खेल खेलने बैठा तो खिलाड़ी न मिला, एक बन्दर को उसका मदारी न मिला, ज़िन्दगी की बिसात में हम कुछ फंसे ऐसे, कि हमारी चालो को कोई जबाबी न मिला।। राही (अंजाना)

दौड़ते परायी है जो अपनी मंजिल छोड़ कर कठिन है रास्ता कदम रखना सोच कर साथ न कोई आएगा अकेले तुझे जाना है जग मेरी मंजिल नहीं कुछ पल का ठिकाना है रास्ता पहचान लो […]

भवर मैं पहुंचा तो, सोचा मुझे आएगा कोई बचाने किनारे पर भीड़ थी लाखों की, कुछ चेहरे कुछ जाने अनजाने देखती रही दुनिया मुझको न आया कोई बचाने -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

बरखा जरा प्यार बरसा दे कब से प्यासा अंतर है तू प्यास बुझा दे बरखा जरा प्यार बरसा दे बरस बरस बरखा मेरी कितने तुमको बरस गए सिंधु की एक बूँद को हम कबसे तरस […]

मैं गा रहा हूं, तुम स्वर मैं स्वर मिलाओ मैं जा रहा हूँ , तुम संग संग आजाओ जाऊंगा न छोड़ कर, गाऊंगा न बिन तेरे मैं भवर मैं, तुम पतवार बनके आओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा […]

संसार मैं रहना है, संसार मैं जीना है मिलती हैं कुछ खुशियां, कुछ गम भी पीना है कभी होंठों पर मुस्कान कभी आंसू पीना है संसार मैं रहना है संसान मैं जीना है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा […]

मैं गीत क्या रचूंगी, तुम प्रेरणा न बनते मेरे निष्ठुर उर मैं, वन वेदना न उठते मैं गीत क्या रचूंगी तुम प्रेरणा न बनते -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

मै जिस शहर मे यहाँ किराये पर मकान मिलती, पैसे से पानी मिलती,दुध मिलती? लेकिन जिस की खोज मे हुँ वो शायद नही किराये पर मिलती नही पैसे पर मिलती! ज्योति मो–9123155481

अभी तेरी आरज़ू का ग़ुबार है दिल में। अभी तेरी यादों का संसार है दिल में। ख़ौफ भी रुसवाई का मौजूद है लेकिन- अभी तेरे ख़्यालों का बाज़ार है दिल में। मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

छोटी छोटी बातों से ही बन्धन से बन्ध जाते हैं, हम अपनों से भी जादा अक्सर दूजों से जुड़ जाते हैं, कुछ कहना हो तो खुलकर हम अपने मन की कह जाते हैं, कुछ रिश्तों […]

यादों की पोटली तेरी खोल के न देखूंगा, आँखों की कोठरी मैं खोल के न देखूंगा, तू जब समझी नहीं मेरी ज़ुबानी ये कहानी, तो अब खामोशी के एहसासों की कोई टोकरी न देखूंगा।। राही […]

मेरे जेहनो दिमाग पर ,, हर पल कुछ तेरे याद पहरा सा है। देख ले आकर जालिम,, मेरे गाँव मे आशुफ्ताम व्यस्थित इंतजार आँसु तुम्हारे नाम का है।। ज्योति मो–9123155481

जात-पात के बन्धन में एक पुतला बनकर इतराता है, क्यों छोटी छोटी बातों पर ही तू अपनों को ठुकराता है, एक माँ की सन्तान है पर क्यों अलग-थलग मंडराता है, अपने ही घर में तू […]

मानव जीवन का ,सार है गीता हम हैं अर्जुन ,कृष्ण है गीता कर्म का सार है यह गीता हम हों भ्रमित, तो सारथी गीता -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-

कर्म भूमी है हमारी मर्म भूमी है हमारी बार बार प्रभु आते जहाँ पे देव भूमी है ये हमारी मातृ भूमी है हमारी भारत माँ ये है हमारी -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-