जब से तेरे प्यार के मौसम की चपेट में आया है, राही पर किसी मौसम का कोई असर नहीं होता।। राही (अंजाना)
जब से तेरे प्यार के मौसम की चपेट में आया है, राही पर किसी मौसम का कोई असर नहीं होता।। राही (अंजाना)
अच्छा बनने के लिए अच्छे लिबास पहन लूँ, ये कौन सा पैमाना है मेरी पहचान का। राही (अंजाना)
लौट कर आते ही नहीं जाने वाले इस डर से, लोगों को रुखसत करना ही छोड़ दिया मैने।। राही (अंजाना)
इस दुनिया में मकान बनाना तो बहुत आसान है लेकिन मकान को घर बनाना उतना ही मुश्किल ।।
जब भी कुछ माँगता हूँ तो हर बार तू मुझको देता है कभी न करता उदास तू मुझको झोली तू मेरी हर वक़्त भरता है कैसे करूँ मैं शुक्रिया अदा तेरा ये दिल हर वक़्त […]
हर किसी को एक ही तराजू में न तोल तू बन्दे ईश्वर ने हर एक को कुछ न कुछ अलग दिया है।।
ज़िन्दगी एक अनसुलझी पहेली सी नज़र आती है, कभी किसी कि सगी तो कभी सौतेली सी नज़र आती है, रूठना रूठ कर मान जान जाना इंसानों की फितरत होगी, पर ज़िन्दगी गर रूठ जाए तो […]
ये जो दुनिया छोड़ के चले जाते हैं पहले से कुछ भी न बताते हैं जाने कहाँ और कैसे रहते हैं कुछ भी खबर न हमको बताते हैं कैसा है नया आशियाना उनका सब के […]
ए हर वक़्त व्यस्त रहने वाले दोस्त कुछ वक़्त हमारे लिए भी निकाल फिर न कहना कि तुम क्यों रुसवा हो गए अभी हमने कुछ भी न कर पाई बात।।
ऐसा तपा के सुन्न किया है तेरी तड़प ने कि अब नहीं लगती मुझे गर्मी-सर्दी
ऊपर से टपक रही है छत नीचे सीलन आ गई दीवारों में दाम किसी काम के मिलते नहीं चाहे हम खुद भी बिक जाएँ बाज़ारों में।
व्यवहारिक” शब्द सुनते ही मीठा सा भान होता है व्यवहारिक इंसान का समाज में बड़ा मान होता है इन्हें सामाजिक परम्पराओं का खासा ज्ञान होता है ऐसे इंसान को अपने मान पर बड़ा गुमान होता […]
जब– जब जाता तेरे मोहल्ले मे , तेरी वो अवाज की गुँज उठ जाता मेरे शीने मे।
इस तरह तेरे भवर मे मंडरा रहा हूँ, लग रहा की तेरी पायल की झन्यकार मेरे आगे– आगे मंडरा रहा हो
हर चीज की सही कीमत चुकाने की औकाद रखता हूँ , लेकिन तेरी सही कीमत कोई लगाये तो।
इस मतलबी दुनिया मे सभी दौलत कमाते फिरते अगर इस दुनिया से मिला मुझे मजदुरी की रूप शिर्फ छाले।
आसमान देखते ही सिहर जाता, जब गुनहगारे पंछी को खुले आसमान मे फिरते देखता।
आसमान देखते ही सिहर जाता, जब गुनहगारे पंछी को खुले आसमान मे फिरते देखता।
ये सतरंज की दुनिया भी क्या गजब है, दो –डाई घर चलने वाले राजा और रानी कह लाते।
मै अपना कीमत नही जानता, तु अपना बता दे, अगर मै नही चुका पाया, तो मुझे गिरवी रख ले लेकिन !मेरे प्यार को लौटा दे
बहुत देर से खड़ा हूँ तेरे पर , कोई है तो सुनो— कह दो उन्हे जाकर जख्म पर पट्टी बधवाने आया हूँ तेरे दर पर
आसमान देखते ही सिहर जाता है, गुनहेगार पंछी को जब खुले आसमान मे देखता हूँ।
खुशियों की दुकाने भरने की खातिर, दर्द की तस्वीरें खरीदी जाती हैं, खुद की तारीफों के पन्ने भरने को, क्यों सरेआम न्यूज़ बटोरी जाती हैं।। राही (अंजाना)
ओस की बूंदों सी वो मुझको नज़र आती है, जब छूने चलों उसको तो वो झट से छटक जाती है, पेड़ पौधों पर हक ऐ प्यार जताती है मगर, मेरी मौजूदगी सी भी जैसे दुश्मनी […]
