Category: हिन्दी-उर्दू कविता

  • काली छाया

    काली छाया

    काली छाया 

     

    ख़ुद को पाने की राह में, ध्यान लगा जो ख़ुद में खोया,

    अन्तर मन में उतरा मैं जब, अंधकार में ख़ुद को पाया ,

    अन्दर काली छाया देख के, ख़ुद को गर्त में डूबा पाया ,

    खुद को राख का ढेर सा पाकर, मन मेरा अति गभराया .

     

    पूछा छाया से मैंने गभरा कर

    बाहर की छाया तो तन सह्लाए, क्यों तू मुझको जला सी जाएँ ?

     

    बोली छाया

    अंधकार में ख़ुद तूने जीवन बिताया ,अज्ञानता में में सब ज्ञान गवाया,

    अन्तर तेरे प्रकाश का अभाव हो पाया, तब मुझको तू जन्म दे पाया .

    क्या पाएगा मुझसे लड़ कर , लड़ के कोई मुझसे जीत ना पाया ,

    मैंने अस्तितिव्हीन चित्‌ है पाया, ना मुझको आग जलाए, ना शस्र कटवाए,

    आत्म ज्ञान का प्रकाश जो जगाए , तो ही मुझसे तूं मुक्त हो पाए .

     

    जान के छाया की माया, यूई इस से संघरश्रथ हो पाया,

    बोध ध्यान में यह पाया, सीधे सी इक राह चुन पाया .

    गहरा जितना ख़ुद में जाऊँ, उतना ही इसे दूर कर पाऊँ,

    रोशन अपना अन्तर कर पाऊँ, फिर ही इसको दूर भगाऊँ .

     

    मेरे ध्यान के बड़ते चित्‌ में , अन्धेरे दूर भाग रहे हैं

    सुबेह की किरणें चहक रही हैं, रात के साए सिमट रहे है .

    उसके मेरे बीच में अब , बस पौह फटने की दूरी है

    अपने निर्मल मन को लेकर, उसमें सिमटने की तैयारी है .

                                                                             …… यूई

  • शीश महल

    शीश महल

    जब से तुझको पाया है ,

    जिव देखो तुझ्सा लगता है ,

    दुनियाँ मानो शीश महल ,

    हर चेहरा ख़ुद का लगता है I                                                                                                    

                                         …… यूई

  • रिश्तों की मौत

    रिश्तों की मौत

    रिश्तों की मौत

     

    रिश्तों के मरने का

    है अपना ही अंदाज़

    तासीर मरे रिश्तों की

    है लम्बी बीमारी सी

    पल पल मारती

    पर मरने नही देती

    मरा हुआ रिश्ता

    मरा हुआ इनसान

    जान दोनों में नही होती

    फर्क सिर्फ़ इतना

    मरे हुए इनसान को

    विधि से मिट्टी में दफना देते

    और मरे रिश्तों के बोझ में

    हम ख़ुद को

    ज़िन्दगी भर दफना देते

    अ‍ब यूई

    मज़्हबो की किताबों में 

    मरे रिश्तों को दफनाने का

    कोई सलीका ढूँढता

    ख़ुद को कब्र से

    बाहर रखने का तरीका ढूँढता

                                               …… यूई

  • चौराहा

    चौराहा

    चौराहा

     

    बीच चार राहों के , वोह मुकाम ,

    रुक कर जहां, एक राह चुनता इंसान .

    ऐसे कितने चौराहों से, गुजरती जिंदगी़ ,

    चुनते हुए राहें, लिखती दास्ता अपनी .

     

    कितने चौराहों पे, ख़ुद छोड़ दी जो राहें ,

    उन राहों संग, छूट गई कुछ निगाहें .

    वो राहें और निगाहें, वापस नही मिलतीं ,

    गुज़रा हुआ ज़माना, सच में गुज़र गया .

     

    जिंदगी का सफ़र, शतरंज सा मुखर ,

    चाल चली जो ख़ुद ही, वापस नही मिलतीं .

    हर नए चौराहे पर, चुननी है अपनी राहें ,

    जब तक खेल-ए-ज़िन्दगी में, शै-ओ-मात नही मिलती .

     

    कुछ और चौराहों से, गुजरना है बाकी ,

    कुछ और राहों को, अपनाना है बाकी ,

    कुछ और निगाहों को, खोना है बाकी ,

    यूई मात से पहले, ख़ुद को पाना है बाकी.

