चार दीवारे और इक छत, इत्ता सा था घर मेरा
भूखी जमीन आज उसे भी निगल गयी
Category: हिन्दी-उर्दू कविता
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Par hum to jiyenge…
Par hum to jiyenge…
Tum kitni bhi dastaan likho,par hum to jiyenge.Tum lakh koshishe karo,par hum to jiyenge,Tum hazaaron bandishe lagao,par hum to jiyenge,Tum humein bediyaan pehnao,par hum to jiyenge.Hum jiyenge befikar,Hum jiyenge bekhabar,Khule asmaan mein,sitaaron ke bich,Hum to jiyenge,Kaaton ke bich,Uljhano ke sath,par hum to jiyenge… -
“ताबीज़” #2Liner-40
ღღ___कोई ताबीज़ आता हो, तो पहना दो मुझको “साहब”;
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तुम्हारे इश्क़ का जूनून, अब सर से उतर रहा है !!…….#अक्स.

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रुकते नहीं वो काफिले
रुकते नहीं वो काफिले
कितने चले कितने रुके ये न हम से पूछिए
चल पड़े जो बाँह थामें रुकते नहीं वो काफिले |अक्षरों को जोड़ने में हिस्सा हमारा भी रहा
इस अधूरी पटकथा में किस्सा हमारा भी रहा
मानिए मत मानिए हम कह रहे
आदमी के बीच में घटते रहेंगे फासले |लाख कोशिश कीजिए धर्म ध्वज को तोड़ने की
आस्था की अकारण गर्दनें मरोड़ने की
क्या कमी है गवाहों की यहाँ होते रहेंगे नामुरादी फैसले |संहिताएँ वांचते थक गई हैं पीढ़ियाँ
ऊँची बहुत हैं न्याय पथ की सीढ़ियाँ
सौंप दीं जब फाइलें हैं मुन्सिफों को
उम्र भर लटके रहेंगे मामले |घेरते हों अँधेरे औ’आँधियाँ
तूफ़ान भी साँप से फुँकारते
सिंधु के उफान भी डाल दी जब डोंगियाँ
जलधार में मानिए मत मानिए कम न होंगे हौसले |@ डॉ. मनोहर अभय
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जब तक रहेगा हिंदू मुसलमान जहॉ में
जब तक रहेगा हिंदू मुसलमान जहॉ में !
रोयेगा फूट फूट के इंसान जहॉ में!!
आओ गिरा दें मजहबी दीवार जहॉ से !
हो जाय ज़रा सत्य का सम्मान जहॉ में !! -
दिन आ रहे मधुमास के
दिन आ रहे मधुमास के
शीत है भयभीत
खुशनुमा वातावरण ले रहा अँगड़ाइयाँ
तोड़ हिम के आवरण कह गई कोकिला कान में
कुहास के दिन आ रहे मधुमास के |गुनगुनी सी धूप होगी मधुभरी सी सुनहरी
मंजीरे बजाने आ रही मधुमती सी
मधुकरी मकरंद ले कर
झूमते झोंके झुके सुवास के |तितलियों से भर गईं क्यारियाँ फुलवारियाँ
कलियाँ सियानी मारती रस गंध की पिचकारियाँ
ढपली बजाते मधुप चंचल फागुनी उल्लास के |अब जलेंगीं अवदमन की थरथराती होलियाँ
देखना है राजपथ पर कब तक बँटेंगीं थैलियाँ
द्वार खुलने को विवश हैं अब नए आवास के | -
कभी वो कुछ कहते है
कभी वो कुछ कहते है, कभी हम कुछ कहते है
हमारे रिश्ते चंद लफ़्जों में अक्सर महफ़ूज रहते है -
“लम्हा” #2Liner-39
ღღ___मैं हँस रहा था जिस लम्हे में, बस अभी-2 तो गुज़रा है;
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और लोगों से सुना है, गुज़रा हुआ वापस नहीं आता !!……#अक्स.