हर एक काम में हुनर अपना दिखाती है, हर मुश्किल से जैसे लड़ना सिखाती है, जल्द ही गिरकर उठते नहीं हम लोग, वो हर बार बढ़कर हौंसला बढ़ाती है, खुली आँखों जिसे ठोकर मारते हैं […]
वो मेरे घर में मेरे साथ नहीं रहती, वो मेरी होकर भी मेरे पास नहीं रहती, वो है मगर दूर मुझसे रहती है, वो दिल है तो धड़कन मेरी साथ नहीं रहती।। राही (अंजाना)
जख्म हो तो मरहम लगाना ही पड़ता है, दिल में कुछ तो छुपाना ही पड़ता है, बोल दो हर बात ज़ुबा से जरुरी तो नहीं, कभी खामोश भी तो हमें ही हो जाना पड़ता है।। […]
दिल लेकर भी जब मेरा चैन नहीं आया उन्हें, उन्होंने मेरे ख्वाबों को भी अपने नाम कर लिया।। राही (अंजाना)
मोहब्बत ऐ इम्तेहान की इंतहा तो तब हुई, जब दिन में भी उसके ख्वाबों से बाहर न आ सके हम।। राही (अंजाना)
मुझे कुछ भी कहने की ज़हमत नहीं होती, वो खुद ब खुद मेरी आँखों से छलक जाती है।। राही (अंजाना)
मेरी ये हालत को देखकर सब दिवाने कहते, मेरी नजरो से पुछ तेरे ही आँख से मिली थी मेरी आँख , इसलिए मै तेरा दिवानगी करते फिरते। Jp Singh
मत हँस जवाने मेरी हालत पर, मैने भी दो हाथ ,दो पैर साथ लाया।
क्या कहूँ इस जवाने से मै, मेरी इस दशा को देखकर जब अपने ने छोड़ दिये, तो क्या कहूँ परवाने से !जवाने से। Jp singh
किससे सिकवा करू, किस से गिला करू, जब अपना ही नही समझा तो किससे कुछ बात करू। Jp singh
मत पुछ भबड़ मुझे से तेरी क़्या हालत है, जैसे तुने बनाई वही तो मेरी हालत है। Jp singh
जब-जब तु पास आती क्यो शरमाती हो, मैने तो तुम्हारी बड़ी–बड़ी आँखो से प्यार किया क्यो शरम के मारे हाथ से आँख ढ़क लेती हो
ह्रदय में है यदि ,संकल्प शक्ति तो तुझे कोई रोक नहीं सकता लक्ष्य पाने के लिए तो गिर गिर कर है ,उठना पड़ता -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
क्यों बुझे हैं ,द्वीप ह्रदय के तुझे जग आलोकित ,है करना नव उमंग उत्साह लिए, प्रति पल बाधा से है लड़ना -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जिस दिशा में दृष्टि जाती, दिखता तम ही तम है दूर करदे शीघ्रता से, तेरे उर में जो अहम है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
न डरना तुम काली रातों में, न आना माया मोह की बातों में फास न जाना झूठे, रिश्ते नातों में -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सदियों से छाए अंधकार को, दूर भगाओ मानव तुम ,अंतर् तम के, द्वीप जलाओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
ऐ दुनिया वालों, तुम्हे हम मान गये हैं ठोकरें खा क्र तुम्हे, पहचान गए हैं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मेरे तिमिरमय जीवन में , अलोक बन के आओगे आओ तुम ,में एक मरुपथ हूँ, घनघोर घटा बन छाओगे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
नवल सृजन हो,नवल सृष्टि हो उर अंतर में,नवल बृष्टि हो नवल दिशा हो नवल दृष्टि हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
अभी हस रही थी , कितनी द्वीप मालाएं अभी रो उठी, बुझ गयीं आशाएं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
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