      

                                                          ……  यूई

  • “ख्वाब” #2 Liner-54

    ღღ__आँखों को ख्वाब की, इस कदर भूख है साहब;
    .
    जैसे लगता है ख्वाब में, “तुम” आ ही जाओगे!!…..‪#‎अक्स
    .
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  • “इन्तेहा” #2Liner-53

    तसव्वुर में तेरे, अब तो कटती नहीं रातें;

    .
    आखिर तेरे इंतज़ार की, कोई इन्तेहा तो हो!!….#अक्स

  • “रस्ता”……#2Liner-52

    ढूंढने से ही मिलता है, पर रस्ता ज़रूर होता है;

    जो महँगा होता है कभी, वो सस्ता ज़रूर होता है!!…..#अक्स

  • मेरी नजर में आप जो आए हुए हैं

    मेरी नजर में आप जो आए हुए हैं!
    ख्वाब़ फिर से आरजू सजाए हुए हैं!
    नहीं है कोई जाँम न मयकशी’ मेरी,
    मस्तियों से आज हम डगमगाए हुए हैं!

    Written By #महादेव

  • मैं कभी-कभी निकलता हूँ जमाने में

    मैं कभी-कभी निकलता हूँ जमाने में!
    शाँम-ए-गुफ्तगूं होती है मयखाने में!
    #पैमाने थक जाते हैं सब्र से मेरे,
    वक्त तो लगता है ख्वाब को जलाने में!

    Written By #महादेव

  • दिल-ए-ज़िगर ……

    दिल-ए-ज़िगर ……

    दिल-ए-ज़िगर ……

                

    मेरी गुस्ताखिॅया अंदाज़इश्क थी मेरी

    मेरी शोखियाँ दीदारेखुदा थी तेरी

    मेरी वही दिल-ए-ज़िगर की शोखी पे

    क्यों आज बिखर गये सब जज़्बात

     

    कहीं ऐसा तो नहीं,

    तू आज इंतज़ार में था

    अपने दिल-ए-कायर की बेवफ़ाई को

    झूठी नाराज़गी का जामा पहनाने को

     

    शिकायत नहीं यारा के दिल तोड़ा

    शिकायत सिर्फ़ इतनी सी ए-बेरहम

    मेरा ग़रूर-ए-दिल तोड़ना ही था

    तो सर उठा सच तो बोल जाता

     

    प्यार निभाने का सलीका तो

    तुझसे कभी हो पाया नही

    दिल तोड़ने का सलीका भी

    तुमसे बन पाया नही

     

    बेवफा अच्छा ही हुआ

    जो तू हमसे रुठ गया

    यूई ने भी कभी कोई

    कच्चा रिश्ता निभाया नहीं

    …… यूई

  • “ख्वाहिश” #2Liner-51

    ღღ__ख्वाहिश है इश्क की, और वो भी सुकून के साथ;
    .
    तुम भी ना साहब, कभी-2 अच्छा मजाक करते हो !!……‪#‎अक्स‬
    .
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  • वो जो हमसे नाराज बैठे है (Poetry on Picture Contest)

    वो जो हमसे नाराज बैठे है (Poetry on Picture Contest)

    वो जो हमसे नाराज बैठे है
    नजरों को हमसे हरबार फ़ैर लेते है
    लौट आती है सदाएं हमारी हर दफ़ा
    क्यों जानकर हमारी जान लेते है

  • वो कोई नादान थोड़े है! Entry for “Poetry on Picture Contest”

    वो कोई नादान थोड़े है! Entry for “Poetry on Picture Contest”

    Entry for “Poetry on Picture Contest”

    ღღ_हर लम्हा, हर लफ्ज़, बस एक ही आरजू;
    अरे, दुनिया में बस वही, एक इंसान थोड़े है!
    .
    याद करते रहते हो, रात-रात भर उसको;
    अरे, सुबह को उसके बारे में, इम्तिहान थोड़े है!
    .
    गर दूर जा रहा है वो, तो जाने भी दो साहब;
    अरे, एक शख्स ही तो है, पूरा जहान थोड़े है!
    .
    जो भी किया है उसने, जानबूझकर किया है;
    आखिर दर्द से तेरे, वो कहीं अंजान थोड़े है!
    .
    दर्द देता है वो बेशक, पर मज़ा भी तो देता है;
    अरे मासूम है वो साहब, कोई बे-ईमान थोड़े है!
    .
    कब्ज़ा किये बैठा है, और किराया भी नहीं देता,
    अरे, मेरा दिल है साहब, उसका मकान थोड़े है!
    .
    क्या ताकते रहते हो, यूँ आसमान में साहब;
    अरे, बैठा हुआ ऊपर, कोई भगवान थोड़े है !
    .
    मोहब्बत में तो ये सब, होता ही रहता है “अक्स”;
    अरे, शिक़ायतों से क्या होगा, वो कोई नादान थोड़े है!……‪#‎अक्स‬

  • वसंत की ताक में ….

