वो बचपन वाला मैदान आज भी मेरे इंतज़ार में मुझसे मिलने को तरस रहा है, अब तो बादल भी गुस्से में है मेरे यार मेरे न होने पे वो सिर्फ गरज रहा है, सिर्फ गरज […]
वो बचपन वाला मैदान आज भी मेरे इंतज़ार में मुझसे मिलने को तरस रहा है, अब तो बादल भी गुस्से में है मेरे यार मेरे न होने पे वो सिर्फ गरज रहा है, सिर्फ गरज […]
बहुत कुछ सपना सजाया था !मैनै, लेकिन जिसके लिए सजाया, वो पराये का मेहदी हाथो मे सजाये थे।।
कुछ तो जरूर होगा उन प्यारी सी आँखों में, सपने तो उसके भी होंगे उड़ने के आसमानों में। सहमी तो वो भी रहती होगी उस अनजानी भीड़ में, घर से दूर उस बिन पहचानी सी […]
जब रात स्वप्न में मैं सोया था, एक गहरे समन्दर में खोया था, दूर दूर तक सच कुछ नहीं था, मैं एक झूठी दुनियाँ में रोया था, राही (अंजाना)
रात रात भर जाग कर आगे बढ़ने की होड़ चल कपट से जो जीता ये तेरी जीत नहीं संभल जा ऐ बंदे जीत के भी तेरी हार हुई -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
परिणाम न देख मनुज कर्म कर बस कर्म कर -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
राग द्वेष अरु पाखंड कारण विनाश के प्रचंड -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मानव मानवता सीखो मत होड़ करो तुम बढ़ने की मत काव्य का अपमान करो देश हित काव्य सृजन करो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
स्पर्धा नहीं कोई , ऐ साहित्य सर्जन है दुरूपयोग न करेंगे ये आत्म सर्जन है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जल ही जीवन है , बूँद बूँद बचाओ जल को न व्यर्थ बहाओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
क्या करूँ क्या न करूँ उथल पुथल सी होती है मन में हर दम एक गति सी होती है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
काश मैं होती तितली रानी सबके मन को भाया करती रंग बिरंगे पंखों से मैं बच्चों को भी खूब लुभाती दुनिया भर में घूमा करती न कोई बंधन में मैं बंधती खुले गगन की सैर […]
जागो मनुज जागो , जनहित में कल्याण करो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कण कण वास तेरा मन है निवास तेरा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
प्रारम्भ है तो अंत है , सफल छन तो जीवंत है तू विजयी अरिहंत है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
क्या लक्ष्य है नहीं , बढ़ोगे कैसे ,चढ़ोगे कैसे गिर गिर कर फिर उठोगे कैसे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जाति पाती का भेद नहीं , बस सम दृष्टि हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
वृक्ष से सीखो फल देना,छाया देना मोल न लेना ,अडिग रहना -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
विषमय जीवन में , जीत के जो हारा है हारा फिर जीता है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तू कहाँ में यहाँ चल वहां ,सुख जहाँ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मनोदशा,चुन दिशा भागे निशा ,मिले उषा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
क्या कारण, क्यों अकारण मनुज मनुज से चिढ़ता -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
हे वसुधा के, प्राण प्यारों स्वच्छ रखना इस धरा को स्वच्छ भारत हम बनाएं जन जन को यह समझाएं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सुन्दर वन उपवन भारत में हमने यहाँ जन्म लिया प्रभु ने हमको धन्य किया -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
