सूनी डगर पंछी उड़ते सूना सा सफर
सूनी डगर पंछी उड़ते सूना सा सफर
कोई ख्वाब कही से डूबता आफताब
रेत का घरोंदा वक़्त ने बनाया वक़्त ने रौंदा
बिलखते मन तपते तन सुलगते जीवन
एक प्रश्नचिन्ह जीवन मौत प्रश्नचिन्ह चिंतन किस का ?
रहबर वो मेरे थे मगर मंज़िल से मगर अंजान थे
लो फिर तस्सलिओं का मौसम है अपने लिबास को बदल डालो
कोई साया भी न लिपटा ऐसे जैसे लिपटी तेरी तन्हाई
तेरे गम की क्या उम्र रही दुआओं ने उम्र बख्शी हो जैसे
जुर्म करने की आदत कुछ ऐसी थी खुद की सजा पर किताब लिख रख दी
कारवां से हुआ जब इश्क़ मंज़िलें नापाक लगी
तेरे सज़दे किये कुछ ऐसे हर ज़ुल्म का इक़बाल किया
लम्हे टूटे बिखरे से जोड़ती मगर ज़िंदगी को
कोई ऐसा चारागर होता जो कहने को सहर होता
चुप सी बंधी ख़ामोशी राज़ छुपाएँ चीखों के
तुम नहीं हो पास मगर तन्हाँ रात वही है! वही है चाहत यादों की बरसात वही है! हर खुशी भी दूर है मेरे आशियाने से, खामोश लम्हों में दर्द-ए-हालात वही है! Composed By #महादेव
एक दस्तक पहचानी सी गूँज गई सन्नाटे में
खामोश पन्नो में लिखी दास्तां बिखरी चीख के साथ
कहीं से आती है सदा जहाँ आवाज़ ने दम तोडा
गर्म पैरहन में लिपटे चांदनी से ख्वाब
ज़िंदगी एक तमाशा वक़्त एक मदारी
उसकी हसरतें टूटे खिलौनों सी ताउम्र उजरी कुछ बचपन सी
चलो उस बीज की तलाश में पौध जिससे कोई नया उगे
वक़्त लिखता रहा कागज़ पे हम उसे मोड़ के बैठे रहे
पिघले ख्वाब पिघले ही रहे वक़्त कुछ गर्म रहा ऐसा
मैं जानता था सच तेरी खातिर अजनबी रहा
कभी तो मौसमों सा न बदलों हर मौसम में फिर लिबास बदलना पड़ता है
कल भी तन्हाई कुछ ऐसी थी लफ्जों में कोई फासला न था
कल फिर आएगा कल कल फिर निकल जायेगा कल राजेश’अरमान’
खुद भी कभी दिखाई न दिए आईने का खौफ ही कुछ ऐसा था राजेश’अरमान’
थक के सो गए तारे भी मेरी नींद को इंतज़ार ही कुछ ऐसा था राजेश’अरमान’
न वक़्त बेवफा न ज़माना बस फासलों ने वफ़ा न की राजेश’अरमान’
तेरी उल्फत से वाकिफ था मगर लुत्फ़ बेवफाई का उठाने निकला राजेश’अरमान’
ღღ__बिन मौसम बरसात यूँ, जला रही है मुझको “साहब”; . जैसे शमाँ जलाती है, अपने परवाने को बुला के पास!!….#अक्स .
जबसे उन्होंने हमसे मुँह लिया मोड़ हमने उनकी गली को दिया छोड़ जबसे उन्होंने मिलने से किया मना हमने सब अरमानो को किया फना ……यूई
आज आपकी अलविदा को, हमने दिल से यूँ मान लिया दुआ करके खुदा को, तुम्हारी कब्र पे आखिरी सलाम किया ….. यूई
कोई भी करे प्यार मना मुझको इसका ना पड़ता कोई फर्क मुझको अब ना कोई उम्मीद रखी किसीसे सारी प्रीत रची ख़ुद के ही दिलसे ….. यूई
कौन किसका यहा अपना होता है कौन किसका यहा सपना होता है दिल का बस यह भ्रम होता है ख़ुद का यहा सिर्फ़ क्रम होता है ….. यूई
कितने भी तुम शहर भटक लो घर उसका ही सबसे प्यारा है कितने भी तुम दर खड़क लो दर उसका ही सबसे न्यारा है ….. यूई
प्यार मोहब्बत दोस्ती वफ़ा है सब किताबी अफ्साने यहां तेरी ना किसी को लगन यहां सब ख़ुद में ही है मगन यहां ….. यूई
किसको किसकी पड़ी है यहां सबकी नज़रे ख़ुद में गड़ी यहां ….. यूई
कौन यहां पे किसकी सुनता है हर कोई अपने ही सपने बुनता है ….. यूई
चाहते हो जो उसको पाना तो उसकी राह् चले जाना उसमें ना कोई बहाना बताना दिल अपने को रोज़ समझाना मन को सीधी राह् रख पाना उसको पल पल भटकन से बचाना ….. यूई
चाहते हो जो उसको पाना तो उसकी राह् चले जाना उसमें ना कोई बहाना बताना दिल अपने को रोज़ समझाना मन को सीधी राह् रख पाना उसको पल पल भटकन से बचाना ….. यूई
मांगो तो फटकार मिलेगी भागो तो दुत्कार मिलेगी छीनो तो कारागार मिलेगी ठगो तो आह बेकार मिलेगी ….. यूई
यह दुनिया बड़ी अवल्ली है यहां हर इंसान दुवल्ली है मांगो इससे तो यह खल्ली है ख़ुद लुटाए हो हो झल्ली है ….. यूई
ढूँढ ढूँढ तोहे मैं थकी आग विरह में मैं पकी कर यत्न मैं टूट चुकी तेरे मन को थाह ना सकी ….. यूई
नाम हो मेरा, बस नाम हो मेरा नाम नाम के ऐसी होड़ लगी सबको पीछे यह छोड़ चली कैसे भी हो बस नाम हो मेरा ऐसी हवा यह खुद्की चली सबको साथ यह ले उड़ी […]
इस दुनिया में नाम के उमर है उतनी जितनी इस जीवन में देह के जितनी ….. यूई
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