प्यार करने की कोई वजह नहीं होती दिलजलों के लिए कोई जगह नहीं होती !
प्यार करने की कोई वजह नहीं होती दिलजलों के लिए कोई जगह नहीं होती !
बहुत खूब लिखती हैं आप जैसे कोई कद्रदान मिला आपकी सायरी पढ़कर लगता है जैसे वरदान मिला !
लिखने को बहुत है पर कोई वजह तो मिले मिलने को बहुत है पर कोई जगह तो मिले !
Always try to be a good friend and never try to be a lover.
मैं नहीं कहता कि मैने किसी से प्यार नहीं किया, हाँ किया मगर किसी ने भी मुझे स्वीकार नहीं किया !
Love is natural law, no body can avoid it.
हसीनों की वादियों में बदसूरतों को भी रहने दीजिए, दर्द कितना है फ़िज़ाओं में ज़रा हमें भी सहने दीजिए ! जानते हैं वक़्त है आपका पर हमें भी थोड़ी पनाह दीजिए, मारना है तो फिर […]
वो मुझे छोड़कर दुसरे के बाहों मे चैन की नींद सो रही है, और मै सिसक रहा हूँ उनकी तस्वीर को बाहों में लेकर!!
दफ़न कर दूं अब अहसासों को यही इक काम अब ठीक रहेगा
Kabhi hum aahein bharte hai, kabhi fariyad karte hai… Tumhe aye bhulne wale hum ab tak yaad karte hai.
क्या ठिकाना है मेरा मुझे नहीं पता लापता हूं अरसे से खुद में कहीं
तेरे बाहों के हार में, सब कुछ हार जाऊं। तुझ पर अपना दिलो – जां मैं वार जाऊं। तुझ से हार कर भी जीत है मेरी ‘देव’, तेरे आगोश में, जन्नत का मैं करार पाऊं।
अपनी आकांक्षाओं को, मैं पर देना चाहता हूं। खुले आसमान को, मुट्ठी में कर लेना चाहता हूं। कल्पनाओं को आकार देना इतना भी मुश्किल नहीं, बस अपनी सोच को, नई नजर देना चाहता हूं। देवेश […]
दिल की कलम से ये पैगाम लिखता हूं। तुम्हारे हिस्से खुशियां तमाम लिखता हूं। खुशियों से रोशन हो हर राह तुम्हारा, नये साल का नया कलाम लिखता हूं।।
लोग पुराने अफ़साने लिखते है मैं नई इबारतें लिखना चाहती हूं
खुद को अब किस जगह ढ़ूढ़ूं अब मैं मैं मुझी में खो गई हूं शायद
तुम गणनों में जीते हो, हम गणों में जीते हैं। तुम सिफ़र में जीते हो, हम सफ़र में जीते हैं।
दर्द के हर एक कतरे को सहेज कर रखती हूं मैं कब जाने कौन सा कतरा तुम्हे मेरे करीब ले आये
हम जब भी थके तो मंजिल को पास बुला लिया। कूछ रास्ता हमने तय किया तो कूछ मंंजिल ने, दोनों ने मिलकर अपना तकदीर बना लिया।।
ज़िंदगी से हम अपनी कुछ उधार नही लेते, कफ़न भी लेते है तो अपनी ज़िंदगी देकर!!🌹Wahid✍
मुट्ठी में छुपा कर किसी जुगनू की तरह ….. हम तेरे नाम को चुपके से पढ़ा करते हैं🌹✍Wahid
माटी मेरी प्रीत की पल पल पक्की होती जाये देख जीत मेरी प्रीत की, तेरा रंग क्यों फीका पड़ता जाये
थक गया देखते देखते राह तेरी आँसू भी बहने लगे आँख से मेरी
ख्याल आते तो है मगर दब जाते है कहीं दिल में अक्सर डर जाते है जमाने के कहर से
कोई लफ़्जों में कैसे बयां करें अपनी दास्ता दर्द हर लफ़्ज के साथ गहराता जाता है
किसी कीं ख़ातिर दिल में मोहब्बत लेकर भटक रहे हैं सब ख़रीददार मिलते हैं, बिकनेवाले नहीं मिलते |
