Category: हिन्दी-उर्दू कविता

  • मुक्तक 11

    किया है खून रिश्तो का , तुम्हे कातिल कहूँ या भ्रम ,
    जला कर प्रेम का दीपक , अँधेरा कर दिया कायम .

    …atr

  • मुक्तक 10

    न देखोगे मुझे अब तुम , न अब संवाद होगा ..
    जो कल था ,आज तक जो था , न इसके बाद होगा ..

    …atr

  • गीत मेरे..

    नैनो के सूखे मेघो से मैं आज अगर बरसात करूँ ,
    हल करुँ ज़मीन ए दिल में मैं नीर कहाँ से मगर भरूँ?
    है सूख चुका अब नेत्र कूप न मन का उहापोह बचा ,
    न मेघ रहा न सावन है ,मिट गया जो कुछ था पास बचा .
    एक बार हौसला करके मैंने बीज प्रेम के बोये थे ,
    न मौसम ने रखवाली की ,सावन ने पात न धोये थे .
    अब न मन है , न मौसम है ,न उर्वर क्षमता धरती की ,
    न नैनो में अब पानी है ,न दिल में इच्छा खेती की .
    रोते है मेघ और कूप सभी ,करता विलाप अब ये मन है ,
    फिर भी न आंसू गिरते है ,न नैनो में इतना दम है .
    अब बस अंधियारी रातो का यह निपट घना सन्नाटा है ,
    दिल रोता है , मैं लिखता हूँ ,जीवन से पल का नाता है .
    मैं जाऊँ पर ये गीत मेरे ,फिर किसी जमीन ए बंज़र में ,
    मेघ बने ,बरसात करे ,फिर किसी अकालिक मंज़र में …

    …atr

  • मुक्तक 9

    लहरा रहा है सामने यादों का समंदर ,
    जो डूबना भी चाहूँ तो किस किनारे से..
    मेरे इश्क़ की दास्ताँ बस इतनी है,
    तलाश हमसफ़र की थी मुकाम तन्हाई का मिला.
    …atr

  • मुक्तक 8

    मुद्दत से तेरी आँखों में नमी नहीं देखी,
    लगता है तुमने मुझमे कोई कमी नहीं देखी ..
    यादों की लहरों पर किया है प्यार का सफर ,
    हमें है राब्ता उनसे उन्हें नहीं मेरी खबर..

    …atr

  • मुक्तक 7

    आँखों से झरते आंसू ने थमकर पूछा,
    आखिर सजा क्यों मिली मुझे ख़ुदकुशी की?
    दिल रो पड़ा पुराना जखम फिर हरा हुआ,
    कहा, गुनाह उसी ने किया जिस छत से तू गिरा ..
    ..atr

  • तो अच्छा हो

    ज़रा कुछ देर रहमत हो सके तो अच्छा हो ,

    ज़रा मन शांत होकर सो सके तो अच्छा हो.

     .

    ख़तो के ज़ाल में उलझे हुए है मीर हम , 

    ज़रा कुछ देर खुद में खो सके तो अच्छा हो . 

     .

    गुज़र गया है मुसाफिर फिर शहर से तेरे , 

    तेरा कुछ राब्ता दिल हो सके तो अच्छा हो . 

     .

    न कह पाया जुबा से हाल दिल का अब तलक, 

    ज़रा अब हर्फ़ मेरे कह सके तो अच्छा हो. 

     .

    सुना है हिज़्र के किस्से ,विरह की दास्ताँ समझी, 

    ज़रा अपना भी दिल अब रो सके तो अच्छा हो

    …atr

  • मुक्तक 6

    बर्बादी किसे दिखेगी हमारी जहाँ में मीर ,
    लुटने के बाद ग़म का खज़ाना जो पा लिया ..
    मुझको तेरी कमी तो सताती ही है मगर ,
    तू दूर जा के खुश है ये सुकून की बात है .