    वसंत की ताक में ….

    spring poetry जाती हुई ठण्ड, पछिया हवा के थपेड़े,
    किसी रूठी हुई प्रेमिका की तरह का दिन,
    दोपहर जैसे खामोश और चिरचिरा,
    न कुछ बोलता न कुछ सुनना ही चाहता !

    वो दूर खेतों में मक्के मटरगस्ती करते,
    जैसे दूर से हमें चिढ़ाते हुए देखते,
    बिखरे बिखरे बालों पर जमी धुल,
    जैसे उजड़ा हुआ सा घर कोई !

    उबासी से ऊँघते हुए दिन,
    जैसे कब आँख लग जाये,
    वसंत की ताक में बैठे सब,
    वो आये और रूठे को मनाये !

    #SK

     

  • Ise Benaam hee Rahne Do

    Ise Benaam hee Rahne Do

    इसे बेनाम ही रहने दो, कोई नाम न दो

    वर्ना बेवजह दिल में कई सवाल उठेंगें

    उन सवालों का जबाव हमारे पास नहीं

    सिर्फ़ अहसास है हमारे पास,

    जो लफ़्जों में ढलते ही नहीं

    लफ्जों के सहारे दिल कुछ हल्का कर लेते है

    गमों के घूंट, एक-दो पी लेते है

    वर्ना इस दुनिया मे रखा ही क्या है

    कुछ रखने को आखिर, बचा ही क्या है

    इन अश्कों को ही आंखो में बचा के रखा है

    कभी तुम मिल जाओगे इन्हे भी खर्च देंगें हम

    मिल जाओ तुम अगर, लुट जाऐगें हम

    मगर शायद लुट जाना हमारी किस्मत में नहीं

    चंद कदमों का फ़ासला है, मगर पांव चलते ही नहीं

    कई कारवां इसी फासले से गुजर जाऐगें

    हम तो है यहीं, यहीं रह जाऐगें

    बस अहसास हमारे, शायद तुम तक पहुंच जाऐगें

    इन अहसासों के फासलों को अब मिट जाने दो

    इसे बेनाम ही रहने दो, कोई नाम न दो

  • ” कोई निशानी भेज दो “

    मन बहलाने को कोई निशानी भेज दो

    नींद नहीं आती कोई कहानी भेज दो …..

    संजीदा रहूँ हमेशा तेरी यादों में

     मेहरबान बन कोई मेहरबानी भेज दो….

    भा गया कुछ यूँ दिल को तेरा अपनापन

    दीदार करने तस्वीर कोई पुरानी भेज दो ..

    तड़प रहा हूँ कब से मिलने को

      उम्मीद तुम कोई पहचानी भेज दो …

    जो दिलोँ – जान से हो सिर्फ मेरी

    ख़ुदा ऐसी कोई दानी भेज दो..

    महसूस होती हैं अक्सर दिल को तेरी सिसकिया

    ख़त में मेरी सुखनवरी कोई दीवानी भेज दो….

    हाल – ए – दिल सिर्फ तुम से हो बयां

    मंजूरी अपनी ना सही कोई बेगानी भेज दो …..

    ख़ामोश हैं सागर – ए – दिल – ए – पंकजोम “प्रेम ”


    तुम ख्वाईशें कोई तूफ़ानी भेज दो …

  • तेरी बँदगी ने

    तेरी बँदगी ने

    तेरी बँदगी ने

    ज़िन्दगी का फलसफा रोशन कर ,

    जीने का रास्ता आसान कर दिया

    हर शय में दिखा ख़ुद को ,

    यूई का ख़ुद से खुदाई का सफर ,

    इक पल में तमाम कर दिया

                                                …… यूई

  • “यादें” #1Liner-50 ….

