सांझ हुई,दीपक जलाओ आयंगे प्रियतम तुम्हारे हैं अँधेरे पंथ में जो है वही चांदनी हमारी सांझ हुई दीपक जलाओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सांझ हुई,दीपक जलाओ आयंगे प्रियतम तुम्हारे हैं अँधेरे पंथ में जो है वही चांदनी हमारी सांझ हुई दीपक जलाओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
है प्रभु विनती हमारी मार्ग दो संसार को है निशा जहाँ जगती पर प्रकाश दो संसार को तुम हो नाथ अनाथ के सानिध्य दो संसार को है प्रभु विनती हमारी सार दो संसार को -विनीता […]
है प्रभु विनती हमारी मार्ग दो संसार को है निशा जहाँ जगती पर प्रकाश दो संसार को -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सुना है इश्क की बजार खुली है मेरे शहरो मे, जो जहजे दिल के आदमी है उनके लिए नया आँफर लाया है मेरे शहरो ने। अब मेरे शहरो मे कोई इश्क से बीमार नही मिलेगा […]
बंजर भुमी मे बीज नही बारूद बोयेगे कह दो अब दुश्मन से हाथ जोड़ेगें नही बार करवायेगे✍✍ – ज्योति
✍✍✍काश मेरे मुल्क मे ना जाती ना धर्म होती , शिर्फ एक इंसायनित की नाम होती,, तो दिल्ली मै बैठे गद्देदार की रोटी नही सिझती। रामायण और कुरान मे भेद बताकर अपनी रोटी सेकते है […]
अपनी छाया में भगवन, बिठा ले मुझे (२) मैं हूँ तेरा तू अपना बना ले मुझे (२) अब मुझे गम का गम, ना ख़ुशी की ख़ुशी (२) है अंधेरा भी मेरे लिये रोशनी मैं जीयूं […]
✍✍ मत करना प्यार आज की युवती से, प्यार नही सौदा करती आज की युवाओ से, पैसा- को महत्व देती वो ना देगी प्यार , वादे तो बहुत होगी पर पैसा लेगी हजार, पैसा- पैसा […]
क्यों तुम शमा-ए-चाहत को बुझाकर चले गये? क्यों तुम मेरी ज़िन्दग़ी में आकर चले गये? हर ग़म को जब तेरे लिए सहता रहा हूँ मैं- क्यों तुम मेरे प्यार को ठुकराकर चले गये? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
✍✍इतना जगह दिया तुझे दिल की फुलवारी मे, तु दो खुदगर्ज निकली तोड़ ली सारी फल और झकोर दी मेरी कोमल सी फुलवारी।✍✍✍ – ज्योति
किसी ने पूछा, दिल की खूबी क्या है, हमने कहा, हजारो ख्वाहिशों के नीचे दबकर भी धड़कता है
मुझे मंजूर नहीं है १६ जुलाई २०१८ जग में अपने अस्तित्व को लेकर मैं हैरान हूँ इस जीवन का उद्देश्य क्या है, मैं अनजान हूँ आखिर मेरा जन्म हुआ क्यों है मैं परेशान हूँ तेरा […]
कुर्सी की चाहत बचपन ऐ दिल में सजाये बैठे हैं, शतरंज के सारे मोहरे अपनी मुट्ठी में दबाये बैठे हैं, इरादे किसी शीशे से साफ़ नज़र आते हैं के हम, ख़्वाबों की एक लम्बी फहरिस्त […]
आजतक सूरज कितने अच्छे बुरे अनदेखे पलों का साक्षी है पर उसकी चाल, उसके कर्म पर कभी कोई फर्क नहीं आया हर सुबह उसी ऊर्जा और, उसी शक्ति के साथ निकलता है बिना किसी भेदभाव, […]
ज्योति
ज्योति
तुझे देखने की आश लगा बैठा हूँ, तुझे पाने की आरजु दिल मे सजा बैठा हूँ,, कौन से दिन आयेगें मिलन की पंडितो से दिखाकर बैठा हूँ।। ज्योति
मेरी उजड़ी हुई घर को बसायेगा कौन, माँ ! जब तु ही नही रही बहु लयेगा कौन। ज्योति
चल जिन्नदगी के पन्ने मे तेरा नाम लिखता हूँ, तुम्हारे साथ जीने मरने का वादा अदालत मे गीता मर हाथ रख कर कहता हूँ।। ज्योति
मेरे उजड़ी हुई फुलवाड़ी ,(बाग) देखकर मत हँसना यारो,, बागीयो ही ने उजाड़ा है यारो।
नजर प्यासा -प्यासा सा है, तुमहे देखने के लिए,, सुना है तुम्हारी मेहदी रचाने वाली है किसी दुसरे नाम की।। ज्योति
सपनो तो बहुत देखे थे ,, तुम्हारे हाथ मे हाथ डालकर, तु ही तो खुदगर्ज निकली किसी के हाथ पाने के बाद।।
काश अगर मै जानवर से दिल लगाया होता, मेरे साथ भले वो वादे जीने और मरने की नही करती,, लेकिन दुम हिलाया होता।।