    …atr

  • कल फिर शाम आई

    कल फिर शाम आई और चली गयी ,
    कुछ दूर वो झिलमिलाई चली गयी .
    नींद से अपना तो कोई वास्ता न था ,
    बस आँखों में आई ,मुस्कुराई , चली गयी .
    चाँद भी रुक के देखना चाहता था कल रत ,
    उसकी माँ आई ,उसे बुलाई , चली गयी .
    कल फिर शाम आई , और चली गयी .
    फिर ख्वाब में कल रात वो आई , रुलाई चली गयी ,
    कल फिर शाम आई ,और चली गयी ..

    …atr

  • Fir Mosam brsa,

    fir Mosam brsa,
    fir aasman saaf hua..
    fir dil dhadka..
    fir kuch ehsas hua..

    lga jb aisa
    tb koi na Pass hua..

  • Kagaj K panno me

    Kagaji panno me zinda h ishq mera..
    .
    wrna tumne to ise marne me koi kasak nhi chodiiii

  • kya dusmani

    Kya dusmani rhi h
    khuda k imujse

    jo muje
    usse milne nhi de rha…

  • Mere se kya dusmani h???

    Mere se kya dusmani h???
    Saaf Saaf btate kyu nhi muje???
    Kyu itna roti hu m,
    jutha hi shi kuch to izhaar kro.
    .intzaar to m jnmo tk kr skti hu.
    .par tum Aitbaar to kro..
    Mere har bimari ki wgeh jo ho tum,
    ilaaj tum hi ho skte ho..

    mujse pyaaar to kro..

  • Khuda b mera ho chuka hota,

    Khuda b mera ho chuka hota,
    agr mne use pukara hota,
    tumhari jgeh…

  • Dard e dariya

    Dard-e- Dariya h bhut bda,
    ek muthi raat se iska kya hoga????

  • Wo Shaks

    Wo shaks jo din bhar muskurati rhi……
    aaaj royi bhut Raat bhr Muskurakar…

  • hui h nafrat is kadar unse…..

    hui h nafrat is kadar unse
    ki
    ab to baddua k liye b dua na kru…

  • मुक्तक 5

    जिंदगी बीत जाती है किसी को चाह कर कैसे? 
    कोई  बतलाये  तो मुझको मैं जीना भूल बैठा हूँ…
    अदा भी तुम ,कज़ा भी तुम ,मेरे दिल की सदा भी तुम,
    तुम्ही  अब चैन हो मेरे ,मेरे दिल की दुआ भी तुम..
    तुम्हारे प्यार की उल्फत मेरे दिल की ये तन्हाई,
    तुम्हारे प्यार की आहट मुझे जब शाम को आई
    सुबह तक सो न पाया मैं, बस यही याद थी दिल में,
    कि मैं तूफ़ान में अटका ,नहीं हो तुम भी साहिल में…
    …atr
  • मुक्तक 4

    यहाँ हर शख्स है तेरा, वहां हर कब्र है मेरी,
    जहाँ कैसा बनाया है खुद ने क्या इरादा था?

    अब तो हालात भी मुझसे मिचौली आँख करते है,
    को सपनो में आता है ,किसी को याद करते है.

    मुझे है डर कहीं फिर से किसी हूरों की महफ़िल में,
    उड़ाया फिर से न जाये ,ये कुचला जिगर मेरा..

    …atr
  • तेरी चाहत

    तेरी चाहत में इतना  मैं पराया हो गया खुद  से ,
    कि दिल मेरा है फिर भी बात  करता है सदा तेरी..

    कभी वो चांदनी मेरी थी, अब पावस की है यह रात,
    नहीं दिल में मेरे अब वो, नहीं हाथो में उसका हाथ..

    न वो मेरी न मैं उसका तो फिर ये बीच का क्या है,
    नहीं देखूंगा अब उसको जो चेहरा चाँद जैसा है…

    …atr

  • मुक्तक 3

    खड़ी है जिंदगी फिर पूछती घर का पता क्या है,
    मुझे याद नहीं है मीर तू ही जाकर बता क्या है..
    बड़ी मुश्किल है बेचारी किधर जाये ख़बर क्या है?
    कभी वो पूछती है फिर इधर क्या है? उधर क्या है?
      …atr
  • मुक्तक2

    हो गयी मुद्दत  तुम्हारे सामने आया ही नहीं ,
    है मगर सच ये कभी तुमने बुलाया ही नहीं.
    अब तो सांसो पर मेरे पहरा तुम्हारा ही रहे,
    है राज़ कि बातें,तेरे बिन एक पल बिताया भी नहीं.
      …atr
  • मुक्तक 1

    मोहब्बत के सवालों से मैं अक्सर अब मुकर जाता ,

    कहीं बातो ही बातों में मैं कुछ कहकर ठहर जाता.. 