    ღღ__दिल तो करता है कभी-2, तेरी यादों को ज़हर दे दूँ साहब;
    .
    फिर सोंचता हूँ, भला ये भी, कोई उम्र है ख़ुदकुशी करने की!!….‪#‎अक्स‬
    .
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  • जो आज है वो कल न होगा

    जो आज है वो कल न होगा!
    गमों का पल हरपल न होगा!
    मिलेगी रोशनी कदमों को,
    दर्द का कोई सकल न होगा!

     


     

    तुम्हारे लब पर नाम मेरा जब आएगा!
    गुजरा हुआ मंजर तुमको नज़र आएगा!
    #बिखरे हुए अफसाने घेरेंगे इसतरह,
    दर्द का समन्दर पलकों में उतर आएगा!

    Written By #महादेव

  • “वो कोई नादान थोड़े है!”……….

    ღღ_हर लम्हा, हर लफ्ज़, बस एक ही आरजू;
    अरे, दुनिया में बस वही, एक इंसान थोड़े है!
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    याद करते रहते हो, रात-रात भर उसको;
    अरे, सुबह को उसके बारे में, इम्तिहान थोड़े है!
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    गर दूर जा रहा है वो, तो जाने भी दो साहब;
    अरे, एक शख्स ही तो है, पूरा जहान थोड़े है!
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    जो भी किया है उसने, जानबूझकर किया है;
    आखिर दर्द से तेरे, वो कहीं अंजान थोड़े है!
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    दर्द देता है वो बेशक, पर मज़ा भी तो देता है;
    अरे मासूम है वो साहब, कोई बे-ईमान थोड़े है!
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    कब्ज़ा किये बैठा है, और किराया भी नहीं देता,
    अरे, मेरा दिल है साहब, उसका मकान थोड़े है!
    .
    क्या ताकते रहते हो, यूँ आसमान में साहब;
    अरे, बैठा हुआ ऊपर, कोई भगवान थोड़े है !
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    मोहब्बत में तो ये सब, होता ही रहता है “अक्स”;
    अरे, शिक़ायतों से क्या होगा, वो कोई नादान थोड़े है!……‪#‎अक्स‬

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  • इज़हार ए तसव्वुर

     

    इस वीराने में अचानक बहार कहां से आ गयी

    गौर से देखा तो ये महज़ इज़हार ए तसव्वुर था

  • कुछ कमाल हो जाए

    कुछ कमाल हो जाए

          ए मालिक क्यों ना कुछ कमाल हो जाए ,

          ऐसा अपनी दुनिया में ध्माल हो जाए ,

          हर शैतान इंसानीयत का कायल हो जाए 

          द्वैत की उलझन सलट, सब अद्वैत हो जाए ,

          यह दुआ जो यूई की कबूल हो जाए ,

          तो हर नर तुझ्सा नारायण हो जाए 

                                                        …… यूई

  • ख़ता दर ख़ता

    ख़ता दर ख़ता

    सोच कर यह ,

    ख़ता दर ख़ता किए जा रहे हम ,

    प्यार में तो वोह मिलने से गए ,

    सजा देने ही शायद जाएँ लौट कर

                                                              …… यूई

  • तेरी यादों के कागज को

    तेरी यादों के कागज को

    तेरी यादों के कागज को ,

      छुपा रखा है ,

      अपनी पलकों से थोड़ा पीछे ,

      कहीँ सालों से बह्ते आँसू ,

      इनको गीला कर ,

      धुँधला ना कर दे I

                                      …… यूई

  • गम-ए-इशक

    गम-ए-इशक

    गमइशक में डूब कोई

           मरीजमोहब्बत ना बच पाया

    रफ्ता रफ्ता सरकती मौत देखी

           यूई ना मर पाया ना जी पाया                            

                                                       …… यूई

  • मेरा हमसफर जबसे दूर हो गया है

    मेरा हमसफर जबसे दूर हो गया है!
    ख्वाब हसरतों का मजबूर हो गया है!
    घेरती हैं मुझको #तन्हाईयाँ मेरी,
    आईना उम्मीद का चूर हो गया है!

    Written By #महादेव

  • जब भी तेरी यादें पलक खोलती हैं

    जब भी तेरी यादें पलक खोलती हैं!
    कश्तियाँ ख्वाब की साँसों में डोलती हैं!
    लफ्ज़ तोड़ देते हैं खामोशी अपनी,
    #मंजिलें भी तेरा ही नाम बोलती हैं!

