रविदास को गुरु बनाकर हम भी मीरा बन जाएं। द्वेष -कपट सब त्याग कर आज फकीरा बन जाएं। कोयला जैसा मन लेकर भटक रहा है मारा-मारा ज्ञान अगर मिल जाए तो संवर जाएगा कल तुम्हारा। […]

लौट आओ अपने खेतों पर अब हरित क्रान्ति लिख देंगे। उजाड़ गौशाला को सजाकर अब श्वेत क्रान्ति लिख देंगे। फिर से नाम किसानों का  लाल बहादुर शास्त्री लिख देंगे। अपनी लहू सिंचित करके माटी को […]

पृथ्वी, सूरज, तारे और ग्रह सब चलते ही तो रहते है में भी ब्रह्मांड का हिस्सा हू फिर क्यों में आराम करू                            …… यूई

रुकना हमने सीखा ही नही झुकना ही ह्मारी नीयती है मुश्किलें हजारों चाहे आयी हो रुकना हमारी सोचो में नही                        …… यूई

तीर चलाने से पहले सोचो ज़ुबान चलाने से पहले सोचो कमान से निल्का हुआ तीर ज़ुबान से निकला हुआ तीर दोनों वापस क्भी नही आते                  …… यूई

तू तुच्छ सा जीव ओ बंदिया किस बात पे इतना अकड़ता तू पल भर की तेरी हस्ती नही है किस बात पे इतना इतरता तू                          …… यूई

झुकना है निशानी मन निमाने की निम्न मन ही तो सबको अपना पता निम्न मन ही तो सब सच जान पता निम्न मन ही तो असल में जी पाता                          …… यूई

अकड़ तेरे मन की काली छाया इसको कर बड़ा क्या तू पाएगा ख़ुद अंधेरों से निकाल ना पाएगा किसी को क्या तू राह् दिखाएगा                          …… यूई

अत्याचार दिन ब दिन बढ़ रहे हैं भारत की बेटी पर। रो-रो कर चढ़ रही बिचारी एक-एक करके वेदी पर ।। भिलाई से लेकर दिल्ली तक प्रतिदिन नई कहानी है। किसने पाप किया है ये, […]