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wo humhein begaana keh kr chale gaye huzoor…..
hum pagal hi to the janaab,
jo unhe apna samjhne ki bhool kar gaye…..
wo humhein begaana keh kr chale gaye huzoor,
anchaha dard diya humein,
magar ye kya!
hum to use bhi khushi khushi qubool kar gaye…
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कितनी बातें अनकही रह जाती है
कितनी बातें अनकही रह जाती है
कितने लम्हे बिना जीए ही बीत जाते है
सोचते सोचते दिन महीने साल
धीरे धीरे सब गुजर जाते है -
“ख्याल” #2Liner-38
ღღ__तुमने रोका है इनको “साहब”, या हम भूलने लगे हैं अब;
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कि अब ख्याल भी तेरे, हमसे मिलने नहीं आते !!………#अक्स -
कुछ लोग कह रहे हैं ज़माना बदल गया
कुछ लोग कह रहे हैं ज़माना बदल गया !
नज़रें बदल गई हैं निशाना बदल गया !!
मुद्दत की अपनी लाश है पहचानिए ज़रा !
केवल कफ़न नया है पुराना बदल गया !!आर्य हरीश कोशलपुरी
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वर्ष कलैंडर शाल हैं बदले !
वर्ष कलैंडर शाल हैं बदले !
किंतु न अपने हाल हैं बदले !!
नये साल का शोर करो मत !
पेड़ों ने बस छाल हैं बदले !!
थोड़ा चतुर हुई क्या मछली !
मछुवारों ने जाल हैं बदले !!
वही आरती वाले कर हैं !
बस स्वागत के थाल हैं बदले !!
एक गोल के चट्टे बट्टे !
थोड़ा सा पगताल हैं बदले !!
धन धरती सामूहिक कर लो!
दद्दा देखो काल हैं बदले !!
आर्य हरीश
जिलासचिव -प्रलेस अ० न० -
YAD RAHEGA UN VEER SAPOOTO KA BALIDAAN
Shahaadatt ki Lekhni se ———
likhi gyi Aazadi ki daastaan
Yaad rahega un veer sapooto ka balidaankatra– katra khoon se
seenchee mitti Hindustan ki
badhte gye aage hrrdm—
parwaah kiye binaa Jaan ki
zarrra– zarrra vatan ka maanega ehsaan
yaad rahega un veer sapooto ka balidaanMaao me doodh ki taaqat
bahno me aanchal ki himmmat
patniyo ke pyaar ki daulat
veeraangnaao ki adamya saahas
addbhoot dikhaa thaa swaabhimaan
yaad rahega un veer sapooto ka balidaansachchaii khilti rahe,achchaaii milti rahe,
her dill ho Ram ka—-
chehare pe aks shyaam ka
hrr gun ho sitaa ki—
dhunn Radhaa me naam ka
nafratt ko jeetkarr pyaar se—
nikallkarr agyaan ke andhkaar se
saddbhaav bhaaiichaare ke saath—
ektaa ki gatthbandhan
chhoo paayenge jivan ke naye
aayam
Bhaarat ke naye kalpanaao ki udaan
Fizaaye bhi krti rahegi ——–
——-un veero ko pranaamShahaadatt ki Lekhni se–
likhi gyi aazadi ki daastaan——
yaad rahega un veer sapooto ka balidaan——–Ranjit Tiwari”Munna”
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“गम” #2Liner-37
ღღ___कुछ इस तरह से आकर, गम लिपट रहे हैं मुझसे;
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कि जैसे हर एक दरिया, समन्दर से जाके मिलता है!!……#अक्स -
falsfaa-e-zindagi
!!!! SAGAR KE DIL SE !!!!