    कि तेरा नाम भूले से जबां तक आ गया ग़र तो,

    तू बदनाम हो जाये न इससे मैं सिहर जाता …

        …atr
  • मेरी हार …

    मोहब्बत में हारे, क़यामत  में हारे
    की ये ज़िंदगी हम शराफत में हारे..

    न कोई है अपना ,न कोई पराया,
    अब जियें किसलिए  और किसके सहारे..

    न है यामिनी आज जीवन में मेरे ,
    मिटे, मिट गए आज हम फिर किनारे..

    कभी  लए  से सांसे जो चलती  थी  मेरी ,
    मगर अब खड़े आज बेबस बेचारे..

    मिला भी नहीं कुछ ,बचा  भी नहीं कुछ,
    जो था पास में सब तुम्हारे  पे हारे…

    मोहब्बत में हारे ,क़यामत  में हारे,
    की ये जिंदगी  हम शराफत में हारे…

    …atr

  • तुम्हारे लिए..

    अगर तुम बन गयी दीपक तुम्हारी लौ बनूँगा मैं,
    नदी के शोर में शायद तुम्हारी धुन सुनूंगा मैं.
    तुम्हारी याद में अक्सर यहाँ आंसू  टपक पड़ते,
    ये मोती है मेरे प्रीतम मगर कब तक गिनूंगा मैं…
    ..atr

  • तुम्हे पाने की खातिर.

    वो मंज़र याद है तुमको ,जुदा हम तुम हुए थे जब,
    समंदर याद है तुमको जहाँ पत्थर चलाया था..
    कभी जब याद आ जाये ,ज़रा हमको भी करना याद ,
    किसी के साथ जो तुमने वहां कुछ पल बिताया था.
    नहीं दिल से अभी वो शाम जाती है , नहीं होता सवेरा,
    की जब से तुम गए हो मीर, मेरा जीवन अँधेरा.
    ख़ुदा कैसी तमन्ना है,की मैं अब भी तरसता हूँ,
    पता मुझको , यकीं मुझको, मगर फिर भी मचलता हूँ…

       तुम्हे पाने की खातिर,तुम्हे पाने की खातिर..

    …atr

  • छुपा है चाँद बदली में…

    छुपा है चाँद बदली में ,अमावस आ गयी है क्या?
    नहीं देखा कभी जिसको वही शर्मा गयी है क्या?
    मिलन की रात में ये घुप्प अँधेरा क्यों सताता है ?
    वो मेरा और उसका छुप छुपाना याद आता है..
    अभी तो थी फ़िज़ा महकी , क़यामत आ गयी है क्या?

    कभी वो थी कभी मैं था, कभी चंचल चमकती रात,
     न वो कहती ,न मैं कहता मगर आँखे थी करती बात..
    जिन आँखों में हया भी थी,कज़ा अब आ गयी है क्या?

    वो नदियों के किनारो पर जहाँ जाता था मिलने को,
    वो नदियां है क्यों प्यासी सी, बुलाती है बुलाने को,
    उन्ही नदियों की रहो में रुकावट आ गयी है क्या?

    नहीं देखा कभी जिसको वही शर्मा गयी है क्या?
    …atr

  • तेरे शहर में..

