किसी उम्र किसी रूप का, किसी रंग किसी ढंग का, किसी जाती किसी धर्म का, किसी भी कैसे भी वक्त का, ये कुर्सी है जो परहेज नहीं करती, राही (अंजाना)
किसी उम्र किसी रूप का, किसी रंग किसी ढंग का, किसी जाती किसी धर्म का, किसी भी कैसे भी वक्त का, ये कुर्सी है जो परहेज नहीं करती, राही (अंजाना)
kitabon ke panno main chipi thi teri yaad, jyada kuch nahin bas thi ek sougat, sukhe hue gulab ki pankhuri jis ki ab koi kimat nahin, ban sakti thi tere balon ka saaj achanak aye […]
तेरी बेवफाई का ज़रा इल्म भी हो जाता, तो राही तेरे प्यार में दीवाना न हो जाता।। राही (अंजाना)
तुम्हारा इस कदर चर्चा हुआ, के मेरा घर रहा महका हुआ। राही (अंजाना)
हार कर जीतने का हुनर सीख़ लिया, मैने लहरों से सारा समन्दर खींच लिया।। राही (अंजाना)
हर बात की हद होती है, ख़ामोशी बेहद होती है। राही (अंजाना)
yeh khuli diary yeh adh jala cigarette, yeh chai ke pyaley kya kahti hain, kal ki raat tumhey need nahin ayi ya kisi ki yaad satayi hain tumko umra ke kisi modh pe tumhey pata […]
मैं हार कर भी तेरी कहानी की तरह हूँ। मैं हार कर भी तेरी निशानी की तरह हूँ। मैं ठोकरें खाता रहा हूँ उम्र भर लेकिन- मैं जोशे-ज़िन्दग़ी में ज़वानी की तरह हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
गिल्ली डंडे के खेल पुराने हो गए, कंचे के काँच दिखे जमाने हो गए, भरे रहता था आसमाँ जिन पतँगों से कभी, अब ज़मी पर बच्चे भी निराले हो गए।। राही (अंजाना)
साँप सीढ़ी को छोड़कर साँप कहीं और जाने लगे, जबसे उँगलियों को लोग अपनी कीबोर्ड पर चलाने।। राही (अंजाना)
छोड़ कर बिसात को मोहरे समाज पर सजाने लगे हैं, लोग अपने ही लोगों पर देखो चाले लगाने लगे हैं।। राही (अंजाना)
एक माँ के लिए एक माँ को छोड़ देता, सैनिक जब सम्बन्ध सरहद से जोड़ लेता है।। राही (अंजाना)
आओ मिलकर कर्म करें, हम वेदों का मर्म सुनें और गीता का सार कहें रामायण का धर्म चलें -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
घोर अमावस की रैनो में, पूर्णिमा तुम बन जाना हर तिमिर को चीर कर, तुम रश्मियां बन जाना -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जागो,जगाओ,जगती पर,जाग्रति लाओ घट घट,वह बस रहा,समर्थन पाओ जाग्रति लाओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
संग चलते तुम ऐसे हमारे, ज्यों प्राण चले तन के सहारे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
हे वेद-पुत्र,हे देव-पुत्र सुचि संकल्प निराले हे वसुधा के प्यारे है विपदा भारी जहाँ बने अबिलम्ब सहारे बिगड़े काज बना दे सुचि संकल्प निराले -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जागो वीर जवानो, तुम कहाँ सोये हो जग की रंग रलियों में, तुम कहाँ खोये हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
है लक्ष्य हमारा, पूर्ण मिले आज़ादी व्यर्थ न जाये भारत के, वीरों की क़ुरबानी -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
अँधेरे में भी रौशनी का एहसास होता है, जिस पल तू मेरे आस-पास होता है।। राही (अंजाना)
आत्मविश्वास से पैदल चलने में दिक्कत नहीं होती, संदेह में दौड़ने की आदत नहीं हमें।। राही (अंजाना)
ज्ञान से शब्दों के उलझे जाले सुलझाने लगे, हुआ जब अनुभव तब अर्थ समझाने लगे।। राही (अंजाना)
पैदा कर मोहे माँ मेरी ने दुनियाँ देयी दिखाई, मैं मूरख मुझको माँ की न ममता समझि में आई, दूर सफर में चलत मोहे जब कछु न दिया दिखाई, तब बचपन की एक शाम अनोखी […]
पैदा कर मोहे माँ मेरी ने दुनियाँ देयी दिखाई, मैं मूरख मुझको माँ की न ममता समझि में आई, दूर सफर में चलत मोहे जब कछु न दिया दिखाई, तब बचपन की एक शाम अनोखी […]
छोड़ कर घरबार अपना, सीने पर गोली झेली बहा के अपने रक्त को, बचा ली मांगों की रोली खेल सकें हम सब होली, सीने पर झेली गोली -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
शिव की पूजा करते हो , शक्ति की करते हो हत्या समाज देश पर आती है, नित नयी विपदा मान रखो नारी का, नारी सम्मान करो मत मारो गर्भ में इसको, धरती पर कन्या आने […]
