✍✍जो लिबाज की तरह बदल गये जवाने उसी को बहादुरी दी,, जो इंसानयत पर डटे रहे जवाने उसी को गाली दी✍✍✍
✍✍जो लिबाज की तरह बदल गये जवाने उसी को बहादुरी दी,, जो इंसानयत पर डटे रहे जवाने उसी को गाली दी✍✍✍
✍✍काश मेरे हाथ मे किश्मत का लकीर होता ,, तो शायद तुम्हारा ही नाम होता।।✍✍ ज्योति
समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते, हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते, बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं, तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।। राही (अंजाना)
सेहम जाती है आँखे अधुरे ख्वाहिशों के बारिश में भीग कर, एहसासों के बदलते भंवर में अक्सर डुब जाती हुं मैं ….
सेहम जाती है आँखे अधुरे ख्वाहिशों के बारिश में भीग कर, एहसासों के बदलते भंवर में अक्सर डुब जाती हुं मैं ….
तुझको इतना याद किया, मैं खुद को ही भूल गया, तेरे ख्वाबो में सोया था, के मैं उठना ही भूल गया।। राही (अंजाना)
बहुत कुछ भूलने लगा हूँ मैं, एक तुझमें ही घूमने लगा हूँ मैं।। राही (अंजाना)
नींदों के साथ ख्वाब भी ले गई, वो मेरे हाथ में अपनी तस्वीर दे गई।। राही (अंजाना)
टूट कर जुड़ता नहीं एक टुकड़ा भी जहाँ, मैंने खुद बैठकर जोड़े हैं दिल के टुकड़े अपने।। राही (अंजाना)
बचपन के सारे खिलौने बेच दूँ, तेरे एक इशारे पे मैं खुद को बेच दूँ।। राही (अंजाना)
रंगहीन ज़िन्दगी को रंगीन बना दिया, जिस पल तूने मुझे अपना चेहरा दिखा दिया। राही (अंजाना)
आसमान में कटते ही लूट ली जाती थी, अब उड़ती हुई कहीं वो पतंग नहीं दिखती।। राही (अंजाना)
रिश्तों के मन्ज़र चुप चाप देखने पड़े, कई बार मुझे अपने ही ख्वाब तोड़ने पड़े।। राही (अंजाना)
बांध कर हाथ में घड़ी दो घड़ी न पकड़ सका, हर पल रेत सा सरकता रहा पल पल वक्त मेरा।। राही (अंजाना)
किसी के कहने से सुधर जाऊं मैं, अभी इतना भी बिगड़ा नहीं हूँ मैं।। राही (अंजाना)
कदम छोटे छोटे रखकर रक़ीब आ गया, एक लम्हा मेरे इतने भी करीब आ गया।। राही (अंजाना)
अँधेरे के पार चलके देखना होगा, रौशनी का अब न इन्तज़ार देखना होगा। राही (अंजाना)
तू ही सहारा तू ही किनारा बन गया, जिस पल से तू बस हमारा बन गया। राही (अंजाना)
व्यवहार चेहरे से झलक जाने लगे, हम एक दूजे के करीब आने लगे।। राही (अंजाना)
जब कोई मिला ही नहीं मुझे कुछ कहने के लिए, तब खामोश तस्वीरों को मैने अपना मित्र बना लिया।। राही (अंजाना)
मैं वो गुलाब हूँ जो अपनी ही खुशबू भूल गया, जिस पल से तेरे बदन की खुशबू सूंघ ली मैने।। राही (अंजाना)
मैं वो गुलाब ही जो अपनी ही खुशबू भूल गया, जस पल से तेरे बदन की खुशबू सूंघ ली मैने।। राही (अंजाना)
किसी बोतल का नशा चढ़ा ही नहीं मुझपर, तेरे इश्क के समन्दर में गोते मारने के बाद।। राही (अंजाना)
चलते चलते थक रहा हूँ मैं, शायद अंदर से जल रहा हूँ मैं।। राही (अंजाना)
शर्म के पर्दे अक्सर उठ जाया करते हैं, मोहब्बत में जब दो लोग करीब आते हैं।। राही (अंजाना)
तेरी बेवफाई का ज़रा इल्म भी हो जाता, तो राही तेरे प्यार में दीवाना न हो जाता।। राही (अंजाना)
तुम्हारा इस कदर चर्चा हुआ, के मेरा घर रहा महका हुआ। राही (अंजाना)
हार कर जीतने का हुनर सीख़ लिया, मैने लहरों से सारा समन्दर खींच लिया।। राही (अंजाना)
हर बात की हद होती है, ख़ामोशी बेहद होती है। राही (अंजाना)
साँप सीढ़ी को छोड़कर साँप कहीं और जाने लगे, जबसे उँगलियों को लोग अपनी कीबोर्ड पर चलाने।। राही (अंजाना)
छोड़ कर बिसात को मोहरे समाज पर सजाने लगे हैं, लोग अपने ही लोगों पर देखो चाले लगाने लगे हैं।। राही (अंजाना)
एक माँ के लिए एक माँ को छोड़ देता, सैनिक जब सम्बन्ध सरहद से जोड़ लेता है।। राही (अंजाना)
अँधेरे में भी रौशनी का एहसास होता है, जिस पल तू मेरे आस-पास होता है।। राही (अंजाना)
आत्मविश्वास से पैदल चलने में दिक्कत नहीं होती, संदेह में दौड़ने की आदत नहीं हमें।। राही (अंजाना)
ज्ञान से शब्दों के उलझे जाले सुलझाने लगे, हुआ जब अनुभव तब अर्थ समझाने लगे।। राही (अंजाना)
बंजर भुमी मे बीज नही बारूद बोयेगे कह दो अब दुश्मन से हाथ जोड़ेगें नही बार करवायेगे✍✍ – ज्योति
✍✍इतना जगह दिया तुझे दिल की फुलवारी मे, तु दो खुदगर्ज निकली तोड़ ली सारी फल और झकोर दी मेरी कोमल सी फुलवारी।✍✍✍ – ज्योति
किसी ने पूछा, दिल की खूबी क्या है, हमने कहा, हजारो ख्वाहिशों के नीचे दबकर भी धड़कता है
शतरंज की बिसात का वो मोहरा हूँ मैं, जो आखरी खाने पर पहुँच वजीर बन जाता है।। राही (अंजाना)
जीत और हार के डर से आगे निकल आया हूँ, मैं राही अपने ही सपनों से आगे निकल आया हूँ।। राही (अंजाना)
कोई गवाह कोई सबूत नहीं मिलेगा तुम्हें, मोहब्बत ख्वाबों में जो जवान हुई है मेरी ।। राही (अंजाना)
वक्त की जंज़ीर भला मुझे बांधेगी कैसे, मैं तो पानी हूँ पत्थर भी चीरे हैं मैने।। राही (अंजाना)
ख़ामोशी की कीमत एक दिन मुझे समझ तब आई, जब वो मुझसे कहती गई न हुई मेरी सुनवाई।। राही (अंजाना)
अपने ही अपनों को काटने को बैठे हैं, यहां इसांन जानवर से भी बड़े दांत लिए बैठे हैं।। राही (अंजाना )
अँधेरे सभी मिटाने को अब दीपक स्वयं जलाने होंगे, मन के मैल मिटाने को अब प्रेम के रंग चढ़ाने होंगे।। राही (अंजाना)
पास रहकर भी पास नहीं रहती, तेरी याद मुझसे कभी उदास नहीं रहती।। राही (अंजाना)
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