हमेशा किसी की तलाश रहती है मुझे लगता है जो कुछ है वो अधूरा है अल्फ़ाजों में कहां समाता है जो जहन में गूंजता है वो ही पूरा है
पक्षी उड़ान भरता है और इंसान चाल चलता है। पक्षी एक वक्त का खा के भी खुश है और इंसान 7 पीढ़ियों का जोड़कर भी खुश नही।
कितने चेहरे सामने आते जाते है हर रोज फिर क्यों कोई इक चेहरा दिल में अटक जाता है
कौन सा रंग भरू, किस रंग से उकेरू मैं जिंदगी की तस्वीर फीकी जिंदगी को र्ंग नही जचते|
दिल से दिल तक अपना रस्ता बना लेती है, एक हिंदी है जो सबको अपना बना लेती है।। राही (अंजाना) हिंदी दिवस की शुभकामनाएं।
हजारों पहरों के बीच भी चेहरा तेरा देख लेता हूँ, मेरी आँखों में तुझको मैं इतना गहरा देख लेता हूँ।। राही (अंजाना)
किसी साज़ की आवाज़ ने मेरे दिल को छुआ ही नहीं कबसे, तुम्हारी साँसों के समन्दर की आवाज़ में मैं डूब गया जबसे।। – राही (अंजाना)
ये बारिश ये हसीन मौसम और ये हवाये लगता है आज मोहब्बत ने किसी का साथ दिया है.
ये दिल बहुत ज़िद्दी है मेरा! मंज़िल-द़र-मंज़िल सफ़र करता है ठिकाना नहीं कोई इसका, ये सड़कों पर बसर करता है
उन्हीं की अदालत है, उन्हीं के वकील सारे, अब बेगुनाही के सबूत मेरे सब उन्हीं के हाथ हमारे।। – राही (अनजाना)
निशानी ऊँगली पर पहन कर मेरी छुपाते हुए, वक्त-वक्त पर वक्त का गिनना तेरा अच्छा लगा, कहा बहुत कुछ ख़्वाबों में हर रात तुमने मुझसे, और मुझे तेरा मुझसे नज़रें चुराना अच्छा लगा।। – राही […]
बारिश भी कहीं भी कभी भी हो जाती है सूखे मन को नम कर से ऐसा कोई नहीं
किस से सिकवा करू, किस से सिकायत करू ; जब अपना समझा ही नही तो किस से दिल की बात कहूँ। ज्योति।
फूलों से फूल कर अक्सर कुप्पा हो जाते हैं, चन्द शब्द मेरे तुमसे जब चुप्पा हो जाते हैं।। – राही (अंजाना)
बेमोल थे जो झूठे बाज़ार में, वो सारे साहूकार बिक गए, मैं अनमोल ही था सच है,जो मेरा कोई मोल न लगा।। – राही (अंजाना)
सरहद के मौसमों में जो बेरंगा हो जाता है, तिरंगे से लिपट कर एक दिन वो तिरंगा हो जाता है।। राही (अंजाना)
मैं अमन पसंद हूँ, मेरे शहर में दंगा नहीं शांति रहने दो..!! लाल और हरे में मत बांटो, मेरी छत पर तिरंगा रहने दो..!! ??जयहिन्द??✍वाहिद
बातें बड़ी बनाने लगे, हम शहर में पाँव जमाने लगे, दिन में सोया करते थे, हम रातों को साथ जगाने लगे।। राही (अंजाना)
बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है, चोटी की हर गुथ में वो मेरे गम बुहारा करती है।। राही (अंजाना)
मुख पर हँसी और दिल में दर्द लिए बैठे हैं, कुछ लोग इसी तरह हमें गुमराह किये बैठे हैं, रहते हैं साथ मगर खुद से दूर किये बैठे हैं, कुछ लोग जलकर भी रौशनी किये […]
Ek hasin harkat hai, esa ho jana tumhari ankhon main chalna aur kho jana…
चाहतों की चाह में बहुत आगे निकल आये, कुछ लोग देखो अपनों से आगे निकल आये।। राही अंजाना
उसको चाहा तो मोहब्बत की तकलीफ नजर आई ! वरना इस मोहब्बत की बस तारीफ़ सुना करते थे..!!?Wahid✍
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