Umar hai choti,khawhishe jada hai. zindgi ye bta,ab tera kya irada hai.. siyah hai kam,panne jada hai. khawhishe kuch aur, likhne ka irada hai.. zindgi ye bta ,ab tera kya irada hai….. rasten hai lambi […]
इतनी खुद्दारी थी मुझमें के भिखारी हो गया, हर रिश्ता जैसे मुझपर ही भारी हो गया, संबंधों की सारी फहरिस्त झूठी निकली, एक जानवर जब मेरे जीवन की सवारी हो गया॥ राही (अंजाना)
शतरंज की बिसात का वो मोहरा हूँ मैं, जो आखरी खाने पर पहुँच वजीर बन जाता है।। राही (अंजाना)
जीत और हार के डर से आगे निकल आया हूँ, मैं राही अपने ही सपनों से आगे निकल आया हूँ।। राही (अंजाना)
कोई गवाह कोई सबूत नहीं मिलेगा तुम्हें, मोहब्बत ख्वाबों में जो जवान हुई है मेरी ।। राही (अंजाना)
वक्त की जंज़ीर भला मुझे बांधेगी कैसे, मैं तो पानी हूँ पत्थर भी चीरे हैं मैने।। राही (अंजाना)
ख़ामोशी की कीमत एक दिन मुझे समझ तब आई, जब वो मुझसे कहती गई न हुई मेरी सुनवाई।। राही (अंजाना)
अपने ही अपनों को काटने को बैठे हैं, यहां इसांन जानवर से भी बड़े दांत लिए बैठे हैं।। राही (अंजाना )
अँधेरे सभी मिटाने को अब दीपक स्वयं जलाने होंगे, मन के मैल मिटाने को अब प्रेम के रंग चढ़ाने होंगे।। राही (अंजाना)
पन्ने ज़िन्दगी की किताब में जोड़ने पड़ते हैं, अपने हिस्से के किस्से खुद ही लिखने पड़ते हैं, छोड़कर कई बार रास्तों को सफर में, हाथ किताबों से मिलाकर दोस्त छोड़ने पड़ते हैं।। राही (अंजाना)
मैं अपनी तमन्नाओं पर नकाब रखता हूँ। मैं करवटों में चाहत की किताब रखता हूँ। जब भी क़रीब होती हैं यादें ज़िन्दग़ी की- मैं दर्द तन्हाई का बेहिसाब रखता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
दीन दयाल प्रनत पालक दीन बंधू हे राम जन्मूँ या मरुँ परे तुम्ही से काम -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कारो कारो सांवरो कारी जाकी सूरत कारी कारी कंगी है काली दह से कीरत -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सावन की काली रातों में उमड़ घुमड़ जब दामिनी दमके पट खोलो अंतर् मन के -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
उमड़ घुमड़ कर छाये घटा देखो चहुँ ओर पंख फैलाय,नाचे वन में मोर ये मधुमास है प्यारा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
अम्बर बरसे धरती भींगे नाचे श्रष्टि सारी सावन की बरखा प्यारी -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
आधुनिकता की होड़ में पाश्यचात्य संस्कृति अपना रहे हम शौर्य वीर भारतबासी किस मोह में हैं बंध रहे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
इस धरा पर किसका हक़ है जो तू इसे उजाड़ रहा मत खेल इस माया से तू खुद का नसीब बिगाड़ रहा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
नारी नहीं जागीर किसी की मत इसका अपमान करो सम दृष्टि रख करके इसका सम्मान करो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तक़दीर ऐ जुल्म नहीं है हमको इल्म -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
बहार है तो फ़िज़ां है फ़िज़ां है तो बहार है हमको दोनों से ही प्यार है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कम्बख्त वक़्त ये नहीं कटता वक़्त का रुख हर वक़्त बदलता -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
आज हमारे रास्ते में बाधा हज़ार हैं हारो न हिम्मत जय बार बार है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
पास रहकर भी पास नहीं रहती, तेरी याद मुझसे कभी उदास नहीं रहती।। राही (अंजाना)
खेल खेलने को बहुत कुछ जुटाते हैं हम, कुछ न कुछ सोंच के कुछ तो बनाते हैं हम, जिंदगी के सागर में नसीब पानी नहीं हमें, तो मजबूर होके कचरे की नाव चलाते हैं हम।। […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.