    आज हम भी है मेहमान तेरे शहर में,
     दिखता नहीं मकान तेरे शहर में.
    ग़ुम हो गयी है शाम  की मस्ती  भी अब यहाँ,
    ग़ुम  हो गया करार तेरे शहर में..
    आते  राहों  में मिल  गया तेरा आशिक,
    कहने लगा  न जाओ तेरे शहर में.
    जब से तुमने छोड़ा है दस्त ए गुलाब को,
    वन हो गया वीरान ,तेरे शहर में.
    बन्दों का हाल ऐसा मैं कह न सकता मीर,
    पागल हुए जवान   तेरे शहर में.
    दिन भर उठी है धूल,पैरों में आ लगी,
    मैंने कहा  सलाम है,तेरे शहर में.
    हर दिन यहाँ पर तेरी यादो का तमाशा,
    बिकता है हर मकान तेरे शहर में.
    जो गुल था ,गुलदान था,गुलशन ,ग़ुलाब था,
    अब आंधी है ,और तूफ़ान तेरे शहर में..

    …atr

  • वह दौर था .

    मोहब्बत  का  वह  दौर  था  ,
    दिखता नहीं  कुछ  और  था ..


    बस हमारे  प्यार  का  सारे जहां में  शोर  था,
    उसने  चुराया  दिल   मेरा ,मन  भी  मेरा  चित  चोर  था ..
    आश्ना हम  भी  थे,  आशिकी  उनको  भी  थी ,
    अब  जहाँ कुछ  और  है,पहले  यहाँ  कुछ  और  था ..
    नाम  होता  था  जुबान  पर  दूसरा  वह  दौर  था, 
    एक  ही  आवाज  थी ,हर  शै  में  जो  भर  आई  थी ,
     आज  जो  घुट  सा  रहा  है ,कल  वही  बेजोड़  था ..

       .atr

  • कर्मयोगी

    कर्मयोगी

     

    अपने कामुक सुखों को कर दमन ,

    अपने गुस्से को दया मेँ कर बदल ,

    अपने लालच को दान की राह कर चलन ,

    अपने स्वधर्म को अंतर्मन से कर मनन ,

    अपने कार्यों को भक्ति भाव से कर भरन ,

    ले विजय अब कर्म योग मेँ तूं जन्म I

     

    अब उसकी राह पकड़ , निश्काम कर्म की राह तूँ जाएगा ,

    हर कर्म कर उसे समर्पण , निष्फल अब तूँ रह पाएगा ,

    अपना हर धर्म निभा , फल की चाह छोड़ तूँ पाएगा ,

    अब निभा हर कर्म को भी , अकर्मी तूँ रह पाएगा ,

    अब सब करके भी, मैं तुझको ना छू पाएगी I

     

    कर्मों के बंधन को तोड़ , सब कर्मो को उससे जोड़ ,

    ख़ुद मेँ उसका रुप जो पाएगा , फिर ख़ुद का कुछ ना भाएगा ,

    उस चेतना को ख़ुद मेँ जगा, बस उसके ही कर्म निभायेगा ,

    सब उसका खेल रचाया है , उसकी ही यह माया है ,

    वोह निर्धारित कर्तव्यों को, ख़ुद तुझसे ही करवाएगा I                                                                                                

                                                           …… यूई विजय शर्मा

  • एक मुलाकात की तमन्ना मे

    आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहे
    एक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे

    आप हमारी हकीकत तो बन न सके
    ख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे

    आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल का
    बिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे

    सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम में
    हम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहे

    जब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस में
    एक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे

    sign

  • Meri khwahiseeeeeeeeeeeeee

    muje tum jaisa sa hi bnna h
    taki tumhe hi chod du,
    hste hste…

    Behrupiya bna lo na is dil ko,
    taki
    har kisi k pehchan me na aaye,,

    phuloo ki patiyo ki trh
    har khushi chutt rhi h
    is jeewan se..

    Sukun wale pal tumhare sath hi to the

  • m Dariya hi shi,tum b boond se km nhii..

    m Dariya hi shi,tum b boond se km nhii..
    baris ki boond c hi ho tum
    is dariya ki pyas tumse mil k hi puri hogi..
    m to chlti rhugi..behti rhugi
    tumse milne ki aas me..
    dhund lena muje apne pass me…

  • nhi aaata smj ki???????

    Nhi smj aata ki
    Uski yaado ko dil me dafan hone du
    Ya likh kr sbdo me zinda kr lu..

