सरहद के मौसमों में जो बेरंगा हो जाता है, तिरंगे से लिपट कर एक दिन वो तिरंगा हो जाता है।। राही (अंजाना)
सरहद के मौसमों में जो बेरंगा हो जाता है, तिरंगे से लिपट कर एक दिन वो तिरंगा हो जाता है।। राही (अंजाना)
उम्र तो बस तेरी कोख में बढ़ रही थी, अब तो हर पल जिंदगी घटटी नज़र आती है।। राही (अंजाना)
हार के अँधेरे से कभी डरता नहीं, मैं राही सफर में कहीं रुकता नहीं।। राही (अंजाना)
मैं खुद उलझनों से कभी जब निकल पाता नहीं, वो हर बार अपने बालों सा सुलझा देती है मुझे।। राही (अंजाना)
रात भर ख़्वाबों में परेशान करती है जो नज़र, सहसा ही सुबह को हैरान करती है वो नज़र।। राही (अंजाना)
वो अपने होने का एलान कर देता है, मेरे हर सफर को वो यूँ आसान कर देता है।। राही (अंजाना)
झूठ के रस्ते पे सच का फ़रिश्ता मिला, मुझे हर कोई रिश्ता बड़ा पक्का मिला।। राही (अंजाना)
जिस्म छोड़ कर रूह पे असर उसका होता रहा, दवा नहीं मर्ज़ ऐ मोहब्बत की चपेट में था मैं।। राही (अंजाना)
ख्वाबों में आकर वो हमसे रोज़ मिलते रहे, और हम मासूम बस उनसे यूँहीं छलते रहे।। राही (अंजाना)
मोहब्बत की तालीम कहीं मिलती नहीं यहाँ पर, फिर भी इस रंग में लोग रंगे नज़र आते हैं।। राही (अंजाना)
हर सुबह ज़िन्दगी की नई जंग शुरू करता हूँ, हर शाम तजुर्बों से अपनी किस्मत बुनता हूँ।। राही (अंजाना)
जवाब देने में हाजिरजवाब बताये गए हम, अपने ही घर में खामोश कराये गए हम।। राही (अंजाना)
जब बोलते रहे तो कोई सुनने वाला न मिला, जब खामोश हो गए तो बहुत सुना गया हमें।। राही (अंजाना)
मान लिया था हमने हर सबेरा है अपना, फिर कुछ यूँ हुआ के कभी रात हि ना गुजरी… —विद्या भारती —
तुझको अपने सिरहाने रख सोता हूँ, मैं तुझ संग ही अपने सपने बोता हूँ।। राही (अंजाना)
इंतज़ार के बाद मिलने का मज़ा आ गया, सुबह दरवाजे पर मेरे उसका तार आ गया।। राही (अंजाना)
बारिश में नहाये तो हम सभी थे मगर, जिनके उतरने थे सारे रंग उतर गए।। राही (अंजाना)
उसके चेहरे को देखकर मैं दीवाना हो गया, मेरी छोड़ो आइना भी उसका दीवाना हो गया।। राही (अंजाना)
कोई दवा कोई दुआ काम न आई, आँख जब बन्द की तो सामने माँ आई।। राही (अंजाना)
यार इसमें तो मज़ा ही नहीं, कोई हमसे खफा ही नहीं, इश्क है मर्ज़ है दोस्त, इसकी कोई दवा ही नहीं।। राही (अंजाना)
हाथों की लकीरों में तेरा नाम नही देखा तो, लेकर कलम हाथों में खुद ही तेरा नाम लिख लिया।। राही (अंजाना)
मोहरे बड़े होकर भी पीछे खड़े रहते हैं, बिसात पर सैनिकों का ओहदा ज़रा हटके है।। राही (अंजाना)
मुमकिन नहीं के किसी की तकदीर खरीद ले कोई, बादशाह कितना भी बड़ा हो इस शहर का कोई।। राही (अंजाना)
पत्थरों को चीर कर रस्ते बना लेता है, जब पानी अपनी सारी हदें मिटा देता है।। राही (अंजाना)
मेरी आँखों की पलकों पर तेरी यादें बसती हैं, इस डर से इनको झपकाने से डरता हूँ मैं।। राही (अंजाना)
मेरी आँखों की पलकों पर तेरी यादें बसती हैं, इस डर से इनको झपकाने से डरता हूँ मैं।। राही (अंजाना)
Bhar gaya h man jhuti baton k meethe swad se ! Sach suna de koi to tavyat sudhar jaye !!
कितना भी पढ़ लूँ मगर भूल ही जाता हूँ, तेरे चेहरा मुझे किसी किताब से कम नहीं लगता।। राही (अंजाना)
कितना भी पढ़ लूँ मगर भूल ही जाता हूँ, तेरे चेहरा मुझे किसी किताब से कम नहीं लगता।। राही (अंजाना)
मैं कुछ कहता नहीं वो सब जान लेती है, सच महबूबा नहीं है कोई वो माँ है मेरी।। राही (अंजाना)
ख्वाबों का क्या है हर रोज़ बदल जाते हैं, दिलों में रहते हैं जो वो चेहरे नहीं बदलते।। Rahi
अभी जा रहे हो फिर लौट कर आना, जब तुम नहि होते तो वक्त कटता नहीं मेरा।। राही
ये मेरे ख्वाब हकीकत में तब्दील हो जायें, गर दिल के राज़ मेरे तेरी आँखों की तदबीर हो जायें।। राही (अंजाना)
मत रो ऐ आसमान यूँ बिखर के ऐसे , थम जा जरा ! गम का बस एक किस्सा सुनाया था , अभी तो पुरी कीताब बाकी है !!
आवाज को नहीं, अपने अलफ़ाज़ को ले जाओ बुलंदी पर बादलों की गरज नहीं, बारिश की बौछार फूल खिलाती है
जलने और जलाने का बस इतना सा फलसफा है फिक्र में होते है तो खुद जलते हैं बेफ़िक्र होते हैं तो दुनिया जलती है
मुझ पर दोस्तों का प्यार, यूँ ही उधार रहने दो बड़ा हसीन है ये कर्ज, मुझे कर्जदार रहने दो
अक्सर वही रिश्ते लाजवाब होते हैं, जो एहसानों से नहीं एहसासों से बने होते हैं।
अपने जलने मैं नहीं करता किसी को, शरीक.. रात होते हीं मैं शम्मा बुझा देता हूँ।
ये इश्क है जनाब यहा इंसान निखरता भी, कमाल का है और बिखरता भी कमाल का है।
बात वफ़ाओ की होती तो कभी न हारते, बात नसीब की थी कुछ ना कर सके।
मैने इक माला की तरह तुमको अपने आप मे पिरोया हैं, याद रखना टूटे अगर हम तो बिखर तुम भी जाओगे।
बचपन के खिलौने सा कहीं छुपा लूँ तुम्हें, आँसू बहाऊँ, पाँव पटकूँ और पा लूँ तुम्हें।
हम वो ही हैं, बस जरा ठिकाना बदल गया हैं अब, तेरे दिल से निकल कर, अपनी औकात में रहते हैं।
सबने कहा, बेहतर सोचो तो बेहतर होगा, मैंने सोचा, उसे सोचूँ, इससे बेहतर क्या होगा।
काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, वो आके गले लगा ले मेरी इज़ाजत के बगैर।
✍✍ये मतलबी दुनिया मे मेरा कोई ना अपना मिला,, जो मिला लिबाज की तरह बदल कर दर्द दे निकल पड़ा।।✍✍✍
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