दुर्गा काली लक्ष्मी का, शिव ने भी सम्मान किया नतमस्तक होकर शिव ने, इनको ही प्रणाम किया शिव ने ही नारी को, शक्ति का है नाम दिया -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मानवता तुम खो चुके, बस पैसा दिखता है क्या लाया था तू इस जग, जिसके लिए तू रोता है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
चारो और है फैला, आखिर ये कसा मोह इंसान खुद को है मार रहा, लगी ये कैसी होड़ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कान्हा ओ कान्हा, मेरा भी माखन चुरा ले माखन चुरा के कान्हा प्यारे, चित भी मेरा चुरा ले जो हो मन में मेरे विकार, इनको भी तू चुरा ले -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
प्रेम की डोरी से,यशोदा की लोरी से बंध गए नन्द किशोर छल कीन्हे बड़े कान्हा,प्यारी मईया से, बहुत प्रेम है इनको, ग्वाल औ गैया से माखन चोरी से,ब्रज की होरी से बंध गए नन्द किशोर […]
ऊँचे ऊँचे पर्वत , पर्वत पर ये रास्ते किसने बनाये ये सब, और बनाये किसके वास्ते -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जल उठी क्रांति मशाल, क्रांति के तुम दूत बनो मातृ भूमि से प्यार है तो, भारत माँ के दूत बनो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
अर्पण तन मन धन कर दो, स्व मातृ भूमि के लिए रहे वर्चश्व स्व का सदा, ना हो बंधन,मुक्ति के लिए -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
काल कलवित काल में, मशाल जो जलाएगा वन्दन अभिनन्दन है उसका, वह वीर कहलायगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
श्वेत माँ का आँचल है, दाग नहीं लगने देना निर्दोषों का रक्त,बहे का कभी भारत का मान सदा रखना -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
पर्वत से भाल, नदियों की चाल ये तरु विशाल, मन मेरे बसे हैं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मेरा देश प्रेम,मन है बेचैन कब शांति सन्देश मिलेंगे माटी से प्रेम, इसकी सुगंध में रमे हैं होऊं निहाल, जब भारत दर्श किये हैं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
क्या कभी विजय नहीं देखी, जो इतना घबराते हो जिसमे कवि का गुण नहीं, और कवि कहलाते हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
न छेड़ना ऐ अरि तू नहीं तेरी खेर नहीं, मैं हूँ शांत चित्त, तुझसे मेरा बैर नहीं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जग मैं आया क्या करने, ऐ भी मानव भूल गया स्वार्थ हेतु,पथ भ्रष्ट हो, कितना स्तर गिर गया जग मैं आया क्या करने, ऐ भी मानव भूल गया -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
साहित्य सृजन इक, विश्व प्रेरणा होती है मिले प्रेरणा हर शब्द से, वो कविता ही माला होती है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
अकारण ही मनुज, क्यों मनुज से जलता है विजय पाने की होड़ मैं, विचारों से गिरता है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मैं तूफाँ नहीं, क्यों मुझसे डरते हो ईर्ष्या मैं क्यों, जल जल कर मरते हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
चल कहीं नदिया किनारे, प्रिय नयन,सुन्दर चितवन नैनों में दमके,तेरे काजल है मेरा मन ऐ पागल जब बजती तेरी पायल झूमे जहाँ बस चाँद तारे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
चन्दन का वन हो, प्यारा मधुबन हो विष धार ,न विषम हों श्रष्टि में सम हों चन्दन सा वन हो प्यारा मधुबन हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ आवाज़ दो ,संग संग आ जाऊँ लहर लहर आभास तेरा कश्ती दो तो पार हो जाऊँ तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कहाँ चला अलबेला मन तू, बेस जिया में,पिया हमारे इन प्रिय को,जग में न खोजो, बसी नयन सुरतिया प्यारी कहाँ चला अलबेला मन तू -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
त्रिकोण से हैं रास्ते जिस रास्ते तू जायगा, फलित होंगे कर्म वैसे जिस रास्ते तू जायगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
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