zindagi zalim hain babu, yahan bhawnao aur bachpaney ki koi kimat nahin ap kitney chamkiley kaptey pahentey ho usey apki pehchan hoti hain apko nange raja ki kahani zarur yaad hogi, aj toh sab nangey […]
zindagi zalim hain babu, yahan bhawnao aur bachpaney ki koi kimat nahin ap kitney chamkiley kaptey pahentey ho usey apki pehchan hoti hain apko nange raja ki kahani zarur yaad hogi, aj toh sab nangey […]
ansu kyun bahatey ho, enka matlab kya koi samjha hain, apney ap ko kyun dusro ke samney, kamzor tum banatey ho ansu kyun bahatey ho, gayron ko apna kehney ki fidrat tumhari, kab tak apney […]
chod chala tera anchaal, us duniya ki talaash main, jahan sapnon ke padh nahin katey jatey hain madhyawith pariwar main, kimti sapney dekhna dusahas main, chod chala tera anchal un sapnon ki talaash main har […]
nakli log,nakli hasi, nakli sahanubhuti ajeeb es duniya main kahi kho gaya hun main bachpana aur murkhata main koi, antar nahin raha, machine admi machine duniya, sirf paisa hi parichai apka ajeb es duniya main […]
bhukh kyun lagti hain, zindagi kyun daud main bhagati hain, sochon bukh na lagti toh, esi zindagi main jannat nasib ho jati
likhyun toh kya likhyu, sab kuch tum jante ho, zindagi ke es chod main, sab begane apne hi toh hain chot parayon se nahin, apno se mila, ab aur kya likhun main, sab kuch toh […]
holi aayi, rangon ki phuljaria lai, lal neeley peley charon tarf rang hi rang hain, begani zindagi jene ka yeh ajab dhang hain
janam tore bin jiya jaye na, pal bhar bhi yeh nayna so paye na, yaad teri aa rahi, tere mere pyar ke charchey surkhiya bator rahi zindagi ka har sukh begana, tujh se ab rah […]
pyar main tu hain, ekrar main tu hain, mere zindagi ke har karar main tu hi toh hain
सोमवार, 17 अगस्त 2015 कविता …..खो ग ई मिट्टी की लाली……… खो गई है मिट्टी की लाली। मुरझा गई है धान की बाली॥ सुख गई है बरगद की डाली उजड़ी बगिया रोता […]
……कविता……. अपने काम, आप करो, मजदूरों को माफ़ करो। रहना है, अगर ठाठ से; तो साफ-सुथरा इंसाफ करो। हमको तुम, माफ़ करो, अपना, मन साफ़ करो। अपनाना है, अगर हमें; तो पहले सीधे मुँह बात […]
कविता … “ प्रेम ही बांटो हरदम, आप अपने सूझ-बुझ से” छप्पर उड़ गई है, मिट्टी की दीवारों से। तूफाँ भी मांग रही है मदद, कामगारों से।। कट्टरता की बू […]
सिर पे जूता, पेट पे लात। दिल खट्टा और मीठी बात॥ नियम, कानून अमीरों का, अपने तो बस खाली हाथ॥ पूछ परख लो भूखों से क्या है तुम्हारी जात? पेट भरो बातों से, गोदाम तले […]
उसकी रज़ा में रह्ता हूँ ख़ुद में ही मस्त रह्ता हूँ खामोशियाँ मेरा गहना हैं मैं उनमें उसमें रह्ता हूँ ….. यूई
खामोश हूँ कमजोर नही जमाने ने मारा है मुझे मैंने जमाने को नही अबकी बारी मेरी है ….. यूई
खामोशियोँ को मेरी कमजोरी ना समझ हालत को समझा है मैंने, हारा नही ….. यूई
मैं खामोश हूँ खामोश ही रह्ने दो सिमटा हूँ ख़ुद में सिमटा ही रह्ने दो ….. यूई
जब सब शोरो-ओ-गुल से खेला लिए तब खामोशियोँ की चादर ओड़ा लिए ….. यूई
ख़्वाहिशें दिल में ही दफन होती हैं कह्ते हैं दिल की भी ज़ुबान होती है यह कभी ना बोल के बयाँ होती है खामोशियाँ ही इसकी पहचान होती है ….. यूई
कह्ते हैं सब में रह्ता तूं क्यों इतने दुःख सह्ता तूं क्या इससे बेहतर काम नही या हममें तुझको मान नही ….. यूई
कोई कहता तू ऐसा है कोई कहता तूं वैसा है मिल जाऊँ कभी तुमसे तो कैसे तेरी पहचान करूँ ? ….. यूई
