अभी साथ थे देखो, प्राण प्यारे साथी अभी अभी जाली एक नवल बाती कहीं रुदन है ,कहीं हास् है समय बड़ा घाती -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
अभी साथ थे देखो, प्राण प्यारे साथी अभी अभी जाली एक नवल बाती कहीं रुदन है ,कहीं हास् है समय बड़ा घाती -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
है कैसी अंतर पुल कन, जिससे में पुलकित हूँ है घनघोर पतझड़, फिर भी में सुरभित हूँ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
है अकेला हर पथिक, अपने पथ को पाना होगा घोर अँधेरा छा रहा है , तम निशा से लड़ना होगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सांझ दिवस और रैन में, बीएस तुमको ही पुकारा है सृष्टि के कण कण में, तुमको ही पुकारा है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
आज ये मन मेरे , मीत अपना ढूंढ ले खींच ले जो मीत को, मीत ऐसा ढूंढ ले -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
पास मेरे आते हो, क्यों बार बार पुछा मैंने जब तूफ़ान से, तूफान बोलै ,तुम्ही हज़ारों में मिले इंसान से -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मिल जाये कहीं , मुझे पूछना है भगवान से तुमने चुने क्यों रास्ते, मेरे लिए वीरान से -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
पौधा लगाया मैंने , सोचा बृक्ष बन छाया देगा बृक्ष बन गया जब, गिरा दिया,मिटा दिया मुझे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कोई उस दर का नाम बता दे, जहाँ जाने पर मन्नत पुरा होता। मै भी जाना चाहता, क्योकि मै अकेला रहता। मै भी अपना जोड़ी चाहता
मेरी जवानी, मेरी पहचान !मेरा अपना नही है, जिसने इस काबिल मुझे बनाई वो दुनिया मे नही है।
ये जालिम मै अपने दिल के टुकड़े को पहाड़ लूँगा, लेकिन सुन ले इसके बाद तुम्हारा क्या होगा।
कितने सोलह सोमवार किए…. इस ‘सावन’ में तो “पिया” मिले !
खेल खेलने बैठा तो खिलाड़ी न मिला, एक बन्दर को उसका मदारी न मिला, ज़िन्दगी की बिसात में हम कुछ फंसे ऐसे, कि हमारी चालोन को कोई जबाबी न मिला।। राही (अंजाना)
खेल खेलने बैठा तो खिलाड़ी न मिला, एक बन्दर को उसका मदारी न मिला, ज़िन्दगी की बिसात में हम कुछ फंसे ऐसे, कि हमारी चालो को कोई जबाबी न मिला।। राही (अंजाना)
भवर मैं था ,सोचा न था तूफ़ान भी आएगा गिरिफ्त मैं ले मुझे अपरिचित दिशा पहुँचाएगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
दौड़ते परायी है जो अपनी मंजिल छोड़ कर कठिन है रास्ता कदम रखना सोच कर साथ न कोई आएगा अकेले तुझे जाना है जग मेरी मंजिल नहीं कुछ पल का ठिकाना है रास्ता पहचान लो […]
उजाला पाने की छह मैं में, चलता रहा चलता रहा पर अँधेरा बस अँधेरा रह मैं मिलता गया -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
भवर मैं पहुंचा तो, सोचा मुझे आएगा कोई बचाने किनारे पर भीड़ थी लाखों की, कुछ चेहरे कुछ जाने अनजाने देखती रही दुनिया मुझको न आया कोई बचाने -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
ऐ वक़्त तू कितने रंग बदले, बह रही हो सृजन धार क्यों प्रलय बन निकले तू कितने रंग बदले -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
बरखा जरा प्यार बरसा दे कब से प्यासा अंतर है तू प्यास बुझा दे बरखा जरा प्यार बरसा दे बरस बरस बरखा मेरी कितने तुमको बरस गए सिंधु की एक बूँद को हम कबसे तरस […]
मैं गा रहा हूं, तुम स्वर मैं स्वर मिलाओ मैं जा रहा हूँ , तुम संग संग आजाओ जाऊंगा न छोड़ कर, गाऊंगा न बिन तेरे मैं भवर मैं, तुम पतवार बनके आओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा […]
संसार मैं रहना है, संसार मैं जीना है मिलती हैं कुछ खुशियां, कुछ गम भी पीना है कभी होंठों पर मुस्कान कभी आंसू पीना है संसार मैं रहना है संसान मैं जीना है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा […]
मैं गीत क्या रचूंगी, तुम प्रेरणा न बनते मेरे निष्ठुर उर मैं, वन वेदना न उठते मैं गीत क्या रचूंगी तुम प्रेरणा न बनते -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
