सोमवार, 17 अगस्त 2015 कविता …..खो ग ई मिट्टी की लाली………   खो गई है मिट्टी की लाली। मुरझा गई है धान की बाली॥ सुख गई है बरगद की डाली उजड़ी बगिया रोता […]

……कविता……. अपने काम, आप करो, मजदूरों को माफ़ करो। रहना है, अगर ठाठ से;  तो साफ-सुथरा इंसाफ करो। हमको तुम, माफ़ करो, अपना, मन साफ़ करो। अपनाना है, अगर हमें;  तो पहले सीधे मुँह बात […]

कविता … “ प्रेम ही बांटो हरदम, आप अपने सूझ-बुझ से” छप्पर उड़ गई है, मिट्टी की दीवारों से।        तूफाँ भी मांग रही है मदद, कामगारों से।।                    कट्टरता की बू […]

सिर पे जूता, पेट पे लात। दिल खट्टा और मीठी बात॥ नियम, कानून अमीरों का, अपने तो बस खाली हाथ॥ पूछ परख लो भूखों से क्या है तुम्हारी जात? पेट भरो बातों से, गोदाम तले […]

जाने क्यों कोई शिकायत नही तुमसे मालूम नही के कैसा तुझ्से रिश्ता है हाथ उठ भी नही पाते दुआ में तेरी रह्मत तेरी पहले ही बरस जाती है   ….. यूई

प्यास तेरी चाहत की बेशुमार आजकल है! मेरी नजर में हरपल आती तेरी शकल है! खामोश़ हो गया हूँ गम-ए-जुदाई से मगऱ, साँसों’ में तेरी दौड़ती तस्वीर की नकल है! Composed By #महादेव

हंस देते अगर कभी हँसना सीखा होता हाथ थामे रही शाम-ए-उल्फ़त हमारा बता देते धुप क्या है अगर सेहर में आफताब को देखा होता -सत्य ‘प्रिय’ खन्ना

रविदास को गुरु बनाकर हम भी मीरा बन जाएं। द्वेष -कपट सब त्याग कर आज फकीरा बन जाएं। कोयला जैसा मन लेकर भटक रहा है मारा-मारा ज्ञान अगर मिल जाए तो संवर जाएगा कल तुम्हारा। […]

लौट आओ अपने खेतों पर अब हरित क्रान्ति लिख देंगे। उजाड़ गौशाला को सजाकर अब श्वेत क्रान्ति लिख देंगे। फिर से नाम किसानों का  लाल बहादुर शास्त्री लिख देंगे। अपनी लहू सिंचित करके माटी को […]

पृथ्वी, सूरज, तारे और ग्रह सब चलते ही तो रहते है में भी ब्रह्मांड का हिस्सा हू फिर क्यों में आराम करू                            …… यूई

रुकना हमने सीखा ही नही झुकना ही ह्मारी नीयती है मुश्किलें हजारों चाहे आयी हो रुकना हमारी सोचो में नही                        …… यूई