EK dil hi tau tha
Jisse samaj na paaya koiEk ehsaas hi tau tha
Jisse mahsoos na kar paaya koiEk insaan hi tau tha
Jisse apnaa na paaya koiGhut ghut kar mar gaya wo
Usse bachha na paaya koiYahi falsaffa hai zindagi ka
@@ SAGAR @@
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वह भिखारी
वह भिखारी
मलिन मटमैला फटा पट
पहने था वह पथवासी
नमित निगाहे नित पथ पर
नयनों से नीर निकलता
विदीर्ण करता ह्रदय
अपने भाग्य पर
कांपते हाथों में कटोरा
स्कंध पर उसके परिवार का बोझ
दो दिवस से भूखे
बाल का सहारा भिखारी
जिसके सम्मुख अब
पथ की ठोकरे भी हारी
बेबस कंठ ने साथ छोड दिया
पग भी पथ पर रुकते है
बच्चों की सूरत याद आने पर
दयनीय द्रग द्रवित हो उठते है
तरणी है बीच मझधार में
कब कूल तक पहुंचेगी
इस इंतजार में
नत हुआ , म्रत हुआ
वह भिखारी
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” बड़ी फ़ुरसत में मिला मुझ से ख़ुदा है…”
मेरी सांसो में तू महकता हैँ
क़ायनात – ए – ग़ैरों में तू ही अपना लगता हैँ 1 .होंठों की ख़ामोशी समझा ना सके
नैनों में इश्क़ मेरा झलकता हैँ ( 2 )भर चुकी हैं सुराही – ए – मोहब्त
इश्क़ मेरा अब बूंद – बूंद कर रिसता हैं…. ( 3 )जितना जाना चाहूँ तुम से दूर
कारवाँ यादों का उतना ही तेरी और सरकता है…( 4 )नैनों से दूर हो तो क्या हुआ
ये सुख़नवर तेरा हाल – ए – दिल समझता हैं ( 5 )धड़कन बन कफ्स हूँ तेरे दिल में
ये बार – बार तू फ़लक की और क्या देखता है( 6 )मेरी महफ़िल – ए – दिल में मुसलसल हैँ दौर – ए – खजालत
ऐ दीवाने दौड़कर आ कहाँ तू रुकता हैँ ( 7 )कट रहे हैं दिन ग़रीबी संग
इस सुख़नवर का इक – इक अल्फ़ाज़ सस्ता है ( 8 )दर्पण में हर रोज़ देख ना समझ सकी
अक्श मेरा बिलकुल तेरे जैसा है ( 9 )इक अरसा बीत गया उन से गुफ़्तगू किये
आज बड़े दिन बाद नैनों से मिला इक इशारा है ( 10 )साँसे कब तक महफूज़ रहे मालूम नहीं
अंतिम साँस तक साथ निभाने का क्या इरादा है ( 11)दिल को अमीर बना भेजा हैँ ख़ुदा ने
तभी हर रुख़ – ए -रोशन पर इश्क़ लुटाता है ( 12 )जब वो दिल से अपना कहते हैँ
कसम – ए – ख़ुदा क्या जीने का आनन्द आता है ( 13 )फिज़ा की महक से महसूस की उनकी मायूसी
तभी आज इक – इक अल्फ़ाज़ हुआ रुवासा हैँ ( 14 )मुझे इत्मीनान से जीने दो मेरा आज
क्योकि कल तो बस कल कहलाता है ( 15 )तू कफ्स रह मेरे जिस्म में रूह बनकर
आज का इन्सां अंखियो से करता तुझे मैला है ( 16 )इक किस्सा बन कर नहीं रहना
जिंदगी का सफ़र कटा अभी आधा है ( 17 )सोया रहता हूँ मुर्दे की तरह
ख़्वाब हर इक मेरा अधूरा है ( 18 )शाम ढ़लते ही घने जुल्मात के कहर में
इक शोला आज भी जलता हैँ ( 19 )उस माहताब का दीदार किये बगैर
ये आफ़ताब कहा ढलता हैँ ( 20 )दुनिया ने बता दिया इश्क़ को गुनाह
लेकिन दिल मेरा कफ़न बांध चलता है ( 21 )तन्हाई में तन्हा कर दे यादें उनकी संजीदा
फिर नैनों से हर इक आब बारिश बन बरसता है ( 22 )मत बिक जब तक ना मिले कोई सच्चा सौदागर
पगले बाजार – ए – मोहब्त में यूँ ही मोल- भाव चलता है ( 23 )दिल की ज़मी पर रखे वो अपने लफ़्जो के कदम
तब कहि जाकर मुस्कराहट का गुलाब खिलता है ( 24 )धड़कन आज भी मदहोश हैँ
