपने ही ख्यालों में वयस्त हूँ, रंग तो बहुत हैं ज़माने में मगर, मैं इंद्रधनुष के रंग छुड़ाने में वयस्त हूँ, चाँद […]

तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे, तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे, साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी, रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा […]

मैं प्यादा हूँ मुझे प्यादा ही रहने दो, यूँ हाथी और घोड़ों से न भिड़ाओ तुम, मैं तो शतरंज का खिलाड़ी हूँ दोस्त, मुझे सांप सीढ़ी में न उलझाओ तुम।। राही (अंजाना)

जब तुमने मिलना छोड़ दिया, दिल ने धकड़ना छोड़ दिया, राह फ़िज़ाओं ने बदली पुष्पों ने खिलना छोड़ दिया, बहक उठा मन का पंछी कदमों ने लहकना छोड़ दिया, जब से रुस्वा हुई मन्ज़िंल “राही” […]

तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे, तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे, साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी, रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा […]

सोंचता हूँ अपनी एक नई दुनियाँ बना लूँ, जिसमे अपनी ही मनचाही तस्वीरें लगा लूँ, खुशियों के बिस्तर बिछा लूँ और दुखों को अपने घर का रस्ता भुला दूँ, सूरज चँदा को अपनी छत पर […]

न दिन खरीद पाओगे न रात बेच पाओगे, इन हाथों में न तुम अपने हालात बेच पाओगे, खरीदने की चाहत जो तुम दिल में सजाये हो, इन आँखों से तुम न ये ख्वाब बेच पाओगे, […]

कल्पनाओं की कलम से जो चित्र बनाये वो कवि, खामोश आवाजों को सुन कर जो अल्फ़ाज़ बनाये वो कवि, समन्दर को बाहों में समेट कर जो दिखाए वो कवि, कलम को शमशीर से भी तेज […]

सरहद के आर पार देखती हैं नज़रें उसकी, ज़िगर के आर पार देखती हैं नज़रें उसकी, खामोश दिखती हैं मगर बहुत बोलती हैं नज़रें उसकी, दिल में मोहब्बत का रंग घोलती हैं नज़रें उसकी।। राही […]

जब किसी ने न देखा पलटकर मुझको, तब आइना भी मुझे देखकर मेरे साथ रोया, जब सूख गया मेरे दिल का हर एक कोना, तब समन्दर भी मेरे बिस्तर पर साथ सोया। राही (अंजाना)

हर्षित मन फुलवारी में सुंदर फूल अनोखा देखा, मैने जंगल में हिरण एक अद्भुत रंग सलोना देखा, जब भी सोया स्वप्नों में मैंने ख़्वाब सुनहरा देखा, सावन के व्यक्तित्व को मैने सबके मनको मोहता देखा।। […]

वक्त कैसा भी हो हाथ से छूट ही जाता है, रिश्तों के समन्दर में यहाँ हर कोई डूब ही जाता है, चोंच में दाने खिलाता है जो पंछी, एक दिन तनहा छोड़ ही जाता है।। […]

वो देखते ही नहीं आईना पलटकर यारों, गर आईने में चित्र की जगह चरित्र उनके दिखाई देते, और होता ही नहीं जो सामना शमशीर ऐ नज़र से उनकी, तो जिंदगी के सफ़र में ‘राही’ हम […]

वो देखते ही नहीं आईना पलटकर यारों, गर आईने में चित्र की जगह चरित्र उनके दिखाई देते, और होता ही नहीं जो सामना शमशीर ऐ नज़र से उनकी, तो जिंदगी के सफ़र में ‘राही’ हम […]

वो देखते ही नहीं आईना पलटकर यारों, गर आईने में चित्र की जगह चरित्र उनके दिखाई देते, और होता ही नहीं जो सामना शमशीर ऐ नज़र से उनकी, तो जिंदगी के सफ़र में ‘राही’ हम […]

कुछ इस कदर के दुआएं बेअसर हो गई, के सारे मर्ज़ों की दवाएं मेरे ही सर हो गई, इलाज मिला मगर कहीं कुछ कसर हो गई, जिंदगी इससे पहले ही मोहब्बत की नज़र हो गई।। […]

आइना देखने से ज्यादा दिखाने में लगा है, यहाँ हर कोई अपना चेहरा छिपाने में लगा है, खुद गुनाहों के समन्दर में डूबा हो मगर, हर कोई एक दूसरे पे ऊँगली उठाने में लगा है, […]

हवाओं के रुख से आहट पहचान ले कोई, ऊँगली जो उठे तो मुट्ठी बाँध ले कोई, कोई करे अनदेखी और बिन कहे सब जान ले कोई, साफ़ नज़र आता है क्यों न इसे मोहब्बत मान […]

पकड़ कर ऊँगली जो समन्दर पार कराता है, बहके गर जो कश्ती तो साहिल यार दिलाता है, भुलाकर शरारत जो मुझे अपने सर पर उठाता है, मैं जो रूठूँ तो मुझे वो हर बार मनाता […]

बेगुनाह को किस गुनाह की सज़ा सुनाई गई, सारी कायनात में क्यों ये खबर फैलाई गई, जुर्म किया ही नहीं जिस मालिक ने उसको, क्यों भरी अदालत में गीता की कसम खिलाई गई।। राही (अंजाना)