  • मुझे चाहतों का मिल गया ईनाम है

    मुझे चाहतों का मिल गया ईनाम है!
    डरा-डरा सा हर ख्वाब का पैगाम है!
    अरमान कुचल रहे हैं दर्द के कदम से,
    किसी की याद में मयकशी हर शाँम है!

     


     

    तेरी चाहत का गुनाहगार हूँ मैं!
    हर लम्हा तेरा ही तलबगार हूँ मैं!
    हरवक्त नज़र आता है ख्वाब तेरा,
    तेरी तमन्ना का दर्द-ए-इजहार हूँ मैं!

  • ” हार बैठा हूँ !” #2 Liner- 49

    ღღ__अक्सर खुद ही खुद से बाज़ियॉं, खेलता रहा साहब;
    .
    डर तो अब लगता है, जब खुद को हार बैठा हूँ !!…..#अक्स
    .
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  • लफ़्ज ढूढ रहे है बसेरा तबाही में कहीं

    है हर तरफ़ शोर तबाही का
    गुमराह है रूह, दबी हुई सी कहीं
    डूब गया है सूरज उम्मीद का
    लफ़्ज ढूढ रहे है बसेरा तबाही में कहीं

  • “अक्स” #2 Liner-48

    ღღ__कशिश आज भी वही है, और शिद्दत भी वही है “साहब”;
    .
    महज़ ख्वहिशों का तेरी, “अक्स” बदला हुआ सा लगता है!!……#अक्स
    .
  • माँ-बाप की लाडो

    माँ-बाप की लाडो

    माँबाप की लाडो

     

    ज्यौं जोगि छोड़े दुनिया को

    त्यों अपनी दुनिया छोड़ आई हूँ

    मैं तेरी जोगन हो आई हूँ

    अपना व्याह रचा आई हूँ

     

    बाबुल का आँगन सूना कर

    तेरा स्वारन चल आई हूँ

    वीरो की बाँहे छोड़

    जीवन तेरे लड लगा आई हूँ

     

    मै माँबाप की लाडो

    तेरी परछाई बन चल आई हूँ

    अपनी मंज़िलों को भूल

    तेरी राहों को अपना आई हूँ

     

    हाथो की मेहँदी में

    तेरे इश्क का रंग चडा आई हूँ

    इन सभी लकीरो में

    एक तेरा ही नाम सजा आयी हूँ

     

    अपने सच पर मुझे भरोसा हे

    सांसो का साथ निभा जाना

    सात जन्मो का कह्ते साथ होता

    मैंने आठवां भी क्मा जाना

     

    तेरे भरोसे सब छोड़ा यारा

    तू रब बन दिखा सजना

    जो सपने उतारे आंखों में

    उन्हे पूरे कर दिखा सजना

     

    सारी ज़िन्दगी तेते लुटा सजना

    एह जीवन पार लगा जाना

    दिल का प्यार लुटा सजना

    तेरे मन का प्यार मैं पा जाना

     

    यूई ए निकी जेहि

    बाबुल की लाडो ने

    तेरी साथन बन

    तेरी ज़िन्दगी नू स्वर्ग बना जाना

                                             …… यूई

  • मुलाकात

    मुलाकात

          नींद की चाहत तो नही होती ,

          बस इक आस सी रहती है ,

          कम्बख् जाए तो शायद ,

          ख्वाब में ही मुलाकात हो जाए 

                                                      …… यूई

  • कसम ख़ुदा की

    कसम ख़ुदा की

    गर जमाने ने किया होता ,

                 कसम ख़ुदा की, सब कर गुजरते हम I

    अफसोस यह खंजर उन हाथों ने मारा

                 जिनको ताउमर दुआओं में चूमते रहे हम I

                                                                                    …… यूई

  • तेरी एक आवाज़ ने

    तेरी एक आवाज़ ने

    बवंडर तन्हाई और दर्द के भी

    ना गिरा सके एक अश्क जिनमें

    बरसों बाद तेरी एक आवाज़ ने

    क्यों छलका दिए पैमाने उनमें

                                                                            ….. यूई

  • “फर्क” #2Liner-47

    ღღ__आज भी तुमको, झूठ बोलना नहीं आता “साहब”;
    .
    कि ठीक होने में, और कहने में बहुत फर्क होता है!!……#अक्स
    .
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  • मेरे पिता मेरी अभिव्यक्ति।।

