हम तेरी याद में रो भी लेते हैं। हम तन्हा गमज़दा हो भी लेते हैं। जब रंग सताता है तेरे हुस्न का- हम खुद को नशे में खो भी लेते हैं। रचनाकार- #मिथिलेश_राय

तुम जहां भी रहोगी निहारा करूँगा, तुम्हे ख्वाबों में अपने पुकारा करूँगा, दिखेंगी नहीं जब मुझे आँखे तुम्हारी, तुम्हें आईने में अपने उतारा करूँगा।। राही (अंजाना)

कभी कभी वक़्त ऐसा आता है कि हम उसको जाने नही देना चाहते और कभी ऐसा वक़्त भी आता है जिसको हम आने नही देना चाहते लेकिन वक़्त तो वक़्त है समय के साथ ही […]

नदी के दो किनारों पर मेरी नज़र टिकी थी, एक छोर पे मैं और दूजे छोर वो खड़ी थी, समन्दर था लहरें थीं कश्ती थी सामने, इन सब के मध्य भी मेरी मोहब्बत डटी थी।। […]

जितना पास बुलाया वो उतना दूर होता गया, रात का अन्धेरा रौशनी में चूर होता गया, खुदा की बनाई इस मशहूर दुनियाँ में, इंसा खुद इंसा के हाथों ही मजबूर होता गया।। राही (अंजाना)

मै आज भी वही हूँ, जैसा तुमको पसंद है। लेकिन हम वैसा भी नही, जैसा तुम्हारे पिता का पंसद है। तुम मेरी पहली प्यार थी, लेकिन मै क्या करू रिस्ते और नाते दौलत के तलवार […]

तेरी यादों के आँगन में मेरा मन खिल जाये, जैसे खुली हवा में कोई पंछी मण्डराये, तेरी समृति की छवियों का जब लगे मेला, मेरा शांत उम्मीदों का फिर मन भर जाए।। राही (अंजाना)

टूटकर बिखर जाने को तैयार रहती है, गर कच्ची हो चिनाई तो दीवारों में दरार रहती है, इस ज़मी पर आकर मुम्किन है मोहब्बत की गिरफ्त में आना, नहीं तो सारी ज़िन्दगी यूँही ख़ाकसार रहती […]

जब जी चाहे बुला लेता हूँ, मैं तेरी यादों को अपना बना लेता हूँ, पहुंचता नहीं जब कोई पैगाम मेरा तुझतक, मैं हवाओं को फिर अपना गुलाम बना लेता हूँ।। राही (अंजाना)

किस्मत को अपनी तू कस मत, देदे ढील तू अपने अरमानों को, सोते हैं तो सो जाएँ किस्मत जगाने वाले, जागने दे तू हर घड़ी अपने ख़्वाबों को, किस्मत को अपनी… बदलती नहीं है हाथों […]

आओ किताबों के पन्नों से बाहर निकल चलते हैं, काले अक्षरों से निकल रौशनी की ओर चलते हैं, बहुत पढ़ लिए विषय इन किताबों के, आओ हकीकत के दो पन्ने पलट कर देखते हैं।। राही […]

गमों के आसमान का तू परिंदा क्यों है, झूठी उम्मीदों की ज़मी पर तू ज़िंदा क्यों है, सिकोडे हैं हौंसलों के तू क्यों पर अपनें, उम्मीदों पर न टिके तू वो वाशिंदा क्यों है।। राही […]

वो बचपन वाला मैदान आज भी मेरे इंतज़ार में मुझसे मिलने को तरस रहा है, अब तो बादल भी गुस्से में है मेरे यार मेरे न होने पे वो सिर्फ गरज रहा है, सिर्फ गरज […]

कुछ तो जरूर होगा उन प्यारी सी आँखों में, सपने तो उसके भी होंगे उड़ने के आसमानों में। सहमी तो वो भी रहती होगी उस अनजानी भीड़ में, घर से दूर उस बिन पहचानी सी […]

काश मैं होती तितली रानी सबके मन को भाया करती रंग बिरंगे पंखों से मैं बच्चों को भी खूब लुभाती दुनिया भर में घूमा करती न कोई बंधन में मैं बंधती खुले गगन की सैर […]