सांसो से उनकी जो रिश्ता गहरा हैँ ( 25 )इक मरतबा तुम जाओ मयख़ाने में
साक़ी के हाथो से जाम पीने का कुछ और मज़ा हैँ ( 26 )जो ये कहे दिल से बहुत अमीर हूँ मैं
सही मायने में वही मोहब्त पर लूटा है ( 27 )वो आज भी सोया हैँ बे-फ़िक्र
और सुलग उठी चिता है ( 28 )ख़ामोश आज तक वो ख़ुदा है
शायद हुई कोई ना होने वाली खता हैँ ( 29 )जब से छोड़ दी उसने नजरों से मय पिलानी
वीरान शहर का हर इक आहता है ( 30 )दिल तोड़ने के बाद भी रह लो तुम
यहाँ खण्डरो में किसका रहना मना हैँ ( 31 )कब्र में सोने के बाद जल उठी कंदीले
जरा ये सोचो मोहब्त में चिराग ये कितना जला है ( 32 )कल जो नजारा देखते थे हम फ़लक – ए – उल्फ़त पर
आज वहीँ दिखाई दिया धुंधला है ( 33 )तुम पढ़ना मेरी दिल की किताब ध्यान से
किसी इक ख़ास पन्ने पर अतीत मेरा छुपा है ( 34)मुसलसल है उसे चाहने का सिलसिला
जब से दिल उनकी धड़कन से मिला है ( 35 )
और जीने का मन करता है
जब अल्फ़ाज़ उनका अपना कह बुलाता है ( 36 )राह – ए – इश्क़ में बहुत ठोकरे लगी
पर हर मरतबा दिल सम्भल जाता है ( 37 )मेरे मेहरबान मत बना मोहब्त को इतनी बेनज़ीर
इस जंग में इंसान इंसान से ही हारता है ( 38 )तब से रो रही है तन्हाई में दीवारे
जब से उनके दिल का आशियाना छोड़ा है ( 39 )ये मोहब्त सुला देती हैँ गहरी नींद में
वरना यहाँ मरना कौन चाहता हैँ ( 40 )फूलों की चाह दिल में ले चल पड़े
पता ना था अंगारो पर से गुजरना हैँ ( 41 )जख़्म इतने गहरे मिले उस अपने से
भरने कोई मरहम आज तक ना हुआ संजीदा है ( 42 )ना पूंछे वो मेरा हाल – ए – दिल
हर इक राज़ दिल में दफ़न रहता है ( 43 )अगर तेरे नसीब में है तो जरूर मिलेगी
ए – इंसान क्यों राह – ए – मोहब्त में ख़ुद को खोता है ( 44 )काफिले और नसीब हो जायेगे चाहत के
मुस्कुराता रह क्यों रोता है ( 45 )हाल – ए – दिल बताने ख़त उन्हें और कैसे लिखूँ
बचा मोहब्त की किताब पर इक ही पन्ना है ( 46 )पसन्द हैं उन्हें पायल
बस मुझे घुँगरू बन खनकना है ( 47 )रहना हैं अगर उस चाँद के हरदम करीब
तो और कुछ नहीं इक सितारा बनना है ( 48 )
दूर से पहचान ले उस गुलाब की खुशबु
उल्फ़त में बना ये सुख़नवर ऐसा भंवरा है ( 49 )जैसे ही वो लगे गले महसूस हुआ ” पंकजोम प्रेम ”
बड़ी फ़ुरसत में मिला मुझ से ख़ुदा है…(50 ) -
सितम पे सितम तुम ढाते रहे
सितम पे सितम तुम ढाते रहे
अफ़साने मगर महोब्बत के बनते रहे
लफ़्जों में कहां बयां होती है कहानी मेरी
कर सको गर महसूस तो जानो
किस कदर हम दरिया ए आग में जलते रहे…कोई कभी कितना भी दूर क्यों न हो
हो जाते है करीब महोब्बत गर रहे
आंखों में जो हो जाये बयां
उस अहसास में हम ढलते रहे… -
सर्द रातों का सितम कौन सहे
सर्द रातों का सितम कौन सहे
इस हाल में तनहा कोई कैसे रहे
तेरे नाम की चादर लपेटे लपेटे
रात सारी बस कटती रहे -
निकल जाते है उन रास्तों पर
निकल जाते है उन रास्तों पर
जिनकी कोई मंजिल नहीं
अंधेरे होते है जिन राहों में
मगर कोई अंजुमन नहीं
होते है कांटे, कंकड़
फूलों का बागान नहीं
बस इक साथी की तलाश होती है
जो हमारी तरह इन राहों पे निकला हो -
“गुमराह ” #2Liner-36
ღღ__ज़रा देखो तो निकल के “साहब”, अब तक वो आए क्यूँ नहीं;