    इस बार बादलो को खोजा हैं 
    पहले खुद छा जाते थे 
    इस बार  शब्दों को ढूंढा है 
    पहले खुद आ जाते थे 

    बेतुके से लगने लगे 
    अपने ही शब्द 
    ये देख कर में रह 
    गया अचंभित,स्तब्ध 

    इस बार लहरों  को  नहीं 
    समंदर को चुना था
    इन्होने ही मेरा 
    पूरा 

    राह उनकी काटों से 
    भरी रही 
    मगर मन  रूपी घांस 
    हमेशा हरी रही 

    जीवन में कठिनाइयाँ  आई 
    मगर कभी  भी 
    गलत राह 
    नहीं अपनाई 

    जब विशाल पेड़  थे 
    तो सबने ली छाया 
    कुछ टहनियां क्या कटी 
    खुद को  अकेला  पाया 

    टेहनियों  के कटने  से 
    कमज़ोर नहीं पड़े 
    और मज़बूती व्  हिम्मत से 
    हर समस्या से लड़े 

    विपरीत परिस्थितियों  से 
    लड़ने की दम थी 
    सम्मान कम मिला 
    क्यूंकि हरियाली कम थी 

    मन  का सरोवर 
    दर्द से भरा होगा 
    अकेला ही सारे बोझ 
    सेह रहा  होगा 

    उस सरोवर की एक बूँद भी 
     उनके चेहरे पर नही  दिखती 
    मेरे पिता 
    मेरी अभिव्यक्ति 

    खुद की इच्छाओं का गला घोंट 
     मेरी तम्मना  पूछते हैं 
    मेरे लिए अनेको बार 
    खुद से ही झुन्जते  हैं

    उनमे है   सहनशीलता  की
    अनोखी  शक्ति 
    मेरे  पिता  
    मेरी  अभियव्यक्ति 

    डगमगा जाता हूँ अगर 
    आपकी सीखो से संभलता  हूँ 
    पैसों  की इस दुनिया में 
    मै  संतोष की राह पर चलता हूँ 

    मुझसे पहले खुलती है 
    मेरे बाद बंद  होती  है 
    चमक दमक से भरी वो आँखे 
    मुझसे छुपकर रोती  है 

    वो कहते है चंद रुकावटों 
    से ज़िन्दगी थम नहीं सकती 
    मेरे पिता 
    मेरी अभिव्यक्ति 

    प्रद्युम्न चौरे??

  • शरारतें की है बहुत जिंदगी में हमने

    शरारतें की है बहुत जिंदगी में हमने
    अब जिंदगी है जो शरारत करती है

  • कोई अपना बनाना चाहता है

    कोई अपना बनाना चाहता है!
    मुझे दिल से लगाना चाहता !!
    जीस्त को देके गहरा प्यार यारो!
    मुद्दतो फिर भुलाना चाहता है!!

  • तेरा मिलना

    तेरा मिलना

    अब मेरी दुआओं का असर, जम गया है I

    अब मेरे लिए, वक्त थम गया है I

    अब तुमसे मिलने का, कोई तय वक्त नहीँ I

    तेरी बन्दगी करने का, कोई तय सलीका नहीँ I

    मैं तुझमें कुछ, यूँ रूम गया हूँ

    मैं तूँ , और तूँ , मैं हो गया हूँ I

    जब-जब ख़ुद से मिलना हो जाता है,

    तब-तब तुमसे मिलना हो जाता है I

    वक्त कैसा भी हो, यूई का जीना हो जाता है I

                                                       

                                                     …… यूई

  • ख़ुदा बंदे से

    ख़ुदा बंदे से

    यह ज़िंदगी दी है तुझे, कुछ कर आने के लिए

    मेरी इस दुनीया को, कुछ और सजाने के लिए

    यह ज़िंदगी दी है तुझे, जीने के लिए

    मेरी बनायी हर शय से,  प्यार निभाने के लिये

     

    मेरे मन की रज़ा को समझ, वोह सब कम कर आना

    अपनी कर्मो से, प्यार पर दुनीया का विश्वास बड़ा आना

    बेश्कीम्ती चीज़ है यह ज़िन्दगी, इसे यूँ ही ना गँवा आना

    मुझे चाहे भूला देना, पर किसी का दिल ना दुखा आना

     

    मैंने अपनी रूह फूँकी है तुझमें, इसे दागदार ना बना आना

    रंगीनीयों में डूब कर, अपना ईमान ना गिरा आना

     