ऐ पृथ्वी ,ऐ धरा सुचि वसुंधरा है मात मेरी ,है मात तेरी -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
हे सुमन तुम कितने सुन्दर , सुरभित करते तन और मन -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कांटे हैं जहाँ, चुभने दो फिर पुष्प ही तो मिलना है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मौका तो दो एक बार खुद को सही साबित करने का क्यों दूसरों से सुनी बातों पर विश्वास कर बैठते हो।।
आतंकी जवानों को रोज गोली मार रहे हैं जनता द्वारा चुने नेता देश को खा रहे हैं ढोंगी बिना वजह ही, मुद्दे खड़े कर रहे हैं स्वार्थ सिद्धि को खुदा को रिश्वत दे रहे हैं […]
काश मेरे सपनों को हकीकत की शक्ल मिल जाये बिन पंखों के आसमान छूने का हौसला मिल जाये यूँ तो खोये रहते हैं दिन भर खवाबों में ही शायद फिर कुछ हकीकत में जीना सीख […]
उसका मुख देखना जारी रहा, मेरा प्यार उस पर भारी रहा। राही (अंजाना)
गमों के आसमान का तू परिंदा क्यों है, झूठी उम्मीदों की ज़मी पर तू ज़िंदा क्यों है, सिकोडे हैं हौंसलों के तू क्यों पर अपनें, उम्मीदों पर न टिके तू वो वाशिंदा क्यों है।। राही […]
उस पल को तो आना ही था, तुझको विदा हो जाना ही था, ये रीती रिवाजों की ज़ंज़ीर थी, जिसमे तुझे बन्ध जाना ही था, बेटी रही तू मेरी जान से प्यारी, तुझको बहु बन […]
अपने ग़म और खुशियों के बीच दूरी रखता हूँ, मैं राही अंजाना मगर सबकी ख़बर रखता हूँ।। राही (अंजाना)
तैरने निकला था समन्दर ने मुझको सहसा डरा दिया, फिर लहरों ने ही कश्ती को मेरी साहिल दिला दिया।। राही (अंजाना)
आओ किताबों के पन्नों से बाहर निकल चलते हैं, काले अक्षरों से निकल रौशनी की ओर चलते हैं, बहुत पढ़ लिए विषय इन किताबों के, आओ हकीकत के दो पन्ने पलट कर देखते हैं।। राही […]
जुवाएँ पर बदजुबानी पर बात लिये फिरते,, जो खुद गिरा — वो मुझे क्या गिराने की बात करते।।
अगर हुई गलती मुझे माँफ करो, हर गलती मेरी शर्मनाक है, या तुम मार गिरावो या माँफ करो। गलती किया इसलिए माँफी माँग रहा, अगर लगता गलती– गलती का अनुमोदन है तो इसे भी स्वीकार […]
ईश्वर ने भी अंक सात को बड़ा ही शुभ बनाया है सात दिनों में इस जगत का सुन्दर निर्माण कराया है संग सात फेरों के लेकर रिश्ते वचन निभाते हैं सात दिनों के एक सप्ताह […]
ये मेरे आइने को भी आजकल न जाने क्या हो गया है मेरी छवि को छोड़ कर आपकी छवि दिखाने लगा है।।
क्यों जन्म लेने से पहले ही, मार देते हो मुझको क्या मुझको हक़ नही, इस दुनिया में जीने का भूल गए हो तुम, ज़रा अपनी आँखों को खोलो गौर से देखो तुम्हें भी किसी औरत […]
काश हम खुशियों के पल को यूँ ही रोक पाते गमों की एक भी परछाईं को आप को न छूने दे पाते।।
मेरी खुशियों और गमों का भी हिसाब रखते हैं, न जाने क्यों लोग मुझसे इतना प्यार करते हैं।। राही (अंजाना)
हक मेरे भगवान पर सारे बाशिंदों का है, किसी एक के घर का वो पहरेदार नहीं।। राही (अंजाना)
अब घर में बिजली का मेरे बिल नहीं आता, तेरे प्यार की रौशनी में हर कोना घूम लेता हूँ।। राही (अंजाना)
सारे आईने अपने घर से बाहर निकाल फैंके, तुम्हारी आँखों में ही जब चेहरा अपना देख लिया।। राही (अनजाना)
अच्छा बनने के लिए जरूरी नही कि मै अच्छे कपडे पहनूँ मै जानती हूँ कि मेरा दिल सच्चा है मुझे दिखावे की कोई जरूरत नही तुमको अगर जानना है मुझको तो मेरी अच्छाइयों से जान […]
बनाकर कठपुतलियों को अपने इशारों पर नचाते हैं धागों से चारों तरफ फिर उनको बाँधते हैं बेजान सी होकर भी सबके मन को लुभाती है अपने मनभावन नृत्य से वो पैसे कमाती है।।
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