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कहीं ऐसा तो नहीं रस्तों नें, उन्हें गुमराह कर दिया !!……..#अक्स -
जम जाते है क्यों रिश्ते बर्फ़ की तरह
सोचता हूं कभी कभी
क्यों हो जाते है शुष्क
जम जाते है क्यों रिश्ते
बर्फ़ की तरहलेकिन तभी लुड़क पडते है
गर्म गर्म आंसू
नर्म रुखसारों पर
पिघल जाती है सारी बर्फ़
रिश्तों की | -
पहला प्यार
ना मेरे हाथों में था लहू ,
ना लगी थी मेहेंदी उसके हाथों में ,
ना जाने क्यों फिर भी रंग था गहरा ||
ना वो अकेली थी ना मै अकेला था ,
था वहाँ घने लोगो का पहरा ||
कुछ लोगो की घूरती आँखें …
कुछ की थी तिरछी नजरें …
वो थी सहमी, था मै भी सहमा ||
ना मेरे हाथों में था लहू,
ना लगी थी मेहेंदी उसके हाथों में ,
ना जाने क्यों फिर भी रंग था गहरा ||
शायद थी नजरों की ही गुस्ताखी …
या थी दो दिलों की नादानी …
पर था वो प्यार मेरा पहला ||
~ सचिन सनसनवाल
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चाहे कितनी नफ़रत कर लो हमसे
चाहे कितनी नफ़रत कर लो हमसे
तेरे दिल को अपना बनाकर रहेगेंबहुत रो चुकी है आंखे हमारी
तेरी आंखों से आंसू हम गिराकर रहेंगेचाहे कितनी भी अंधेरी हो जिंदगी की रातें
शम्मां महोब्बत की हम जला कर रहेगेंफासले बना लो चाहे कितना भी हमसे
ये फ़ासले, हम मिटा कर रहेगें -
वो जो गुजर गये यूं मुंह फ़ेरकर
वो जो गुजर गये यूं मुंह फ़ेरकर
[मजरूह – जख्मी]
उतरा उतरा रहता है तब से मुंह मेरा
कयामत थी या क्या थी वो
मिलकर उससे मजरूह हो गया दिल मेरा.. -
” मौत करती है रोज़ “
मौत करती है नए रोज़ बहाने कितने
ए – अप्सरा ये देख यहाँ तेरे दीवाने कितने
मुलाक़ात का इक भी पल नसीब ना हुआ
कोई मुझ से पूछे बदले आशियाने कितने
तेरे इंतजार में हुई सुबह से शाम
ये देख बदले ज़माने कितने
उन्हें भूख थी मुझ से और उल्फ़त पाने की
लेकिन दिल में मेरे चाहत के दाने कितने
नशीली उन निग़ाहों को देख
नशा परोसना भूल गए मयख़ाने कितने
रंग जमा देती है मेरी सुखनवरी हर महफ़िल में
मगर उस रुख़ – ए – रोशन ने अल्फ़ाज़ मेरे पहचाने कितने
यादों में हुए तेरी कुछ यूं संजीदा
दिल को तसल्ली देने गाये तराने कितने
उनकी तरकश में था इक तीर – ए – मोहब्त
मेरे ज़ख्मी दिल पर लगे निशाने कितने
इक मरतबा चले सफ़र – ए – मोहब्त पर
राह में मिले मुझे उलाहने कितने
वक़्त के साथ थोड़ा हम भी बदल गए
बेजुबां दिल से अब अल्फ़ाज़ सजाने कितने
तस्वीर कुछ यूं बसी उनकी नैनों में
दिखे दर्पण में उनके नज़राने कितने
कम से कम ख़्वाबो में तो कर दे इज़हार
नसीब हो मुझे लम्हें ये सुहाने कितने
मैँ पूरी तरह लिपट चूका हूँ वसन – ए – मोहब्त में चाहत के रंग मुझे अब छुड़ाने कितने
मुसलसल है जो इश्क़ की आग दिल में
आये दीवाने इसे बुझाने कितने
इक दफ़ा ना कर दीदार तो अंखियों में नींद कहा
वरना आये मुझे ख़्वाब सुलाने कितने
फ़ीके पड़ रहे है दिन – ब – दिन जिंदगी के रंग ” पंकजोम प्रेम ”
अपनी मोहब्त के रंग में आए रंगाने कितने
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“निगाह-ए-इश्क़” #2Liner-35
ღღ__अक्सर भीग उठती हैं “साहब”, पलकें तेरी नज़र-अन्दाज़ी से;
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निगाह-ए-इश्क़ पे कोई फ़र्क, ज़माने का नहीं पड़ता !!………#अक्स -
वो याद आये..