खामोश न रहो , नज़रों को न झुकाओ पीछे न तुम देखो, आगे कदम बढ़ाओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मै शिर्फ बेरोजगार हूँ,, बेकार नही यारो, अगर मै मर भी जाऊँगा, मेरा कीमत कम नही होगा यारो। Jp singh
ये मेरी ख्वाब अपना नही हो पाया, क्योकि रिश्ते दौलत की तलवार ,हवा की रूख बनाती है।
इस शहर मे मेरा कोई नही अपना है, शिर्फ मेरी तन्हाई ,मेरी चिल्लाहट की घुँज मेरी बेचैनी—- मेरा अपना है Jp singh
अगर पैसा से सब कुछ खरीदा जाता , तो !मेरे पास मेरी ख्याबो की रानी रहती। Jp singh
मेरी बेचैनी का कोई दवा बता दे, या उस शहर का नाम बता दे।
मै बीमार हूँ बर्षो से, इसकी दवा मेरे शहरो मे नही मिलती, अगर मिलती भी है उसकी शायद खिड़की बंद पडी मिलती
इस शहर मे सभी अजनबी है, लेकिन जिस शहर मे मेै आया हूँ, इस शहर के लिए मै ही अजनबी है ।
हरेक के समाने अपने हारे हुए जख्म की कहानी मत कहो, ये फौलाद की वस्ती है ,अपनी कायरता की कहानी मत कहो । JP singh
करोड़ो की मकान है मेरे पास लाखो की कमाई , ना मेरे घर मे माँ है, ना किसी की परछाई. ज्योति मो–9123155481
हर चीज की सही कीमत चुकाने का औकाद है मुझमे, लेकिन उसकी सही कीमत कोई लगाये तो। ज्योति मो–9123155481
मै जिस शहर मे यहाँ किराये पर मकान मिलती, पैसे से पानी मिलती,दुध मिलती? लेकिन जिस की खोज मे हुँ वो शायद नही किराये पर मिलती नही पैसे पर मिलती! ज्योति मो–9123155481
तेरे जाने से इस तरह मेरे जिन्दगी मे विऱान आ गई, जिस तरह गघा को पैर छानकर कोई परती जमीन मे छोड़ दी जाती।
ये आँखे हर पल तेरा इंतजार करती, मेरे जेहनो दिमाग मे हर पल तेरे इनकार का जबाब गुँजती रहती
घड़ी की मरम्मत तो करा लूं मगर, अपने समय को ठीक कराऊँ कैसे।। राही (अंजाना)
अभी तेरी आरज़ू का ग़ुबार है दिल में। अभी तेरी यादों का संसार है दिल में। ख़ौफ भी रुसवाई का मौजूद है लेकिन- अभी तेरे ख़्यालों का बाज़ार है दिल में। मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
छोटी छोटी बातों से ही बन्धन से बन्ध जाते हैं, हम अपनों से भी जादा अक्सर दूजों से जुड़ जाते हैं, कुछ कहना हो तो खुलकर हम अपने मन की कह जाते हैं, कुछ रिश्तों […]
यादों की पोटली तेरी खोल के न देखूंगा, आँखों की कोठरी मैं खोल के न देखूंगा, तू जब समझी नहीं मेरी ज़ुबानी ये कहानी, तो अब खामोशी के एहसासों की कोई टोकरी न देखूंगा।। राही […]
मेरे जेहनो दिमाग पर ,, हर पल कुछ तेरे याद पहरा सा है। देख ले आकर जालिम,, मेरे गाँव मे आशुफ्ताम व्यस्थित इंतजार आँसु तुम्हारे नाम का है।। ज्योति मो–9123155481
khamosh bheed main kyun khada hain tu, begano main apna sa kyun lagey hain tu, es raat ki kyun koi subah nahin, gam hain ki khatam honey ka naam nahin apney ap se yeh kaisi […]
जात-पात के बन्धन में एक पुतला बनकर इतराता है, क्यों छोटी छोटी बातों पर ही तू अपनों को ठुकराता है, एक माँ की सन्तान है पर क्यों अलग-थलग मंडराता है, अपने ही घर में तू […]
छोड़कर घर अपना , सीने पर झेली गोली बहा अपने लहू को , ली बचा मांगों की रोली -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
माँ न होती, तो यह श्रष्टि न होती पृथ्वी है माँ, प्राण है माँ उचित अनुचित की , द्रष्टि है माँ -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
घर न जो बना सके, वो क्या बनायंगे देश को कर्त्तव्य मर्यादा न जाने, क्या चालयंगे देश को -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
मानव जीवन का ,सार है गीता हम हैं अर्जुन ,कृष्ण है गीता कर्म का सार है यह गीता हम हों भ्रमित, तो सारथी गीता -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
कर्म भूमी है हमारी मर्म भूमी है हमारी बार बार प्रभु आते जहाँ पे देव भूमी है ये हमारी मातृ भूमी है हमारी भारत माँ ये है हमारी -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-
हुनर तुम्हारे तुम पर ही आजमाए गए, तुम जुल्मी बस हमारे ही कहाये गए।। Rahi
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