    Nhi smj aata ki..
    Use fir apne pass bula lu or yaade bsa lu
    Ya beeti yadon k shaare hi dunia bsa lu..

    Nhii aata kuch smj ki
    Ki har baat..bebaak ..bepaak trike se tumhe suna du
    Ya fir yu hi til til kr ansu bhaa lu..

    Nhi aata smj ki
    Tere dil ko ab ajaad kr hawao me uda du
    Ya fir kaid kr..umar bhr ki sja suna du..

    Nhi aata ab kuch b smj..
    To tuje kaise b krke smja lu
    Nasamaj bn ja tu b kisi trh
    Anjan bnu m b kisi trh
    Fir lgenge hum ek dusre ko smjne
    Kisi na kisi trh..

  • ek Muddat k baad

    Ek muddat k baad
    tumse aajadi mili h.
    ab bs muskura lene do,
    ro to pehle b chuki bhut…

  • ek khat likha tha tumhe..

    Brso pehle ek khat likha tha tumhe,,

    jo tumhe mila hi nhi kbhi..

    kuki humne bheja hi nhi kbhi..

    kyu juda kru m ek khat ko b khudse

    jisme naam tumhara h jbse…

     

    har ek baat ko

    har ek yaad ko

    ek ek aansu ko

    smbhal k rkha h mne..

    kuki unme tum hi ho khin na khin

  • Sitaare

    उफ़! ये हमारे,
    अजीब से सितारे
    आज छत पे आये
    तो छुप गए हैं सारे

    रात जब सभी थे
    हम नींद ले रहे थे,
    आंख जो खुली तो

    वो पहुच से परे थे

    © piyushKAVIRAJ 

  • ए मालिक

          ए मालिक क्यों ना कुछ कमाल हो जाए ,

          ऐसा अपनी दुनिया में ध्माल हो जाए ,

          हर शैतान इंसानीयत का कायल हो जाए I

          द्वैत की उलझन सलट, सब अद्वैत हो जाए ,

          यह दुआ जो विजय की कबूल हो जाए ,

          तो हर नर तुझ्सा नारायण हो जाए I

                                                     …… यूई विजय शर्मा

  • Holi hai..!!

    तुम विष हो , अनश्वर

    तुम से मिलकर जाना ..

    कि साधना सिर्फ अमृत की बूँद  के लिए ही नहीं ,

    मृत्यु के  बाहुपाश के लिए भी की जाती है .

    तुम्हारा वरन करने के लिए बनाई है आंक के फूलों की माला

    देखो , मेरी ओर क्रोध से देखो और भस्म कर दो मुझे ,

    फिर इस गहरे लाल भस्म को अपने अंग अंग में लपेटो .

    होली है !!

  • है, तो है |

    यूँ तो है बेताब और भी कई, आशिक कई, तन्हा कई,
    पर दिल आज भी सिर्फ उसी के लिए बेकरार है, तो है |

    बहुत लिखा गया, बहुत पढ़ा गया, कुछ किया भी गया,
    प्यार, मुहब्बत, इश्क, जवानी सब लफ्फाज़ी है, तो है |

    वो 8 सालों से गाँव में अकेली रहती है, कभी न कोई ख़त न कोई तार,
    पर बूढी आँखों में बेटे से मिलने की आस, आज भी है, तो है |

    उसके सपने बांधे गए चांदी की जंजीरों से, सिसकियाँ दबा दी शहनाई की आवाज़ से,
    अब बाप के कंधो पर बेटियों का बोझ है, तो है |

    यहाँ कुछ जानें रोज जाती है, कुछ जिस्म रोज नोचे जाते हैं,
    पर इस शहर में सब अपनी धुन में मगन है, तो है |

    कुछ टूटे सपने, कुछ अनुभव खट्टे-मीठे,
    कुछ कसमें सच्ची, कुछ वादे झूठे,
    कुछ अनुत्तरित सवाल, कुछ मचे हुए बवाल
    अब इसी का नाम जिंदगी है, तो है |

  • Hasratein..