कुछ अश्कों की महफिल जमी और वो याद आये
रुखसार कुछ नम से हुए और वो याद आयेएक जमाने की मोहब्बत वो चंद लम्हो में भुला बैठे
हम भूलकर भी उन्हे भूला ना पाये और वो याद आयेचांद और उनका क्या रिश्ता है, हमें नहीं मालूम
फ़लक पे चांद उतरा और वो याद आयेतरन्नुम ए इश्क गाते रहे तमाम उम्र हम
कोई नगमा कहीं गुंजा और वो याद आये
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सूनी सूनी रातों में
सूनी सूनी रातों में
कभी कोई दस्तक दे जाता है
मेरे दिल के दरवाजे पर…
कभी कोईे चेहरा नहीं दिखता
बस आहट होती है हल्की सी
और कुछ कदमों की आवाज
जो मचा देती है हलचल
मेरे सूने पड़े दिल में
सूनी सूनी रातों में… -
kya muje fir mohabbat hui h
der raat jagne ki aadat hui h
kya muje fir mohabbat hui h.
has leti hu likhte likhte
khamosh hoti hu kehte kehte.
dil ne fir gustakhi ki h
kya muje fir mohabbat hui h..
baar baar likhti pdti hu..
kbhi chokti hu kbhi khilkhila leti hu…
mne fir shaitani krni suru ki h
kya muje fir mohabbat hui h -
Dhaffan
!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!
Dhaffan ho gaya ik rishta
Bahut dard samete hue
Bina kisi awaaz kisi kraah ke
na tum samaj paaye na main
@@ SAGAR @@
4/1/16 :: 9:33 PM . -
zindgi meri fir se khilkhilaane lagi….
dukh mere dekh kr,
ab khushiyan bhi jholi mein aane lagi….
khaamoshi k baad,
main fir se gungunaane lagi….
or dekh kr saahas mera,
zindgi meri fir se khilkhilaane lagi….
asar itna h ‘huzoor’ ki,
murjhaaye phool se bhi mujhe uski sugndh aane lagi….
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hum intezaar mein baithe rahe unke…
hum intezaar mein baithe rahe unke…
magar unki parchaayi bhi na pahuch saki mujh tak,
na ja wo raste se bhatkk gaye….
yaa mujh se humesha k liye bichad gaye….
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“हद” #2Liner-34
ღღ__ना जाने कैसे तुझको, “बे-हद” चाह बैठा “साहब”;.ये दिल जो अक्सर मुझको, मेरी “हद” बताता था !!………#अक्स -
Bhagya
!!!!! AAJ KA SAGAR VICHAAR !!!!!
Paisa……Payar…….aur Pratishta
ye aap jabardasti nahi paa sakteaapke bhagya main hai tau milega
no matter weather u deserve it or not
JO MILA HAI ..USSI MAIN KHUSH RAHO
@@ SAGAR @@
4/1/16 :: 12:22 PM -
“इन्तजार” #2Liner-33
ღღ__नज़रों को इंतज़ार की, सजाएँ इतनी भी ना दो “साहब”;.ये बारिशें बिन मौसम की, हमसे अब देखी नहीं जाती !!…….#अक्स -
‘Tere har dard ka mujhe ehsaas hai’…..
wo kehte hai,
‘Tere har dard ka mujhe ehsaas hai’…..
or hum puchte hai,
‘Aisa bhi isme kya khaas hai’…
kya dil humare,
sach mein itne paas hai!!!…..
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zindgi k baad, fir maut aa jaati hai….
haar k baad, jeet aati hai…
or raat k baad, subh ho jaati hai…
jab khyaal aata hai tumse bichadne ka dil mein,
to shaayad kisi ki jaan nikal jaati hai…
isi tarah!
zindgi k baad, fir maut aa jaati hai…
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zindgi junoon hai…
zindgi junoon hai,
dil mein ek sukoon hai…
manzil bhot door hai,
magar rasta haseen hai…
chalo ab ise bhi aazma lete hai,
kismat ka mazaa thoda chakh lete hai…
kyonki kal kisne dekha hai…
abhi to fir bhi zinda hai…
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nav varsh
!!!! DIL KI BAAT !!!!