मैं इतने जो पाप करूँ क्यों मैं इतना नीचे गिरूँ क्या मैं तेरे जैसा नही या तेरा मैं वो रुप नही ….. यूई
मुझे ख़ुद की लगी रहती है तुझे सबकी पड़ी रहती है मैं ख़ुद के समेट ना पाता हूँ तू सबके दुःख हर जाता है ….. यूई
मैं सोच ही ना पाता हूँ कैसे तू यह सब करता है सबके अन्दर बसता है सबको ख़ुद में रखता है ….. यूई
ख़ुद का करके सब देख् लिया ख़ुद का चाह के भी देख् लिया अंत में जब सबको जोड़ पाया पाया तुझसे आगे ना सोच पाया ….. यूई
नास्तिक सब कह्ते हैं मुझको क्यों ना तेरे दर पे जाता हूँ अब कैसे समझाऊं मैं सबको तुझको हर दर पर तो पाता हूँ ….. यूई
तूने सोच का जो बीज भरा कुछ तो सोच के होगा भ्ररा उस सोच की लाज रखता हूँ हर कदम सोच के बडता हूँ ….. यूई
हर दिन इक जीवन जीता हूँ उसको हाँ पर पूरा जीता हूँ जो भी तूने आज कम दिए उनको पूरा करके मरता हूँ ….. यूई
जब से यह एहसास हुआ मेरा है जो सब कुछ यहा वोह असल में तो तेरा है तबसे हलका हो गया हू उड़ने की अब तैयारी है ….. यूई
कहते है जो कुछ होता है सब यहा होती सब में सिर्फ़ तेरी मर्ज़िया है होता था पहले कभी शक़ मुझको अब बची ना कोई शिकायत है ….. यूई
जाने क्यों कोई शिकायत नही तुमसे मालूम नही के कैसा तुझ्से रिश्ता है हाथ उठ भी नही पाते दुआ में तेरी रह्मत तेरी पहले ही बरस जाती है ….. यूई
ए मालिक मेरी चाहतों का अंत ना हुआ तेरी रहमत और बरकतो का अंत ना हुआ शायद मेरी चाहतो में थी छुपी रज़ा तेरी या मेरी नादानियों को ना मिली सजा तेरी ….. यूई
क्या कहे जो अब तक न कहा क्या सुने जो इन कानों से अब तक न सुना क्या बात होती गर बिना कहे बिना सुने समझ लेते हाल ए दिल
प्यास तेरी चाहत की बेशुमार आजकल है! मेरी नजर में हरपल आती तेरी शकल है! खामोश़ हो गया हूँ गम-ए-जुदाई से मगऱ, साँसों’ में तेरी दौड़ती तस्वीर की नकल है! Composed By #महादेव
. ღღ__क्यूँ उड़ा-उड़ा सा लगता है, तुम्हारे चेहरे का रंग “साहब”; . सब लोग तो कर रहे हैं, कि रंगों का त्यौहार आया है !!…..#अक्स .
हंस देते अगर कभी हँसना सीखा होता हाथ थामे रही शाम-ए-उल्फ़त हमारा बता देते धुप क्या है अगर सेहर में आफताब को देखा होता -सत्य ‘प्रिय’ खन्ना
उसने ख़ामोशी को भी चीखते देखा रंजिश हुई जब क़ल्ब के शोर से राजेश’अरमान’
मेरी कलम में तो कोई बात न थी तेरे तजुर्बों ने मुझे कलमकार बना दिया राजेश’अरमान’
वफायें कब हुई किसी को हासिल महज एक लफ्ज है उम्मीदों के आसपास राजेश’अरमान’
समुन्दर में भी प्यासा ही रहा ज्यों ख्वाब सेहरा में देखा समुन्दर का राजेश’अरमान’
किसी रंजिश से क्या हासिल ज़माने को जानते सब फिर भी मसखरी करते है राजेश’अरमान’
रविदास को गुरु बनाकर हम भी मीरा बन जाएं। द्वेष -कपट सब त्याग कर आज फकीरा बन जाएं। कोयला जैसा मन लेकर भटक रहा है मारा-मारा ज्ञान अगर मिल जाए तो संवर जाएगा कल तुम्हारा। […]
कोई तो फर्क नज़र आता है जब अंधेरों में जुगनू जगमगाता है राजेश’अरमान’
चमन से हासिल वही होता है जो माली के लिए सही होता है राजेश’अरमान’
वक़्त के खेल में मौका देर से सही आदमी की पारी भी आती है राजेश’अरमान’
लौट आओ अपने खेतों पर अब हरित क्रान्ति लिख देंगे। उजाड़ गौशाला को सजाकर अब श्वेत क्रान्ति लिख देंगे। फिर से नाम किसानों का लाल बहादुर शास्त्री लिख देंगे। अपनी लहू सिंचित करके माटी को […]
पृथ्वी, सूरज, तारे और ग्रह सब चलते ही तो रहते है में भी ब्रह्मांड का हिस्सा हू फिर क्यों में आराम करू …… यूई
हम उसकी रज़ा में जीते है जिसमे सब चलता रहता है सदियों से यह ऐसा ही है जैसा यह अबके दिखता है …… यूई
रुकना हमने सीखा ही नही झुकना ही ह्मारी नीयती है मुश्किलें हजारों चाहे आयी हो रुकना हमारी सोचो में नही …… यूई
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