    आना तो तुझे लौट कर मेरे पास है बंदे,

    सर झुका कर कहीँ ना लौट आना,

    नही पसन्द मुझे झुके हुए ईमान बंदे,

    मुझसे नज़र मिला सकें वोह आँख वापस ले आना

     

    ए यूई

    ऐसे लौट कर आना मेरे पास

    ख़ुद मुझ को भी अपने खुदा होने पर

    इक नाज़ सा करा जाना                                                     …… यूई

  • “सज़ा”#2Liner-46

    ღღ__सज़ा में एक ही लफ्ज़ है, तेरे हर इक गुनाह का मेरे पास;
    .
    कि तुम इतने मासूम हो साहब, जाओ “माफ” किया तुम्हें!!……‪#‎अक्स‬
    .
    .18-3d-pencil-drawings
  • जब लबों से दिल की बात नहीं होती

    जब लबों से दिल की बात नहीं होती!
    धड़कनों की कोई रात नहीं होती!
    कदम फिर रूकते नहीं ख्यालों के,
    जब किसी से मुलाकात नहीं होती!

     


     

    क्या होता है जब तुम पास नहीं होती!
    मेरी जिन्दगी मेरे पास नहीं होती!
    कटती नहीं है रात गम-ए-तन्हाई की,
    सहर भी होने की आस़ नहीं होती!

    #महादेव

  • JAANE KYU … ??

    Jaane kyu———–??
    logg yahaa pe
    hote betab,saath paane ko
    ye zindagi to hai
    kewal aane–jaane ko
    sunaa hai Maine buzurgo se
    padhaa hai Maine grantho mei
    aana–jaana akelaa hotaa hai
    phir,kis baat ka mela hotaa hai??
    kahte hai logg mayaa hai ye
    pr ye kaisi maaya——-??
    aur’ kaisi maayaa ka sansaar
    ki– hrr pal– hrr koi–
    sangg paane ko beqaraar
    jaane kyu——–???
    jankarr bhi sachchaai
    ho jaate mnn ke,bhaav haavi
    trishnaa ke chhaav ki khoj
    bhoolkrr shaashwt,sanaatan bhaavi
    chhut sa jaataa hai ” sach”
    jaane kyu——-???
    kisliye judte hai bandhan
    phir,tutate bandhan
    kisliye hotaa hai dard
    jaankarr ki—–
    chhoot jaate hai sabhi yahaa prr
    rah jaate hai,saare zami prr
    dil dhundhtaa–phirr bhi–hamdard
    jaane kyu—-jaane kyu—-??

  • पछताओगे तुम, रुसवाईयां करोगे

    पछताओगे तुम, रुसवाईयां करोगे

    गर छोड दिया हमने तेरी गलियों मे आना कभी

     

    तुझसे मुश्ते-मोहब्बत मांगी थी, कोई कोहिनूर नहीं

    बस तेरे दीदार की दरकार थी चश्मेतर को कभी

     

    भर गये पांव आबलो से पुखरारों पर चलकर

    सारे घाव भर जाते ग़र मलहम लगा देते कभी

     

    यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

    चले गये जो इकबार, फिर ना आयेंगे कभी

     

    घुल जाये तेरी रोशनी में रंगे-रूह मेरी

    ग़र जल जाये मेरी महफिल में शम्मा ए इश्क कभी

  • apne

    !!!!! SAGAR KE DIL SE !!!!!

    kehne ko sab saath hai
    par nazar koi aata nahi

    aisa payar nibhaya apno ne
    ki dard ab dil se jaata nahi

    paas hi hote hai agar sab
    tau kyoun aah kisi ko sunai deti nahi

    samjate hai sab ki marrize achha hai
    par jaan jaati kisi ko bhi dikhai deti nahi

    @@ SAGAR @@
    27/1/16 :: 8:40 PM.

  • होते ही शाँम मैं किधर जाता हूँ

    होते ही शाँम मैं किधर जाता हूँ?
    जुदा ख्यालों से मैं बिखर जाता हूँ!
    होता है खौफ यादों का इसकदर,
    जाँम की महफिल में नजर आता हूँ!

     


    यूँ न मुस्कराओ तुम नजरें बदलकर!
    नीयत पिघल रही है मेरी मचलकर!
    धधक रही है चाहत गुफ्तगूं के लिए,
    ख्वाहिशों की जैसे करवट बदलकर!

    Written By मिथिलेश राय ( महादेव )

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