Har takleef ko bhul jaa
Har gam ko bhul jaaGar ho sake tau
Har ranj ko bhul jaaNaya suraj… Nayi urrza
Nayi shakti…Naya wiswaasLekar chal nayi disha main
Har purani kamjori ko bhul jaaSAB DOSTO KO NAV VARSH
KI HARDIK SHUB KAMNAYE@@ SAGAR @@
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“आगाज़” #2Liner-32
ღღ__आगाज़ तो इस बरस का, लाजवाब हुआ है “साहब”;.बस यही अन्दाज़, मेरे अन्जाम तक बनाये रखना !!……#अक्स.समस्त मित्रों एवं शुभचिंतकों को नूतन वर्ष २९१६ की हार्दिक शुभकामनाएँ !! -
वो दिन वो शाम ….
होते है वो दिन ख़ास जब ना कुछ खाते है ना पीते है पानी,
बस किसी अपने अपने की याद में आँखों से बहता है नमक का पानी ||होते है वो दिन ख़ास जब करते है किसी का घंटो इन्तजार ,
पता होता है फिर भी करते है किसी के झूठ पर विश्वास…
होते है वो दिन ख़ास जब साथ होते है दोस्त जिनसे करते है प्यार,
पर मिलता है दर्द वो करते है जब धोखे से पीठ पर वार…कुछ दिनों की ख़ामोशी… फिर कुछ और दिन ख़ास….
जब जागती है किसी अन्जान के लिए दिल में आस ||
होने लगती है दिल की हर छोटी छोटी बात …
पर सहमे से रहते है की यह भी ना छोड़ दे हाथ ||
सोचो तो वो पल भी होता है खास जब लगता है हर रिश्ते से ना जाए हार …
पर डर लगता है की मतलबी जीत से वो ना जाए हमसे हार ||होते है वो दिन बहुत ख़ास … जब हो जाता है किसी से प्यार …
पर खामोश रहते है जब पता होता है …
प्यार की आशिक़ी में पागल है अपना ही यार ||
बन जाती है फिर वो शाम खास
जब अपने प्यार को देना पड़ता है पागलपन का नाम
खवाबो से पहले देते है उनके नाम का आखिरी जाम ||
– सचिन सनसनवाल -
” नया साल आ रहा हैँ “
रह – रह कर ज़ेहन में बस यही ख्याल आ रहा हैं
मुझे तनिक बदलने दो , नया साल आ रहा हैं …..
बेचैन धड़कन हो गयी है
शायद संग अपने ख़ुशियां बे-मिसाल ला रहा हैं ….
जल उठी दिल में कंदीले – ए – इश्क़
ये बे-जुबां भी ग़ज़ले गा रहा हैँ..
सिर्फ साल बदला हैं , इंसान नहीं
कुछ तो ख़ामोश रहकर समझा रहा हैं….
वो तो कब का कह चुके हक़ीक़त में अलविदा
फिर क्यों ख़्वाबो में उनका अक्श दिखा रहा हैं……
अस्त हो गया मेरी चाहत का आफ़ताब
ये फ़लक – ए – दिल कौन सा माहताब चमका रहा हैं….
जो रुसवा हैं मना ले उन्हें पंकजोम ” प्रेम ”
साँसों का कारवाँ जिस्म से दूर होता जा रहा हैं…..
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” इस नववर्ष “
उन्नति को लगी रहे आप से मिलने की लगन ….
इस नववर्ष , आपके यहाँ हो खुशियों का आगमन ….
सिलसिलेवार रहे चेहरे पर रौनक – ए – मुस्कराहट …..
रब की रहमत से सदा महकता रहे आपका घर आँगन….
पंकजोम ” प्रेम “
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“देखा नहीं जाता” @2Liner-31
ღღ__दूर आप जा रहे हो ‘साहब’, या फिर ये दिसम्बर;
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कोई भी दूर जाये हमसे, ये देखा नहीं जाता !!…….
#अक्स