    Kal haal poocha maine anath bachhon se jaakar……
    unhone kaha sab theek hai,
    bas hasratein dum tod deti hain,
    zuban ki dehleez tak aakar

  • खामोश जुबां से इक ग़ज़ल

    रौनक-ए-गुलशन की ख़ातिर अज़ल लिख रहा हूँ
    ख्वाईश इन्किलाब की है मुसलसल लिख रहा हूँ।

    सब कुछ लूट चुका था बस्तियां वीराँ थी
    बेमतलब हुआ क्यूँ फिर दखल लिख रहा हूँ।

    आवाजों के भीड़ में मेरी आवाज़ गुम है
    अल्फाजों को मैं अपने बदल लिख रहा हूँ।

    बेबस आँखों में शोले से उफनते हैं
    अंधेरे में हो रही हलचल लिख रहा हूँ।

    उम्मीद इस दिल को फिर से तेरा दीदार हो
    ख्यालों में तेरे खोया हरपल लिख रहा हूँ।

    बेहद खौफ़नाक मंज़र है और क्या बयां करूँ
    खामोश जुबां से इक ग़ज़ल लिख रहा हूँ।

    अज़ल = beginning
    मुसलसल = बार-बार, निरंतर

  • देश बेहाल है

    हर विभाग आज सुस्त और बेहाल है
    काम कुछ नही सिर्फ़ हड़ताल है ।

    भ्रष्ट्राचार का तिलक सबके भाल है
    भेड़िये ओढे भेड़ की खाल है।

    उपरवाले तो तर मालामाल है
    हमारे खाते में आश्वासनों का जाल है।

    घोटालो से त्रस्त देश कंगाल है
    नेता बजा रहें सिर्फ़ गाल है।

    लोकतंत्र की बिगड़ी ऐसी चाल है
    ईमानदार मेहनती जनता फटेहाल है।

    चोर पुलिस नेता की तिकरी कमाल है
    राजनीति जैसे लुटेरों का मायाजाल है।

  • अखबारों के पतंग बना

    बचपन में हम उन दिनों
    बहुत ज्यादा शरमाते थे.
    कविता के दो लाइन भी
    खुलकर नही बोल पाते थे.

    दूरदर्शन के आगे बैठ
    जंगल- जिंगल गाते थे.
    पापा घर में आ जाये तब
    डर से उनके घबराते थे.

    स्कूल में हम परीक्षाओं में
    अंक बहुत अच्छे पाते थे.
    लालटेन की मंद रौशनी में
    पढ़ते-पढ़ते सो जाते थे.

    मुहल्ले के साथियों को
    कहानियाँ खूब सुनाते थे.
    एक रूपये का नोट छुपाकर
    किताबों में, हम इतराते थे.

    जाड़े की धूप में छत पे बैठ
    हम आधे बाल्टी नहाते थे.
    माँ से थप्पर खा कर ही
    फिर दिन में सो पाते थे.

    मेहमाँ जो घर में आये कोई
    देख मिठाइयाँ ललचाते थे.
    शीशी, गत्ते, कबाड़ बेच के
    मलाई बर्फ हम खाते थे.

    अखबारों के पतंग बना
    जैसे तैसे उड़ाते थे.
    दादाजी के पाँव दबा
    चार आने हथियाते थे.

  • तेरी याद लिए आती हैं।

    रात आती है तेरी याद लिए आती है
    यादों की रंगीन बरात लिए आती है
    यह मुश्किल है कि तेरी याद ना आये
    कैसे भूलूं वो मुलाक़ात लिए आती है ।

    यादों के भंवर मे किनारा नही मिलता
    आसमा मे दुसरा सितारा नही मिलता
    तनहा दिल है मेरा तेरे इंतज़ार मे
    जीने का और सहारा नही मिलता।

    कोशिश तुम्हारे पास आने की है
    प्यार भरे दिल मे समाने की है
    ये दूरियां कब ख़त्म होगी
    एहसास जवा तुम्हे पाने की है।

    और इंतज़ार बेक़रार किये जाती है
    नींद भी मुझसे इनकार किये जाती है
    आँखों मे सिर्फ तेरे ख्वाब लिए आती है
    रात आती है और तेरी याद लिए आती है।

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